दुनिया का सबसे पुराना धर्म कौन सा है?

1. सबसे जटिल प्रश्न

दुनिया का सबसे पुराना धर्म

“धर्म” शब्द अपने आप में एक प्रश्न है जिसका उत्तर एक नहीं हो सकता और इसे सिर्फ एक परिभाषा से परिभाषित भी नहीं किया जा सकता है मैं मानता हूँ कि यह एक सागर की तरह है, जिस तरह सागर में  कई नदियाँ आकर मिलती है, और अंत में सागररूपी हो जाती है उसी तरह धर्म शब्द में सनातन, पारसी, यहूदी, जैन,इस्लाम और ईसाई धर्म ये सभी सम्मिलित हो जाते हैं। ये निर्णय लेना बहुत जटिल हो जाता है कि कौन सा धर्म सबसे अच्छा है।

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‘दुनिया का सबसे पुराना धर्म कौन सा है?’ ये सदियों से सभी के मन में एक प्रश्न के रूप में रहा है। तो चलिए फिर इस आर्टिकल में हम सभी धर्मों को एक-एक करके विस्तार से जानेंगे और इस पहेली को सुलझाने का प्रयास करेंगे कि “कौन सा धर्म सबसे पुराना है?” फिर बिना किसी देरी के शुरू करते हैं –  

2. दुनिया का सबसे पुराना धर्म होने का आधार क्या होगा?

‘दुनिया का सबसे पुराना धर्म’ ये सवाल जितना आसान दिखता है उतना है नहीं | ‘पुराना’ शब्द को कैसे मापा जाये, इसका क्या आधार हो, पैमाना कैसे  निश्चित करें ? अगर इस सवाल का जवाब मिल जाये तो इस रहस्य को सुलझाना बहुत आसन हो जायेगा।

मुझे लगता है कि हमें इसे तीन कसौटियों पर परखना चाहिये। जो निम्न है –

(A) लिखित प्रमाण (Written Records)

इसके माध्यम से हम यह सत्यापित करने का प्रयास कर सकते हैं कि सबसे पुराना लिखित प्रमाण क्या – क्या है। अगर हम सबसे पुरानी लिखित धार्मिक पांडुलिपियाँ निकालें तो हिंदू धर्म के वेद लगभग 1500 – 1200  ईसा पूर्व के हैं और जरोएस्ट्रियन धर्म की गाथाएँ भी लगभग 1200 – 1500 ईसा पूर्व की हैं। और यहूदी धर्म भी इसी समयावधि के आस पास लिखा गया माना जाता है। 

विद्वानों का मानना है कि लिखित प्रमाण पूरी कहानी नहीं बताते क्यूंकि कई प्राचीन परम्पराएँ लिखी ही नहीं गई है और लिखी भी गई है तो उसके रिकॉर्ड नष्ट हो चुके हैं। उदहारण के लिए मेसोपोतामियां और मिस्त्र  की प्राचीन मान्यताएं लिखित इतिहास में तो सबसे पुरानी है किन्तु आज के समय में मौजूद नहीं है।

(B) मौखिक परम्परा (Oral Tradition)

किसी भी धर्म के लिए लिखित प्रमाण होना तो बाद में आया इसके पहले सभी साक्ष्य मौखिक हुआ करते थे। प्राचीन काल में गुरु अपने शिष्यों को सभी वेद और पुराण कंठस्थ कराया करते थे जो पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती थी। मौखिक परम्परा में तीन तत्व महतवपूर्ण भूमिका निभाते हैं – समय, स्मृति और विश्वास। अगर इन तीनों तत्वों में कुछ असामनता हुई तो अर्थ का अनर्थ हो जाता है। इसलिए मौखिक परम्परा में उतनी स्थिरता नहीं देखने को मिलती है, जितनी लिखित परम्परा में आती है।

(C) आज भी जीवित रहने वाली प्रथा

अब मैं लिखित और मौखिक कसौटियों से आगे बढ़कर देखता हूँ तो पाता हूँ कि हिंदू धर्म 99% उसी रूप में है‌‌‌‍‍। यहूदी धर्म में जहाँ पहले पशु बलि प्रथा प्रचलित थी जो अब बंद हो गई है। प्राथनाएँ पहले यरूशलेम के मंदिर में होती थी जो अब बंद होकर आराधनालय (Synagogue) में होने लगी  अर्थात ये धर्म अपने मूल स्वरूप का 50% हैं। जैन धर्म भी अपने मूल स्वरूप का 60% बचा है। बौद्ध धर्म भी अपने मूल स्वरूप का 40% ही बचा है। पारसी धर्म 85% बचा है किन्तु आदिवासी धर्म अपने मूल स्वरूप का 90% है लेकिन वे संगठित नहीं हैं।

3. दुनिया का सबसे पुराना धर्म – सनातन (हिंदू धर्म) की उत्पत्ति

आज जब मैं ये आर्टिकल “दुनिया का सबसे पुराना धर्म कौन सा है?” लिखने जा रहा हूँ तो मुझे अपनी दादी की कही हुई एक बात याद आ रही है। वह कहती थी “बेटा, हमारा धर्म तो अनादि है , इसका न तो कोई आदि है और न ही  अंत।” पहले मैं इसे सिर्फ एक कथन मानता था किन्तु जब मैंने किताबें पढ़ी, पुरातत्व के नतीजे देखें और खगोलीय घटनाओं पर गौर किया तो मुझे भी ये बातें सच प्रतीत होने लगी।

हिंदू धर्म में आज भी सुबह उठकर उसी विधि, उसी मंत्र और उसी श्रध्दा के साथ सारे कर्म किये जा रहे हैं जो आदि काल में होता था | हिंदू धर्म को दुनिया का सबसे पुराना धर्म माना जाता है। इसे “सनातन या शाश्वत धर्म” भी कहा जाता है। इसका कोई संस्थापक (Founder) नहीं है। यह स्वयं प्रकट (Self Manifested) हुआ है। ईसाई (Jesus), इस्लाम (Mohammad), बौद्ध (Buddha), जैन (Mahavir) इन सभी के संस्थापक थे लेकिन हिंदू धर्म निराकार और अनादि है। 

मुझे ऐसा लगता है कि इसकी प्रथाएँ किसी एक व्यक्ति से नहीं, बल्कि सामूहिक चेतना से उत्पन्न हुई है, इसलिए ये आज भी अपने मूल स्वरूप में है। कुछ विद्वान हिंदू धर्म की जड़े सिन्धु घाटी सभ्यता जो 2500 ईसा पूर्व से भी जोड़ कर देखते हैं।

ब्रिटानिका विश्वकोश (Encyclopedia BBritannica) के अनुसार ऋग्वेद की रचना 1500 ईसा पूर्व के आसपास हुई थी। इसकी पांडुलिपियों को विश्व धरोहर (World Heritage) में शामिल किया है।

सनातन धर्म ने अपना मूल स्वरूप सबसे अधिक बचाकर रखा है | कैसे? आइये इसे जानने का प्रयास करते हैं –

(A) अग्निहोत्र (यज्ञ)

यह अनुष्ठान वेदों में वर्णित है। इसमें अग्नि में आहुति दी जाती है। यह परम्परा आज भी लगभग हर पूजा में देखने को मिलती है। अगर सत्यनारायण की कथा हो, महामृत्युंजय मंत्र का जाप हो, रुद्राभिषेक का पूजन हो या कोई और विधि अंत में यज्ञ करते हुए आहुति देने की परम्परा आज भी प्रचलित है।

(B) तुलसी पूजा

इसके साक्ष्य सिन्धु घाटी सभ्यता में मातृदेवी वृक्ष पूजा के रूप में मिलते हैं। हिंदू धर्म में शायद ही कोई ऐसा घर होगा जहाँ तुलसी का पौधा ना हो। हर घर में सुबह सुबह तुलसी की पूजा आराधना की जाती है और जब तुलसी विवाह का पर्व आता है तो सारा समाज भाव विभोर हो उठता है। अतः मैं ये कह सकता हूँ कि हिंदू धर्म में केवल देवी – देवता ही पूजनीय नहीं है बल्कि वनस्पतियों को भी वही स्थान प्राप्त है जो देवी देवताओं को। उदाहरण के लिए बरगद का वृक्ष जिसकी पूजा वट सावित्री में की जाती है।

(C) सूर्य नमस्कार

वैदिक काल में सूर्य को प्रत्यक्ष देवता माना जाता था और आज भी योग के रूप में सूर्य नमस्कार किया जाता है। हर कोई सुबह स्नान करने के बाद सूर्य को जल अर्पित करता है।

(D) गाय की पूजा और गोबर/गोमूत्र का उपयोग

ऋग्वेद में गाय को “अघ्नाया” (जो कभी मारने योग्य नहीं) माना गया है, और आज भी गोदान तथा गोसेवा की जाती है। इससे मिलने वाले गोबर और गोमूत्र का उपयोग औषधियों बनाने में किया जाता है।

(E) तीर्थ यात्रा

पुराणों में वर्णित तीर्थ यात्रा परम्परा आज भी जीवित है। लोग चार धाम की यात्रा आज भी पुरे मन से जाया करते हैं।

(F) छठ पूजा

दुनिया का सबसे पुराना धर्म

इसे सूर्य उपासना का पर्व भी कहा जाता है। ये ऋग्वेद के सूर्य – सूक्त  से जुड़ा है। पहले ये पर्व मुख्य रूप से केवल उत्तर प्रदेश और बिहार में मनाया जाता था किन्तु आज इसे पुरे भारत वर्ष में मनाया जाता है।

(G) वैदिक मन्त्रों का जाप

गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र और भी कई मंत्र लाखों लोगों द्वारा प्रतिदिन जपे जाते हैं। ये सभी मन्त्र लगभग 5000 साल पुराने हैं किन्तु फिर भी उसी स्वर (उच्चारण) में जपे जातें हैं।

Association of Religion Data Archives (ARDA) और विश्व धर्म डेटाबेस (Wrold Religion Database) के 2025 केआकड़ों के अनुसार दुनिया भर में हिंदू धर्म को मनाने वालों की संख्या लगभग 1.2 अरब है, जो वैश्विक आबादी का लगभग 13.85% है और यह दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा धर्म है।

हिंदू धर्म को मनाने वाले केवल भारत में ही नहीं बल्कि अन्य देशों में भी है। जैसे – नेपाल, बांग्लादेश, मॉरिशस और कई अन्य देश |  

इतना सब देखने के बाद मैं ये कहना चाहूँगा कि “सबसे पुराना” होना गौण है। महत्वपूर्ण है- ‘सनातन (शाश्वत)’ होना और ये परिभाषा इस कसौटी पर पूरी तरह से हिंदू धर्म के साथ खड़ी होती है।

(H) हिंदू धर्म के कुछ प्रसिद्ध कथन

“आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः” (ऋग्वेद 1.89.1)
अर्थ –
यह ऋग्वेद का सबसे प्रसिद्ध मंत्र है जो सिखाता है कि ज्ञान और अच्छाई किसी एक धर्म, देश या परंपरा तक सीमित नहीं है, बल्कि संपूर्ण विश्व से ग्रहण करने योग्य है ।

“एकं सद् विप्राः बहुधा वदन्ति” (ऋग्वेद 1.164.46)
अर्थ –
यह हिंदू धर्म की सबसे मौलिक शिक्षा है। यह बताती है कि सभी धर्मों के पूज्य एक ही परम सत्य की ओर इशारा करते हैं, चाहे उसे किसी भी नाम (राम, अल्लाह, वाहेगुरु, ईश्वर) से पुकारा जाए।

“कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥” (भगवद्गीता 2.47)
अर्थ –
भगवान कृष्ण का यह अमर वचन सिखाता है कि इंसान को अपने कर्तव्य (कर्म) पर ध्यान देना चाहिए, न कि उसके परिणाम (फल) पर। यह निष्काम कर्म का सिद्धांत है।

“उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य न प्राप्त हो जाए।”
अर्थ
– यह कथन स्वामी विवेकानंद द्वारा कहा गया है | यह कथन आलस्य, भय और निराशा को त्यागकर आत्म-सशक्तिकरण और पुरुषार्थ का संदेश देता है। यह युवाओं के लिए सबसे प्रेरक विचारों में से एक है।

“हिंदू धर्म ने स्वयं को कोई नाम नहीं दिया, क्योंकि उसने स्वयं को कोई सांप्रदायिक सीमा नहीं दी; यह एक मत या पंथ से कम और मानव आत्मा की ईश्वर-अभिमुख यात्रा की एक सतत विकसित होती परंपरा अधिक है।”
अर्थ
– श्री अरबिंदो हिंदू धर्म की उदारता, खुलापन और वैश्विक दृष्टि को रेखांकित करते हैं — कि यह एक बंद धर्म नहीं, बल्कि सत्य की अंतहीन खोज है।

4. यहूदी धर्म - दुनिया का सबसे पुराना धर्म "एकेश्वरवादी"

यहूदी, दुनिया का सबसे पुराना धर्म एकेश्वरवादी (अब्राहमिक) माना जाता है। इसकी मौखिक परम्परा लगभग 4000 साल पुरानी है। इसने सबसे पहले एक अदृश्य , सर्वशक्तिमान ईश्वर (यहोवा) की अवधारणा को प्रस्तुत किया, जो उस समय के बहुदेववादी सामाज के लिए एक क्रांतिकारी विचार था।

इस धर्म का सबसे पवित्र ग्रन्थ तोराह (Torah) है, जो ईश्वर द्वारा मूसा (मोशे) को दी गई शिक्षाओं का संग्रह है। इसे लगभग 1200  ईसा पूर्व का माना जाता है और यही यहूदी विधि इनका इतिहास तथा नैतिकता का आधार है। तोराह के अलावा तल्मूड और मिद्रैश जैसे ग्रंथ भी यहूदी जीवन पद्धति को निर्देशित करते हैं।

(A) यहूदी धर्म की विशेषताएँ

दुनिया का सबसे पुराना धर्म

“यहूदी” दुनिया का सबसे पुराना धर्म (एकेश्वरवादी) होने के साथ साथ इसमें कई विशेषताएँ भी हैं –

  1. यहूदी धर्म की सबसे बड़ी विशेषता है, इसका ‘चुने हुए लोगों ‘ और ‘वाचा’ (Covenant) का सिद्धांत है – यह विश्वास है कि ईश्वर ने अब्राहम और इस्राएल के साथ एक विशेष अनुबंध किया है। इस धर्म में सब्बाथ (साप्ताहिक विश्राम दिवस), काश्रुत (कोषेर भोजन नियम) और योम किप्पुर (प्राश्चित दिवस) जैसे रीती-रिवाज अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  2. तिक्कुन ओलाम (विश्व सुधार सिधांत) – यहूदी धर्म सिखाता है कि मनुष्य का कर्तव्य इस दुनिया को बेहतर बनाना है, न कि सिर्फ मोक्ष की चिंता करना। यही कारण है कि यहूदियों ने सामाजिक न्याय, चिकित्सा, विज्ञान और मानवाधिकारों में अग्रणी योगदान किया है।
  3. मसीहा की प्रतीक्षा – यहूदी अब भी एक मानवीय मसीहा की प्रतीक्षा करते हैं (जो ईश्वर पुत्र नहीं), जो इस्राएल को फिर से स्थापित करेगा और पूरी दुनिया में शांति लायेगा।
  4. ब्रिटानिका (Encyclopedia Britannica) के अनुसार यहूदी धर्म 4000 साल पुरानी मौखिक परम्परा जितना प्राचीन धर्म है। यहूदी धर्म के कुछ लिखित अंश सहस्त्राब्दी ईसा पूर्व के मध्य के हो सकते हैं।
  5.  विश्व धर्म डेटाबेस (World Religion Database) के अनुसार यहूदी धर्म को मनाने वालों की कुल आबादी 1.58 करोड़ (15.8 मिलियन) है, जो विश्व की आबादी का मात्र 0.2% है। यहूदी आबादी का 85% से अधिक हिस्सा सिर्फ 2 देशों में रहता है – इजराइल (इसमें 45%) और अमेरिका (इसमें 40%)| बाकि 15% आबादी विश्व के अन्य देशों में निवास करती है।

(B) यहूदी धर्म के कुछ प्रसिद्ध कथन

यहूदी किसी भी कार्य को पूरी जिम्मेदारी के साथ निभाते हैं जो इन पंक्तियों में झलकता है – 

“तुम्हें काम पूरा करना अनिवार्य नहीं है, लेकिन तुम उससे मुक्त भी नहीं हो।”
अर्थ
– यह कथन व्यक्ति को यह सिखाता है कि दुनिया को सुधारने का काम (Tikkun Olam) इतना बड़ा है कि उसे कोई अकेला पूरा नहीं कर सकता, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह अपना प्रयास करना बंद कर दे।

“बुद्धिमान कौन? वह जो हर मनुष्य से सीखता है… बलवान कौन? वह जो अपनी वासनाओं पर विजय पाता है… धनी कौन? वह जो अपने भाग्य से संतुष्ट है… सम्मानित कौन? वह जो दूसरों का सम्मान करता है।”
अर्थ
– बेन जोमा (Ben Zoma) का यह कथन समाज की भौतिक परिभाषाओं को आंतरिक गुणों से बदल देता है। यह बताता है कि सच्ची बुद्धि, शक्ति, धन और सम्मान बाहरी चीज़ों में नहीं, बल्कि हमारे दृष्टिकोण और कर्मों में है।

“यदि मैं अपने लिए नहीं, तो मेरे लिए कौन है? और यदि मैं केवल अपने लिए हूँ, तो मैं क्या हूँ? और यदि अब नहीं, तो कब?”
अर्थ – यह हिल्लेल (Hillel) का प्रसिद्ध कथन है। यह व्यक्ति को आत्म-जिम्मेदारी, दूसरों के प्रति कर्तव्य और कार्य के लिए सही समय (अभी) का महत्व सिखाता है।

अंत में मैं ये कहूँगा कि अगर यहूदियों का सम्पूर्ण जीवन काल देखा जाये तो इन्होंने बहुत पीड़ा सही है। इन पर देव हत्या का आरोप लगा, एक्ट निंदा और ब्लैक डेथ का आरोप लगाया गया था। हिटलर द्वारा द्वितीय विश्वयुद्ध के समय यहूदियों को मरने के लिए “अंतिम समाधान” नमक ऑपरेशन 3 चरणों में चलाया गया जिसमें 60 लाख यहूदियों को “Zyklon B” नामक ज़हरीली गैसों से भरे गैस चैम्बर में मार दिया गया।

5. क्या पारसी धर्म दुनिया का सबसे पुराना धर्म है?

पारसी धर्म 3500 वर्ष पुराना धर्म है। इसकी उत्पति प्राचीन फ़ारस (आधुनिक ईरान) से हुई थी। यह एक एकेश्वरवादी धर्म है। इनके प्रमुख देवता अहुर मज़्दा (Ahura Mazda) है और प्रमुख ग्रंथ “जेंद अवेस्ता” है। कुछ विद्वानों का मानना है कि इनके भजन ऋग्वेद से भी पुराने है। ये लगभग 1200 – 1500 ईसा पूर्व (हिंदू धर्म के समकालीन) के हैं।

(A) पारसी धर्म की विशेषताएँ

पारसी धर्म की विशेषताएँ इस प्रकार है –

  1. द्वैतवाद (अच्छाई और बुराई का संघर्ष) – पारसी धर्म की सबसे अनोखी विशेषता है इसका “द्वैतवाद दर्शन” | संसार में 2 शक्तियाँ सदैव संघर्ष करती है – (a) स्पेन्ता मैन्यु (Spenta Mainyu) – पवित्र/अच्छी आत्मा (सत्य, प्रकाश, जीवन).
    (b) अन्ग्रा मैन्यु (Angra Mainyu) – विनाशकारी/बुरी आत्मा (झूठ, अंधकार, मृत्यु)
    मनुष्य को इन दोनों में से किसी एक का चुनाव करना होता है। यह स्वतंत्र इच्छा पे ज़ोर देता है।
  2. तीन स्तम्भ – a) हुमत (Humata) – अच्छे विचार
                        b) हुख्त (Hukhta) – अच्छे शब्द 
                        c) ह्वर्श्त (Hvarshta) – अच्छे कर्म
    यह त्रिसूत्री  सिधांत ज़रथुस्त्र की शिक्षाओं का मूल है और आध्यात्मिक व नैतिक जीवन की आधारशिला है।
  3. फरोहर – हर मनुष्य की एक फरोहर होती है। यह उसकी आत्मा का ही रूप है, जो जन्म से पहले और मृत्यु के बाद भी अस्तित्व में रहती है यह व्यक्ति की रक्षा और मार्गदर्शन दोनों करती है। पारसियों का प्रसिद्ध चिन्ह (एक पंखों वाला देवदूत) भी फरोहर का ही प्रतीक है।
  4. पारसी धर्म में पृथ्वी, अग्नि और जल को पवित्र माना जाता है, इसलिए मृत शरीर को जलाना और दफ़नाना निषिद्ध है। ये मृत शरीर को “मूक टावर” (Tower Of Silence)  पर रखा जाता है, जहाँ गिद्ध और अन्य पक्षी उसे खा लेते हैं। इस विधि को “आकाशीय अंत्येष्टि” भी कहते हैं। यह पर्यावरण अनुकूल और धार्मिक आज्ञाओं के अनुरूप मानी जाती है।
  5. पारसी धर्म में अंतिम न्याय की अवधारणा है। मृत्यु के बाद आत्मा को “चिनवतपुल (Chinvat Bridge)” “निर्णय का पुल” पार करना होता है। अच्छे कर्म करने वालों के लिए यह पुल चौड़ा और सुगम होता है। बुरे कर्म करने वालों के लिए यह तलवार की धार की तरह संकरा होता है, और वे नर्क में गिर जाते हैं। अंततः अच्छाई की जीत होगी और पूरी सृष्टि का पुनरुत्थान होकर एक आदर्श संसार बनेगा।
  6. विश्व धर्म डेटाबेस (World Religion Database) के अनुसार पारसी धर्म की आबादी 1.2 से 1.5 लाख के बीच में हैं। इसके सबसे अधिक अनुयायी भारत और ईरान में रहते हैं।

(B) पारसी धर्म के कुछ प्रसिद्ध कथन

पारसी समुदाय का योगदान हर क्षेत्र में रहा है। भारत में इनका योगदान शिक्षा, उद्योग, सेना और कला के क्षेत्र में रहा है। टाटा समूह के संस्थापक जमशेदजी टाटा और रतन टाटा का योगदान उद्योग जगत में अग्रणी है तो साथ ही डॉक्टर होमी भाभा जो भारतीय परमाणु कार्यक्रम के जनक भी रहे हैं।

रतन टाटा ने कहा था कि “अगर आप तेज़ चलना चाहते हैं, तो अकेले चलें। लेकिन अगर आप दूर तक चलना चाहते हैं, तो साथ चलें।” 
“एक दिन आपको एहसास होगा कि भौतिक चीज़ों का कोई मतलब नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण है आपके प्रियजनों की भलाई।”

“अपने दूसरों के साथ व्यवहार में दया, सहानुभूति और करुणा की शक्ति को कभी कम मत आंकिए।” 

“…अच्छे विचारों, अच्छे शब्दों और अच्छे कर्मों को अपनाना, और बुरे विचारों, बुरे शब्दों और बुरे कर्मों को अस्वीकार करना।”   

6. क्या इस्लाम दुनिया के सबसे पुराने धर्मों में शामिल है?

इस्लाम धर्म की शुरुआत कुछ विद्वानों और इतिहासकार के अनुसार  7 वीं शताब्दी इस्वी (लगभग 610 ई.) में अरब के मक्का शहर से हुई थी, जब पैगम्बर मुहम्मद को ईश्वर (अल्लाह) की वाणी प्राप्त होने लगी। दिलचस्प बात है कि कई मुसलमान मनाते हैं कि इस्लाम सबसे पुराना धर्म है क्यूंकि इनके अनुसार इस्लाम की शुरुआत पैगम्बर मुहम्मद से नहीं, बल्कि पहले इन्सान, पैगम्बर आदम से हुई थी। इस दृष्टिकोण से पैगम्बर मुहम्मद को अंतिम दूत (Messenger) के रूप में देखा जाता है। जिन्होंने उसी मूल इस्लामिक सन्देश (एक ईश्वर के प्रति समर्पण) को पुनर्जीवित और पूर्ण किया, जो आदम, नूह (Noah), इब्राहिम (Abraham), मूसा (moses) और ईसा (Jesus) जैसे पिछले सभी पैगम्बरों ने सिखाया था।

पैगम्बर ( जिन्हें मोहम्मद भी लिखा जाता है। ) का जन्म 570 ईस्वी में सऊदी अरब के मक्का शहर में हुआ था। मुसलमानों का मानना है कि वे ईश्वर द्वारा  इंसानों तक अपना सन्देश पहुँचाने के लिए भेजे गए आखिरी पैगम्बर थे।

इस्लामी ग्रंथों और परम्पराओं के अनुसार , 610 ईस्वी में जब मुहम्मद एक गुफा में ध्यान कर रहे थे तब जिब्राइल नामक एक फ़रिश्ते ने उससे मुलाकात की और उन्हें अल्ल्लाह के शब्द दोहराने का आदेश दिया। मुसलमानों का मानना है कि मुहम्मद को अपनी बाकी जिन्दगी के दौरान अल्लाह से सन्देश मिलते रहे।

622 ईस्वी में मुहम्मद अपने समर्थकों के साथ मक्का से मदीना गए, जो आज के सऊदी अरब का एक शहर है। इस यात्रा को ‘हिजरा’ के नाम से जाना जाता है, और इसकी शुरुआत से ही इस्लामिक कैलेंडर की शुरुआत हुई।

मदीना में, मुहम्मद को अपने शहर के आँगन में पहली मस्जिद बनाने का श्रेय दिया जाता है। आज भी मस्जिदें उसी सिधांत का पालन करती है जो उन्होंने वहाँ स्थापित किये थे। उदाहरण के लिए मुसलमानों की प्रार्थना अक्सर मस्जिद की बड़ी खुली जगह या बाहरी आँगन में की जाती है।

(A) मुहम्मद के मृत्यु के बाद का इस्लाम धर्म

मुहम्मद के मृत्यु के बाद इस्लाम धर्म में पंथ उभरे – शिया और सुन्नी

दुनिया भर में मुसलमानों में सुन्नी मुसलमानों की संख्या 90% है। वे मानते हैं कि पहले चार खलीफा ही मुहम्मद के असली उत्तराधिकारी थे।

शिया मुसलमानों का मानना है कि केवल खलीफ़ा, अली और उनके वंशज़ ही मुहम्मद के असली उत्तराधिकारी हैं। वे पहले तीन खलीफाओं की वैधता को नहीं मानते। आज ईरान, इराक, पाकिस्तान और भारत में  शिया मुसलमानों की अच्छी खासी आबादी है।

Encyclopedia Of Islam के अनुसार, दुनिया भर में लगभग 1.9 अरब से 2.02 अरब लोग इस्लाम को मानते हैं। इन मानने वालों को मुसलमान कहा जाता है और वे मस्जिदों में इबादत करते हैं।

(B) इस्लाम धर्म की विशेषताएँ

दुनिया का सबसे पुराना धर्म

इस्लाम धर्म की विशेषताएँ इस प्रकार है –

  1. तीन अब्राहमिक धर्मों ( यहूदी और ईसाई धर्म के साथ ) में से एक इस्लाम भी एकेश्वरवादी धर्म है जिसमें एक ईश्वर की पूजा की जाती है, जिसे मानने वाले ‘अल्लाह’ कहते हैं | इस्लाम शब्द का अर्थ – ” ईश्वर के प्रति समर्पण या खुद को सौपं देना “ ठीक वैसे ही जैसे इसके अनुयायी अल्लाह की इच्छा के प्रति खुद को समर्पित करते हैं
  2. आज यह धर्म दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाला प्रमुख धर्म है मध्य पूर्व और उत्तरी अमेरिका में बड़े पैमाने पर माने जाने वाले इस धर्म के अनुयायी दक्षिण – पूर्व एशिया में भी बड़ी संख्या में है असल में, इंडोनेशिया में इस्लाम धर्म को मानने वालों की संख्या सबसे ज्यादा है
  3. इस्लाम बताता है कि अल्लाह का सन्देश फ़रिश्ते जेब्रील के ज़रिये पैगम्बर मुहम्मद तक पहुँचाया गया था
  4. अनुयायी प्रार्थना और क़ुरान का पाठ करके अल्लाह की इबादत करते हैं उनका मानना है कि फ़ैसले का एक दिन आएगा और मौत के बाद भी जीवन होगा
  5. क़ुरान में 114 अध्याय है जिन्हें ‘सूरह’ कहा जाता है
  6. मुसलमान अपने धर्म के 5 बुनियादी स्तंभों का पालन करते हैं जो उनके विश्वास के लिए जरुरी है इनमें शामिल है – 
    (a) शहादा – ईश्वर में अपनी आस्था और मुहम्मद में विश्वास ज़ाहिर करना
    (b) सलात – दिन में 5 बार नमाज़ पढ़ना ( सुबह, दोपहर, दोपहर बाद, सूर्यास्त और शाम के समय )
    (c) ज़कात – ज़रुरतमंदों को दान करना
    (d) सौम – रमजान के दौरान रोज़ा रखना
    (e) हज़ – अगर कोई व्यक्ति सक्षम हो तो जीवन में कम से कम एक बार मक्का की तीर्थ यात्रा करनी है

(C) इस्लाम धर्म के कुछ प्रसिद्ध कथन

“तो आप अपना मुँह एकाग्र होकर इस धर्म (इस्लाम) की ओर करें। यह अल्लाह की वह फितरत (प्रकृति) है, जिस पर उसने मनुष्यों को पैदा किया है। अल्लाह की बनाई हुई संरचना में कोई परिवर्तन नहीं। यही सीधा धर्म है, लेकिन अधिकांश लोग जानते नहीं।”
अर्थ –
यह उद्धरण इस्लामी दृष्टिकोण को स्पष्ट करता है—इस्लाम कोई नई शिक्षा नहीं लाया, बल्कि मानव की मूल प्रकृति (एकेश्वरवाद) की पुनःस्थापना करता है, जो आदम (अलैहिस्सलाम) से आरंभ हुई

“इस्लामी मान्यताओं के अनुसार, ईश्वर ने अपने पैगंबरों के माध्यम से अलग-अलग सत्य नहीं भेजे, बल्कि एक ही मूल सत्य (ईश्वर की एकता) की विभिन्न अभिव्यक्तियाँ भेजीं।” 
अर्थ – विद्वानों के अनुसार, इस्लाम स्वयं को “आदिम धर्म” (Primordial Religion) के रूप में देखता है—वह सत्य जो आदम से आरंभ हुआ और सभी पैगंबरों ने उसी की शिक्षा दी

7. अन्य प्राचीन धर्म (बौद्ध, जैन और शिंटो )

(A) बौद्ध धर्म (Buddhism) - क्या ये दुनिया का सबसे पुराना धर्म है?

बौद्ध धर्म की शुरुआत – इसकी स्थापना छठी शताब्दी ईसा पूर्व में भारत में सिद्धार्थ गौतम (बुद्ध) ने की थी

मान्यताएँयह एक अनीश्वरवादी (nontheistic) परंपरा है, जो चार आर्य सत्य (Four Noble Truths) और आष्टांगिक मार्ग (Eightfold Path) पर केंद्रित है इसका लक्ष्य निर्वाण (दुखों से मुक्ति) प्राप्त करना है

प्रमुख अवधारणाकर्म और पुनर्जन्म (संसार) के चक्र में विश्वास करती है

शाखाएँ –  इसकी दो प्रमुख शाखाएँ हैं—थेरवाद और महायान।

(B) क्या जैन धर्म (Jainism) दुनिया का सबसे पुराना धर्म है?

जैन धर्म की शुरुआतयह भी भारत से उत्पन्न एक अत्यंत प्राचीन धर्म है, जो बौद्ध धर्म के आसपास ही विकसित हुआ

मान्यताएँइसका सबसे बड़ा सिद्धांत अहिंसा (ahimsa) है—किसी भी जीव को हानि न पहुँचाना। इसके अलावा, तीन रत्न (सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, सम्यक चारित्र) पर बल देता है

प्रमुख अवधारणा –  कर्म को एक भौतिक पदार्थ मानता है जो आत्मा से चिपक जाता है और पुनर्जन्म का कारण बनता है। मोक्ष (कर्मों से मुक्ति) ही परम लक्ष्य है

विशेषता – अत्यधिक संयम और तपस्या पर जोर देता है

(C) क्या शिंटो धर्म (Shinto) दुनिया का सबसे पुराना धर्म में शामिल है?

शिंटो धर्म की शुरुआतयह जापान का मूल आध्यात्मिक धर्म है

मान्यताएँयह प्रकृति-पूजा (animism) पर आधारित है, जिसमें प्रकृति, वस्तुओं और पूर्वजों में निवास करने वाली असंख्य देव आत्माओं (कामी – Kami) को पूजा जाता है

विशेषता – एक रोचक तथ्य यह है कि जापान में बौद्ध धर्म के साथ शिंटो धर्म का सह-अस्तित्व रहा है। माना जाता है कि “शिंटो धर्म जन्म और विवाह की देखरेख करता है, जबकि बौद्ध धर्म मृत्यु की”

ग्रंथ – इसके पवित्र ग्रंथों में कोजिकी और निहोन शोकी शामिल हैं

8. निष्कर्ष

अब मैं अपने आर्टिकल “दुनिया का सबसे पुराना धर्म कौन सा है?” को समेटते हुए निष्कर्ष में यही कहूँगा कि धर्म चाहे कोई भी हो, उसका उद्देश्य हमेशा मानव चेतना को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाना रहा है “दुनिया का सबसे पुराना धर्म” होने का गौरव शायद उस धर्म को मिलता है जिसने सबसे लम्बी यात्रा की हो, लेकिन ब्रिटानिका (Encyclopedia Britannica) के अनुसार किसी एक धर्म को अच्छा कहना सही नहीं है क्यूँकि चाहे हिंदू धर्म हो, पारसी धर्म हो, यहूदी धर्म हो या इस्लाम धर्म, इन सभी की सबसे बड़ी देन यह है कि इन्होंने मानवता को यह सिखाया कि आत्मा, नैतिकता और परमात्मा के बीच का रिश्ता अटूट है

मैं मानता हूँ कि ये धर्म केवल पुराने नहीं हैं बल्कि ‘जीवित विरासत’ हैं जो आज भी हमें जीवन का सही मार्ग दिखाने का प्रयास कर रहे हैं

अंत में मैं एक बात और कहना चाहूँगा कि मैंने इस आर्टिकल “दुनिया का सबसे पुराना धर्म” में केवल उन्हीं धर्मों को शामिल किया है जिनकी उत्पत्ति ईसा पूर्व (BCE) में हुई है या जिनका मूल संदेश इस्लाम और यहूदी धर्म जैसी आदिम परंपराओं से जुड़ा है। ईसाई धर्म, हालांकि विश्व का सबसे बड़ा धर्म है, फिर भी ऐतिहासिक दृष्टि से यह पहली शताब्दी ईस्वी का है। चूंकि मेरा विषय ‘प्राचीनता’ पर केंद्रित है, इसलिए 2,000 साल से कम पुराने धर्मों (जैसे- ईसाई धर्म, सिख धर्म, आदि) को इस सूची में शामिल नहीं किया गया है। मेरा उद्देश्य किसी धर्म की तुलना या आलोचना नहीं, बल्कि मानव सभ्यता की प्राचीन आध्यात्मिक यात्रा को रेखांकित करना है।

Frequently Asked Questions

दुनिया का सबसे पुराना धर्म

प्रश्न 1: क्या हिंदू धर्म दुनिया का सबसे पुराना धर्म है?
उत्तर : 
हाँ, हिंदू धर्म दुनिया का सबसे पुराना धर्म है क्यूँकि इसके लिखित, मौखिक और जीवित प्रमाण मिल चुकें हैं तथा आज भी हिंदू धर्म अपने मूल स्वरूप का 90% वैसा ही है जैसा पहले था लेकिन इसके साथ के कुछ धर्म पुराने होने का दावा करते हैं किन्तु उनके कोई जीवित साक्ष्य प्राप्त नहीं हुए जो दावे को सही साबित कर सकें

प्रश्न 2: क्या इस्लाम से पहले कोई धर्म नहीं था?
उत्तर
: नहीं, इस्लाम से पहले हजारों साल पुराने धर्म मौजूद थे सनातन धर्म (दुनिया का सबसे पुराना धर्म), पारसी धर्म और यहूदी धर्म सालों पुराने धर्म हैं और इनके जीवित प्रमाण भी मिल चुकें हैं

प्रश्न 3: क्या इस लेख “दुनिया का सबसे पुराना धर्म कौन सा है?” में किसी धर्म की तुलना या आलोचना की गई है?
उत्तर : 
नहीं, इस आर्टिकल में किसी भी धर्म की आलोचना या तुलना नहीं की गयी है सभी धर्मों की भावना को सम्मान के साथ इस आर्टिकल में प्रस्तुत किया गया है इस आर्टिकल “दुनिया का सबसे पुराना धर्म कौन सा है?” में हम ये जानने का प्रयास कर रहे हैं कि हमारा धर्म कितना पुराना है और उसकी मूल भावना क्या है जिससे हम अपनी जड़ो को समझ सकें

प्रश्न 4: क्या सनातन धर्म और हिंदू धर्म एक ही हैं?
उत्तर : आम बोलचाल में दोनों को एक ही मान लिया जाता है, लेकिन उनके अर्थों में सूक्ष्म अंतर है। ‘सनातन धर्म’ (जिसका अर्थ है ‘शाश्वत कर्तव्य’ या ‘शाश्वत व्यवस्था’) एक प्राचीन दार्शनिक अवधारणा है, जबकि ‘हिंदू धर्म’ एक अधिक आधुनिक, भौगोलिक पहचान (सिंधु नदी के पार के लोग) से जुड़ा शब्द है। कुछ विद्वान ‘सनातन धर्म’ को ‘हिंदू धर्म’ से व्यापक मानते हैं, तो कुछ इसे इसका एक हिस्सा मानते हैं।

प्रश्न 5: दुनिया का सबसे पुराना धर्मग्रंथ कौन सा है?
उत्तर
: इस सवाल का जवाब देते समय मुझे दो नाम याद आ रहें हैं । सबसे पहला है प्राचीन मिस्र का ‘पिरामिड टेक्स्ट’, जिसे अब तक खोजा गया सबसे प्राचीन धार्मिक साहित्य माना जाता है, जो 3000 ईसा पूर्व से भी पहले का है। दूसरा है हिंदू धर्म का ‘ऋग्वेद’, जो न सिर्फ अत्यंत प्राचीन (लगभग 1500-1000 ईसा पूर्व) है, बल्कि आज भी दुनिया का सबसे पुराना धर्मग्रंथ है जिसका उपयोग लगातार पूजा-पाठ में किया जाता रहा है।

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