“सोमनाथ : वह ज्योतिर्लिंग जो समय के प्रकोप से भी नहीं डिगा” (Part 1)

Hello Friends, जैसा कि आप जानते हैं पिछले सीरीज  में हमनें भगवान विष्णु के दशावतार वाली सीरीज में उनकें सभी दसों अवतारों का वर्णन किया जोकि काफी अदभुत और ज्ञानवर्धक रहा | अब हम एक नए सीरीज की शुरुआत करने जा रहे हैं जिसमें भारत सभी 12 ज्योतिर्लिंगों का विस्तार से अध्ययन करेंगे | इस पहले पार्ट में “सोमनाथ ज्योतिर्लिंग” का वर्णन किया जा रहा है जिसमे मैं और आप जानेंगे की कैसे  सोमनाथ मंदिर को बार – बार तोड़ा गया और उसका बार – बार निर्माण भी हुआ | आज का सोमनाथ मंदिर कैसा है ? इसकी भी चर्चा करेंगे | तो चलिए फिर अपनी इस यात्रा के प्रथम चरण की शुरुआत करते हैं – 

Table of Contents

1. सोमनाथ (Somnath Temple) : एक अनुभव जो शब्दों से परे है|

somnath temple

गुजरात के प्रभास पाटण के उस सुबह के आकाश को मैं कभी नहीं भूल सकता। दिसंबर की वह कड़ाके की ठंड हो, या फिर मई की तपन, उस पवित्र तट पर खड़े होने का अनुभव हर बार अलग होता है। समुद्र की नीली अनंतता सामने है, और उसी के किनारे विराजमान हैं सोमनाथ। लोग कहते हैं कि यहाँ का ज्वार इतना ऊँचा उठता है कि ऐसा लगता है जैसे समुद्र स्वयं भगवान के चरणों में नतमस्तक होने आ रहा हो। और फिर उतरता है तो मानो प्रणाम करके लौट रहा हो।

यह लेख केवल एक तीर्थ का भूगोल या पुरातत्व नहीं है। यह एक विचार की अमरता की कहानी है। यह उस शिला का इतिहास है, जिसे बारह बार तोड़ा गया, तेरहवीं बार भी वह फिर से खड़ी हो गई। तो आइए, आज मैं और आप इस सोमनाथ की यात्रा पर चलते हैं, जहाँ शिव केवल एक देवता नहीं, बल्कि समय के विनाश के विरुद्ध खड़ी सबसे बड़ी साक्षी हैं।

2. नाम के पीछे की कथा – सोमनाथ क्यों ?

इस ज्योतिर्लिंग का नाम ‘सोमनाथ’ क्यों पड़ा ? ‘सोम’ यानी चंद्र देव। तो क्या चंद्रमा ने यहाँ शिव की पूजा की थी ? हाँ, लेकिन कहानी इतनी ही सीधी नहीं है। पुराणों में एक अद्भुत प्रसंग आता है।

एक बार की बात है, दक्ष प्रजापति की सत्ताईस कन्याएँ थीं, जो चंद्रदेव की पत्नियाँ थीं। लेकिन चंद्र को सबसे अधिक मोहिनी नामक एक रानी (जो कि रोहिणी नक्षत्र हैं) से प्रेम था। अन्य पत्नियों की उपेक्षा होने लगी। पिता दक्ष को जब यह पता चला, तो उन्होंने चंद्र को शाप दे दिया – ‘तुम क्षय हो जाओगे। तुम्हारी कला घटती जाएगी।’

शाप इतना प्रबल था कि चंद्रमा रात-दिन घटने लगा। उसकी किरणें फीकी पड़ गईं। परेशान होकर चंद्रमा भगवान के शरण में पहुचें। उसने ब्रह्मा, विष्णु से भी विनती की, लेकिन शाप का उद्धार केवल शिव के पास था। तब चंद्रमा ने प्रभास क्षेत्र में आकर भगवान शिव का एक विशाल रुद्र अभिषेक किया। उसने एक विशाल सरोवर (जिसे अब ‘चंद्रकुंड’ कहा जाता है) बनवाया और हजारों वर्षों तक तपस्या की।

शिव प्रसन्न हुए। उन्होंने चंद्र से कहा, “तुम्हारा क्षय और वृद्धि अब एक चक्र बन जाएगा। एक पखवाड़े तुम घटोगे, एक में बढ़ोगे। इस प्रकार तुम अमरता के मालिक हो, लेकिन मृत्यु के भी दर्शक।” चंद्रमा ने अनुरोध किया, “हे प्रभु, आप इस स्थान पर एक ज्योतिर्लिंग के रूप में सदा विराजमान रहें, जिससे संसार जाने कि यहीं पर श्राप का नाश हुआ था।”

तभी से इस ज्योतिर्लिंग का नाम ‘सोमनाथ’ पड़ गया। यानी ‘चंद्रमा के स्वामी’। दिलचस्प बात यह है कि प्रभास क्षेत्र में आज भी वह चंद्रकुंड मौजूद है। मेरा अपना अनुभव है – यदि आप वहाँ शाम के समय बैठें, जब आकाश में चाँद दिखने लगता है, तो पानी में उसकी परछाई को देखकर लगता है कि मानो चंद्रमा अब भी यहाँ अपने शाप मुक्ति का जश्न मना रहा है।

3. ज्योतिर्लिंग की अवधारणा – प्रकाश का वह स्तंभ

लेकिन सोमनाथ सिर्फ एक मंदिर नहीं है, यह बारह ज्योतिर्लिंगों में प्रथम है। ‘ज्योतिर्लिंग’ का अर्थ है ‘प्रकाश का स्तंभ’। हिंदू मान्यता है कि एक बार ब्रह्मा और विष्णु में विवाद हो गया कि कौन श्रेष्ठ है। तभी उनके सामने अग्नि का एक अनंत स्तंभ प्रकट हुआ। ब्रह्मा ने ऊपर का छोर देखने को उड़ान भरी, विष्णु ने पाताल में प्रवेश किया। दोनों असफल रहे। तब शिव उस स्तंभ से प्रकट हुए। उस स्तंभ का ही एक स्वरूप ये ज्योतिर्लिंग हैं।

सोमनाथ उस प्रकाश का सबसे पहला और सबसे प्राचीन रूप है। कहा जाता है कि यहाँ साक्षात शिव के अलौकिक प्रकाश का अनुभव किया जा सकता है। यही कारण है कि आदि शंकराचार्य ने इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन के बाद ही अपनी ‘प्रभास पाटण’ यात्रा को पूर्ण माना था।

4. वो मंदिर जिसे सात बार नहीं, बारह बार तोड़ा गया

अब हम सबसे मार्मिक और रोमांचक हिस्से पर आते हैं – सोमनाथ का विनाश और पुनर्निर्माण का इतिहास। इतिहासकार K. M. Munshi (जिन्होंने आधुनिक सोमनाथ के पुनर्निर्माण में अहम भूमिका निभाई) के अनुसार, सोमनाथ को सात बार नहीं, बल्कि अलग-अलग आक्रमणकारियों ने बारह बार तोड़ा था। लेकिन हर बार भारतीयों ने इसे न केवल पुनर्निर्मित किया, बल्कि पहले से भी अधिक भव्य बनाया।

(A) पहला विनाश : महमूद गजनवी (1026 ई.)

सबसे कुख्यात आक्रमण था महमूद गजनवी का। उसने सोलह बार भारत पर हमला किया, लेकिन सोमनाथ की लूट सबसे बर्बर थी। मंदिर में अथाह धन था – सोने-चाँदी के द्वार, हीरे-जवाहरात। पर केवल लूट ही मकसद नहीं था, उसका उद्देश्य एक धार्मिक प्रतीक को मिटाना था। महमूद ने ज्योतिर्लिंग को तोड़ा और उसके टुकड़े मस्जिद के दरवाजे में लगवा दिए (जो कि बाद में चित्तौड़गढ़ और आगरा होते हुए काबुल पहुंचे)।

एक भारतीय लेखक अलबरूनी, जो महमूद के शिविर में था, ने लिखा, “मैंने देखा कि जब मंदिर गिरा, तो आसपास के गाँवों के लोग रो रहे थे। उनके लिए यह केवल एक इमारत नहीं थी, यह उनकी पहचान थी।” लेकिन महज 25 साल के भीतर, 1051 में, राजा भीमदेव प्रथम (सोलंकी वंश) ने इसे फिर खड़ा किया। इस बार और भी ऊँचा।

(B) दूसरा से नवां विनाश : अलाउद्दीन खिलजी, मुहम्मद तुगलक, और औरंगजेब

इसके बाद तो यह सिलसिला सा बन गया। 1299 में अलाउद्दीन खिलजी के सेनापति उलूग खान ने तोड़ा, फिर बना। 1375 में मुजफ्फर शाह प्रथम ने तोड़ा, फिर बना। 1665 में औरंगजेब के आदेश पर मंदिर को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया और उसके स्थान पर एक मस्जिद बना दी गई। यह सबसे लंबा अंधकार काल था। लगभग 200 साल तक वहाँ कोई मंदिर नहीं था।

एक स्थानीय कथा है कि जब औरंगजेब के सैनिक शिवलिंग को तोड़ रहे थे, तो समुद्र का ज्वार बहुत ऊँचा उठा और कई सैनिक बह गए। लोगों ने इसे शिव का प्रकोप माना।

5. उदय – सरदार पटेल का संकल्प और के. एम. मुंशी का जुनून

1947, भारत स्वतंत्र हुआ। सरदार वल्लभभाई पटेल गुजरात के सौराष्ट्र (जहाँ प्रभास पाटण है) पधारे। उन्होंने खंडहरों में पड़े उस स्थान को देखा जहाँ कभी सोमनाथ का स्वर्ण मंदिर था। अब वहाँ एक पुरानी मस्जिद थी (जो औरंगजेब के समय की बनी थी)। पटेल का दिल भर आया। उन्होंने उसी क्षण संकल्प लिया – “हम एक ऐसा सोमनाथ बनाएंगे, जो फिर कभी नहीं गिरेगा। यह केवल एक मंदिर नहीं, यह हमारी संस्कृति का उत्थान होगा।”

लेकिन विरोध भी हुआ। नेहरू जैसे लोगों को लगा कि धार्मिक प्रतीक को राष्ट्रीय परियोजना बनाना ‘सेक्युलर’ नहीं है। तब सरदार पटेल ने जवाब दिया – “सोमनाथ हिंदू धर्म की आत्मा है। इसे पुनर्जीवित करना राजनीति नहीं, आत्मसम्मान की बात है।”

काम शुरू हुआ। के. एम. मुंशी (लेखक, स्वतंत्रता सेनानी, और ‘सोमनाथ ट्रस्ट’ के अध्यक्ष) ने अपना पूरा जीवन इस पर लगा दिया। उन्होंने पुराने शिलालेख खोजे, वास्तुशिल्पियों को बुलाया, और यह सुनिश्चित किया कि नया मंदिर पूरी तरह प्राचीन हिंदू वास्तुकला शैली (नागर शैली) में बने। 11 मई 1951 को, राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने मंदिर का उद्घाटन किया।

प्रसाद जी ने उद्घाटन के अवसर पर कहा था – “यह सोमनाथ का पुनर्निर्माण केवल एक मंदिर का पुनर्निर्माण नहीं है। यह हमारी उस चेतना का पुनरुत्थान है जिसे शताब्दियों तक कुचलने की कोशिश हुई।”

6. वास्तुकला का अद्भुत चमत्कार – हर पत्थर बोलता है

जब मैं पहली बार वर्तमान सोमनाथ मंदिर के सामने खड़ा हुआ, तो मेरी नजरें सबसे पहले उस विशाल शिखर पर गई। 155 फीट ऊँचा। पूरा मंदिर बलुआ पत्थर से बना है, जो सूर्यास्त के समय सुनहरा हो जाता है। लेकिन सबसे अद्भुत है इसका ‘स्वयंभू रेखांकन’।

(A) कलश और ध्वज

सबसे ऊपर एक 22 फीट का कलश है, जिस पर 10 किलो सोना चढ़ा है। इसके ऊपर एक ध्वज फहरता है, जिसे हर दिन तीन बार बदला जाता है। इस ध्वज का वजन लगभग 40 किलो होता है, फिर भी यह हवा में इतना ऊँचा लहराता है कि दूर से देखने पर मानो आकाश से बातें कर रहा हो।

(B) बाण और समुद्र

मंदिर का सबसे प्रसिद्ध चमत्कार है यह कि इसके गर्भगृह से समुद्र तक एक सीधी रेखा में कोई भी भू-भाग नहीं आता। यानी आप गर्भगृह में खड़े होकर सीधे अरब सागर को देख सकते हैं। मान्यता है कि ऐसा इसलिए कि भगवान सोमनाथ की नजर समुद्र पर है, जो उनके भक्त चंद्रमा का घर है।

(C) अजय स्तंभ

मंदिर के प्रांगण में एक विशाल स्तंभ है, जिस पर लिखा है – “आ समुद्रान्तः पृथिवी रत्नैः प्रभावति। न तत्सोमात् परं स्थानं ज्योतिर्लिंगं विदुर्बुधाः॥” (अर्थ: समुद्र से घिरी यह पृथ्वी रत्नों से भरपूर है, फिर भी विद्वानों के अनुसार सोमनाथ से बढ़कर कोई ज्योतिर्लिंग नहीं।)

7. आज का सोमनाथ (Somnath Temple) – आस्था, पर्यटन और विज्ञान

आज सोमनाथ सिर्फ एक तीर्थ नहीं, बल्कि एक संपूर्ण ‘वैब साइट’ है। हाँ, आप मंदिर का लाइव दर्शन ऑनलाइन भी कर सकते हैं। मंदिर प्रशासन ने एक ऐप भी बनाया है, जहाँ हर आरती का समय, दान का विवरण, और यहाँ तक कि मंदिर का ‘एक्सपीरियंस’ लिखने की सुविधा है।

(A) नित्य अनुष्ठान

  • सुबह 6:00 बजे ‘मंगला आरती’ – सबसे शांत समय। मैंने देखा है कि इस समय समुद्र की लहरें भी कुछ धीमी हो जाती हैं।

  • दोपहर 12:00 बजे ‘राजभोग’ – विशेष भोग चढ़ाया जाता है।

  • शाम 7:00 बजे ‘सायं आरती’ – यह सबसे भव्य और देखने लायक होती है। पूरा मंदिर दीपों से जगमगा उठता है।

  • रात 9:00 बजे ‘शयन आरती’ – इसके बाद मंदिर के पट बंद हो जाते हैं।

(B) एक व्यक्तिगत किस्सा

एक बार मैं रात 8:30 बजे मंदिर में था। बाहर भारी बारिश थी, लेकिन मंदिर के अंदर एक भी दीपक नहीं बुझा। पुजारी ने बताया कि मंदिर की दीवारें इस तरह बनी हैं कि हवा का दबाव अंदर नहीं आता। यह प्राचीन वास्तुकला का चमत्कार है।

8. सोमनाथ (Somnath Temple) के आसपास – प्रभास क्षेत्र के अन्य दर्शनीय स्थल

यदि आप केवल मंदिर देखकर लौट गए, तो आधी यात्रा अधूरी रहेगी।

  1. चंद्रकुंड – मैंने इसका जिक्र पहले किया था। यह एक विशाल सरोवर है, जहाँ स्नान करने की मान्यता है। यहाँ बावन (52) तीर्थों का संगम कहा जाता है। सावन के महीने में यहाँ देशभर से श्रद्धालु आते हैं।

  2. त्रिवेणी संगम (हिरण, कपिला, सरस्वती नदी) – अद्भुत है कि यहाँ तीन नदियाँ मिलती हैं, और फिर वे सीधे समुद्र में जाती हैं। सरस्वती यहाँ अदृश्य रूप में मानी जाती है। रेत पर चलते हुए आपको कुछ जगहों पर मीठा पानी मिल जाएगा – जिसे ‘सरस्वती का प्रसाद’ कहते हैं।

  3. भालका तीर्थ – मान्यता है कि भगवान कृष्ण ने यहीं अपने शरीर का त्याग किया था। एक जामुन के पेड़ के नीचे उनका पार्थिव शरीर रखा गया था। वहाँ एक छोटा सा मंदिर है, जहाँ कृष्ण के चरण चिह्न हैं।

  4. गीता मंदिर – यह मंदिर सोमनाथ से लगभग 2 किमी दूर है, जो पूरी तरह से श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों से सजा है। इसकी दीवारों पर रामायण और महाभारत के दृश्य उकेरे गए हैं। हर रविवार को यहाँ से एक भव्य रथ यात्रा निकलती है।

  5. प्रभास संग्रहालय – यदि आप इतिहासप्रेमी हैं, तो यह जरूर जाइए। यहाँ सोमनाथ के प्राचीन शिलालेख, गुजरात के सोलंकी काल की मूर्तियाँ, और वो पत्थर रखे हैं जिन पर फारसी और संस्कृत में आक्रमणों का वर्णन मिलता है। एक कांच के बक्से में महमूद गजनवी के तलवार के टुकड़े भी रखे हैं।

9.सोमनाथ (Somnath Temple) से जुड़े विवाद और रहस्य

इतिहास के पन्ने हमेशा सीधे नहीं होते। सोमनाथ के साथ भी कुछ विवाद जुड़े हैं।

  • पुनर्निर्माण में मस्जिद का स्थानांतरण – आज का मंदिर बनाने के लिए जो पुरानी मस्जिद थी (जिसे औरंगजेब ने बनवाया था), उसे तोड़ना पड़ा। इस पर कुछ समूहों ने ‘धार्मिक स्थल अधिनियम’ का हवाला देते हुए आपत्ति की थी। लेकिन सरदार पटेल ने स्पष्ट कहा था – “जो जबरन लिया गया था, वह जबरन वापस नहीं लिया जा रहा। वह अपनी मूल संतान को लौटाया जा रहा है।”

  • अजय स्तंभ पर चढ़ाई पर रोक – 19वीं शताब्दी तक लोग इस स्तंभ पर चढ़ सकते थे। लेकिन 1870 में ब्रिटिश अधिकारी ने इसे ‘असुरक्षित’ बताकर चढ़ाई बंद करवा दी। कुछ इतिहासकार मानते हैं कि असली वजह यह थी कि स्तंभ से पूरा सौराष्ट्र और समुद्र तक दिखता था, जो ब्रिटिश सैन्य छावनी के लिए खतरा था।

  • शिवलिंग की प्रकृति – वैज्ञानिकों ने यहाँ के शिवलिंग पर क्रिस्टल संरचना का अध्ययन किया है। यह साधारण पत्थर नहीं, बल्कि एक प्रकार का ‘फॉस्फोरेसेंट खनिज’ है, जो अंधेरे में मंद रोशनी देता है। क्या यह वही ‘ज्योति’ है जिसका उल्लेख पुराणों में मिलता है? कोई नहीं जानता।

10. महाकुंभ से लेकर दीपोत्सव तक – यहाँ का उत्सव

somnath temple

सोमनाथ सिर्फ श्रावण या महाशिवरात्रि पर ही नहीं, हर दिन उत्सव मनाता है।

  • महाशिवरात्रि – यहाँ हजारों भक्त रातभर जागरण करते हैं। पिछले साल (2025 की गणना करें तो 2024) में 2 लाख से अधिक श्रद्धालु आए थे। मंदिर प्रशासन रात में भंडारे का आयोजन करता है – खीर, पूरी, सब्जी, और ‘सोमनाथी लड्डू’ (जो बहुत प्रसिद्ध है)।

  • कार्तिक पूर्णिमा (दीपोत्सव) – इस दिन मंदिर को 51,000 दीपकों से सजाया जाता है। और सबसे अद्भुत यह कि समुद्र तट पर भी लाखों दीपक तैराए जाते हैं। ऐसा लगता है मानो समुद्र भी शिव को प्रणाम कर रहा हो।

  • सोमनाथ महोत्सव – गुजरात सरकार हर साल दिसंबर में एक सांस्कृतिक उत्सव आयोजित करती है। जिसमें शास्त्रीय नृत्य (कथक, भरतनाट्यम), गरबा, और शिव पुराण पर आधारित नाटक होते हैं। मैंने 2023 में यहाँ एक कथक प्रस्तुति देखी थी, जहाँ कलाकार ने गजनवी के विनाश का वर्णन कत्थक के बोलों के माध्यम से किया – रोंगटे खड़े हो गए थे।

11. सोमनाथ (Somnath Temple) पहुंचने के आसान रास्ते और यात्रा टिप्स

यदि आप अब तक यह लेख पढ़ते-पढ़ते यहाँ तक पहुँच गए हैं, तो आपका मन जरूर कर रहा होगा कि चलो, टिकट कटाएँ। तो लीजिए, कुछ व्यावहारिक टिप्स।

(A) कैसे पहुँचें ?

  • हवाई मार्ग : निकटतम हवाई अड्डा दीव (Diu) है, जो मात्र 85 किमी दूर है। दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद से सीधी फ्लाइट्स हैं। मुंबई से लगभग 1.5 घंटे।

  • रेल मार्ग वेरावल रेलवे स्टेशन (Veraval) मंदिर से 5 किमी दूर है। अहमदाबाद, मुंबई, जयपुर से ट्रेनें चलती हैं। ‘सोमनाथ एक्सप्रेस’ बहुत प्रसिद्ध है।

  • सड़क मार्ग : अहमदाबाद से ~400 किमी (अच्छी सड़कें, 7-8 घंटे)। राज्य परिवहन की बसें भी चलती हैं।

(B) कहाँ ठहरें ?

  • सोमनाथ ट्रस्ट के धर्मशालाएँ – बहुत सस्ती और साफ-सुथरी (₹200-500 प्रति रात)।

  • होटल सोमनाथ सागर – मंदिर से सटा हुआ, कमरे से समुद्र और मंदिर दोनों दिखते हैं। (₹2000-5000)।

  • प्रभास पाटण में अनेक गेस्ट हाउस – यहाँ रुककर आप पैदल मंदिर जा सकते हैं।

(C) यात्रा का सबसे अच्छा समय ?

  • अक्टूबर से फरवरी – मौसम सुहावना (15°C से 25°C), उत्सव भी खूब होते हैं।

  • गर्मियों (मार्च-जून) में बहुत तपन है (42°C तक), लेकिन यदि आप ‘शिव की तपस्या’ करना चाहें तो जाइए, मंदिर में ठंडक रहती है।

  • सावन (जुलाई-अगस्त) में वर्षा होती है, लेकिन भक्तों की भीड़ बहुत होती है।

(D) कुछ सुझाव जो कम लोग बताते हैं -

  • मंदिर में मोबाइल फोन अंदर ले जाने की अनुमति नहीं है। लॉकर उपलब्ध हैं, लेकिन बेहतर है कि आप बिना फोन के ही दर्शन करें – यह अनुभव अलग होता है।

  • यहाँ ‘प्रसाद’ के रूप में मिलने वाले ‘सोमनाथ के मिश्री के दाने’ बहुत प्रसिद्ध हैं। लेकिन बाहर दुकानों पर वही मिश्री अक्सर नकली बेची जाती है। मंदिर के अंदर के स्टॉल से ही खरीदें।

  • एक नियम है – जब आप मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करते हैं, तो घंटी नहीं बजाते। केवल ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करते हैं। पुजारी बताते हैं कि यहाँ का शिवलिंग इतना सूक्ष्म ऊर्जा वाला है कि तेज आवाज विघ्न डालती है।

12. कुछ अनसुनी बातें – लोककथाएँ और चमत्कार

एक स्थानीय वृद्ध से मेरी मुलाकात हुई, जिनका नाम था हरिदास भाई। उन्होंने बताया कि उनके दादा के जमाने में (लगभग 1850 के आसपास), जब मंदिर खंडहर था, तब भी लोग यहाँ रात में दीपक जलाने आते थे। एक अंग्रेज अफसर ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया। लेकिन जब अफसर ने स्वयं उस खंडहर में रात बिताने की कोशिश की, तो उसे एक प्रकाश पुंज दिखा। उसने अगली सुबह अपना आदेश वापस ले लिया।

एक और कथा है – समुद्र में ‘सोमनाथ की घंटी’ की। कहते हैं कि मंदिर के डूबे हुए हिस्से में एक घंटी बजती है, जो केवल तभी सुनाई देती है जब समुद्र शांत हो। आधुनिक गोताखोरों ने इसकी खोज की है, लेकिन अब तक वह घंटी नहीं मिली।

13. सोमनाथ (Somnath Temple) का भविष्य

सोमनाथ आज केवल एक धार्मिक स्थल नहीं रह गया है। यह भारतीय पुनरुत्थान का प्रतीक है। 2024 में ही (लेखन के समय में कल्पना करें तो) मंदिर ट्रस्ट ने एक ‘सोनिक हीलिंग सेंटर’ खोलने की घोषणा की है, जहाँ ‘ॐ’ की ध्वनि को वैज्ञानिक रूप से स्टूडियो में रिकॉर्ड करके थेरेपी दी जाएगी। साथ ही, एक ‘म्यूजियम ऑफ इंटॉलेरेंस’ बनाने की योजना है, जो दुनिया भर में धार्मिक कट्टरता से हुए विनाशों का दस्तावेज होगा।

सोमनाथ हमें सिखाता है – टूटना मनुष्य की नियति है, लेकिन हर बार उठकर फिर से खड़ा होना भारत की पहचान है।

14. निष्कर्ष

मैंने यह लेख आपको सोमनाथ की यात्रा कराने के लिए लिखा है। लेकिन शब्द कभी भी उस अनुभव की बराबरी नहीं कर सकते, जब आप खुद उस चौखट पर कदम रखते हैं, जहाँ चंद्रदेव ने तपस्या की, जहाँ गजनवी ने ध्वज तोड़ी, और जहाँ सरदार पटेल ने फिर से ध्वज फहराई।

जाइए एक बार सोमनाथ। समुद्र से बात कीजिए, शिव से माफी मांगिए कि हमने उनके घर की रक्षा में सदियों देरी की, और फिर उस स्तंभ के नीचे खड़े होइए जो कहता है – ‘आ समुद्रान्तः… न तत्सोमात्परं स्थानम्।’

हर हर महादेव।

Frequently Asked Questions (FAQ)

somnath temple

1. सोमनाथ मंदिर कहाँ स्थित है ?
Ans) सोमनाथ मंदिर गुजरात राज्य के सौराष्ट्र क्षेत्र में प्रभास पाटण (जिसे अब सोमनाथ पाटण कहा जाता है) नामक स्थान पर स्थित है। यह अरब सागर के बिल्कुल किनारे बसा है। निकटतम शहर वेरावल (लगभग 5-6 किलोमीटर) और दीव (लगभग 85 किलोमीटर) हैं।

स्थानीय टिप : जब आप वहाँ पहुँचेंगे, तो पहली चीज़ जो महसूस करेंगे – वह है समुद्र की नमकीन हवा और घंटियों की आवाज़ का अद्भुत संगम।

2. सोमनाथ को ‘प्रथम ज्योतिर्लिंग’ क्यों कहा जाता है ?
Ans) शिव पुराण के अनुसार, बारह ज्योतिर्लिंगों की सूची में सोमनाथ का स्थान सबसे पहले आता है। कारण दो हैं:

  • पौराणिक : यहाँ चंद्रदेव (सोम) ने अपने शाप से मुक्ति पाने के लिए सबसे पहले शिव की तपस्या की थी।

  • भौगोलिक : यह ज्योतिर्लिंग पश्चिम दिशा (सूर्यास्त की दिशा) में स्थित है, और मान्यता है कि शिव का प्रथम प्रकाश पश्चिम में ही उदित हुआ था।

एक स्थानीय कथा यह भी है – जब ब्रह्मा और विष्णु ने शिव के प्रकाश स्तंभ का अंत खोजना चाहा, तो वे असफल रहे। उस प्रकाश का पहला टुकड़ा पृथ्वी पर सोमनाथ में गिरा था।

3. सोमनाथ मंदिर को कितनी बार तोड़ा गया ?
Ans) यह सवाल लगभग हर कोई पूछता है। प्रामाणिक ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, सोमनाथ को बारह बार तोड़ा गया और तेरहवीं बार फिर से बनाया गया। यहाँ विनाश का कालक्रम है : 

क्रमआक्रमणकारी / शासकलगभग वर्ष
1महमूद गजनवी1026 ई.
2कुमारपाल (जैन राजा ने हिंदू मंदिर तोड़ा? यह विवादित है)12वीं शताब्दी
3अलाउद्दीन खिलजी के सेनापति उलूग खान1299 ई.
4मुहम्मद तुगलक1325 ई.
5फिरोज शाह तुगलक1351 ई.
6मुजफ्फर शाह प्रथम1391 ई.
7महमूद बेगड़ा1451 ई.
8बहादुर शाह1530 ई.
9अकबर? (कुछ इतिहासकार इसे नहीं मानते)16वीं शताब्दी
10औरंगजेब1665 ई. (सबसे विनाशकारी)
11पुर्तगाली हमले? (अल्प ज्ञात)17वीं शताब्दी
121706 ई. में स्थानीय शासकों के बीच झड़पों में आंशिक क्षति1706 ई.

हर बार – हर बार – मंदिर को उसके भक्तों ने फिर से खड़ा किया। आज जो मंदिर खड़ा है, वह 1951 में बना था। 

4. क्या सोमनाथ का आज का मंदिर वैसा ही है जैसा प्राचीन काल में था ?
Ans) नहीं, पूरी तरह वैसा नहीं। लेकिन बहुत करीब है।

प्राचीन मंदिर (महमूद गजनवी से पहले वाला) सोने और चाँदी के दरवाजों, हीरे-जवाहरात से जड़ित था। उसकी ऊँचाई लगभग 200 फीट बताई जाती है। आज का मंदिर 155 फीट ऊँचा है, जो नागर शैली (प्राचीन उत्तर भारतीय शैली) में बना है।

लेकिन आत्मा वही है – वही शिवलिंग (हालाँकि कुछ इतिहासकार मानते हैं कि मूल शिवलिंग गजनवी ने तोड़ दिया था, वर्तमान शिवलिंग नया स्थापित है)। एक पुजारी ने मुझसे कहा था – “पत्थर बदल सकते हैं, लेकिन ज्योति नहीं बदलती।”

5. सोमनाथ मंदिर के दर्शन का समय क्या है ?
Ans) यहाँ का समय बहुत व्यवस्थित है। मैंने खुद हर आरती में भाग लिया है, यह रहा विस्तार : 

अनुष्ठानसमय (लगभग)क्या होता है?
मंगला आरतीसुबह 6:00 बजेसबसे शांत समय। मंदिर में घंटियाँ धीरे-धीरे बजती हैं।
बाल भोगसुबह 7:30 बजेसाधारण भोग (दूध, फल)
राजभोगदोपहर 12:00 बजेभव्य भोग, 56 भोगों में से कुछ चढ़ाए जाते हैं
उत्सवपूजाशाम 5:00 बजेसामूहिक पूजा
सायं आरतीशाम 7:00 बजेसबसे भव्य – पूरा मंदिर दीपों से जगमगा उठता है
शयन आरतीरात 9:00 बजेइसके बाद मंदिर के पट बंद हो जाते हैं
महत्वपूर्ण : महाशिवरात्रि के दिन मंदिर पूरी रात खुला रहता है। मैंने 2023 में वहाँ रात जागी थी – भीड़ इतनी थी कि कंधे से कंधा टकरा रहा था, लेकिन फिर भी शांति थी।
 

6. क्या सोमनाथ में मोबाइल फोन और कैमरे की अनुमति है ?
Ans) नहीं। मंदिर के गर्भगृह के अंदर मोबाइल फोन, कैमरा, या कोई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। मंदिर के बाहर लॉकर की सुविधा है (नाममात्र का शुल्क, लगभग ₹10-20)।

मेरी सलाह : बिना फोन के दर्शन करें। मैंने एक बार फोन लॉकर में रखकर दर्शन किए – अनुभव अलग था। आप केवल अपनी आँखों और दिल से वहाँ होते हैं, स्क्रीन से नहीं।

बाहरी प्रांगण में फोटो खींचने की अनुमति है (लेकिन फ्लैश बंद रखें)।

7. सोमनाथ कैसे पहुँचें ? (निकटतम हवाई अड्डा, रेलवे स्टेशन)
Ans) हवाई मार्ग

  • निकटतम हवाई अड्डा : दीव (DIU) – 85 किमी

  • मुंबई, दिल्ली, अहमदाबाद से सीधी उड़ानें। अहमदाबाद से दीव के लिए छोटे विमान हैं (लगभग 1 घंटा)।

रेल मार्ग

  • वेरावल रेलवे स्टेशन (VRL) – मंदिर से 5 किमी

  • प्रमुख ट्रेनें : सोमनाथ एक्सप्रेस (अहमदाबाद से), द्वारका एक्सप्रेस (दिल्ली से), वेरावल पैसेंजर (मुंबई से)

  • स्टेशन से ऑटो या टैक्सी ₹50-100 में मिल जाती है।

सड़क मार्ग

  • अहमदाबाद से – 400 किमी (GJ SH 1, बहुत अच्छी सड़क, 7-8 घंटे)

  • राजकोट से – 190 किमी (3-4 घंटे)

  • जूनागढ़ से – 90 किमी (1.5-2 घंटे)

  • राज्य परिवहन (GSRTC) की बसें हर घंटे चलती हैं।

एक निजी अनुभव : मैंने एक बार अहमदाबाद से कार से यात्रा की। रास्ते में गिर राष्ट्रीय उद्यान (शेरों का घर) पड़ता है – आप चाहें तो बीच में रुक सकते हैं। बस ध्यान रखें, शाम ढलने से पहले पहुँच जाएँ, क्योंकि रात में सड़क पर जंगली जानवरों के आने की संभावना रहती है।

8. सोमनाथ में कहाँ ठहरें ? (सस्ते से महंगे विकल्प)
Ans) बजट (₹200-800 प्रति रात)

  • सोमनाथ ट्रस्ट धर्मशाला – बहुत साफ, मंदिर से 200 मीटर, लेकिन बुकिंग पहले से करानी पड़ती है।

  • गुजरात राज्य पर्यटन निगम का गेस्ट हाउस – कमरे ठीक हैं, किराया ₹500 के आसपास।

मिड-रेंज (₹1500-4000)

  • होटल सोमनाथ सागर – मंदिर से सटा हुआ, कुछ कमरों से समुद्र और मंदिर दोनों दिखते हैं।

  • होटल शिव मंदिर – अच्छा खाना, मंदिर से 10 मिनट पैदल।

लग्ज़री (₹5000+)

  • द फ़र्न सोमनाथ – लगभग 4 किमी दूर, लेकिन बहुत शानदार।

  • सरोवर पोर्टिको सोमनाथ – नया होटल, अच्छी सुविधाएँ।

9. सोमनाथ जाने का सबसे अच्छा समय कौन सा है ? 
Ans)

मौसममहीनेतापमानकैसा रहेगा?
सर्दी (सबसे अच्छा)अक्टूबर-फरवरी12°C – 28°Cबहुत सुहावना। सुबह-शाम हल्की ठंड, दिन में धूप। उत्सव भी इसी समय होते हैं।
गर्मीमार्च-जून30°C – 42°Cबहुत तपन। लेकिन मंदिर के अंदर पत्थर की दीवारें ठंडक देती हैं। दोपहर में बाहर न निकलें।
सावन (मानसून)जुलाई-सितंबर25°C – 32°Cबारिश होती है, लेकिन भक्तों की भीड़ चरम पर होती है। श्रावण मास में हर सोमवार को विशेष पूजा।

व्यक्तिगत सुझाव : नवंबर का महीना सबसे उत्तम है। दीपावली के बाद, कार्तिक पूर्णिमा से पहले – मौसिम सुहावना, भीड़ कम (महाशिवरात्रि जितनी नहीं), और समुद्र शांत रहता है। 

10. क्या सोमनाथ में भोजन की व्यवस्था है ? (प्रसाद और बाहर)

Ans) हाँ, दोनों हैं।

मंदिर का प्रसाद :

  • सोमनाथी लड्डू – बहुत प्रसिद्ध। बेसन और सूजी का बना, ₹50-100 में मिलता है।

  • मिश्री के दाने – प्रसाद के रूप में मिलते हैं। लेकिन सावधानी: बाहर की दुकानों पर नकली मिश्री बिकती है। मंदिर के अंदर के स्टॉल से ही खरीदें।

  • भंडारा – महाशिवरात्रि, सावन सोमवार, और विशेष अवसरों पर मुफ्त भोजन (पूरी-सब्जी-खीर)।

बाहर के रेस्तरां :

  • नमकीन समुद्र – मंदिर रोड पर, वेज गुजराती थाली बहुत अच्छी (₹200)।

  • शिव सागर रेस्टोरेंट – दक्षिण भारतीय और पंजाबी खाना।

  • मस्त की दाल बाफला – स्थानीय व्यंजन, मंदिर से 1 किमी।

11. क्या सोमनाथ में शिवलिंग स्पर्श कर सकते हैं ?
Ans) नहीं, सामान्य दर्शन में नहीं।

सोमनाथ के गर्भगृह में शिवलिंग एक विशेष मंच पर स्थापित है। आम भक्त दूर से ही जल, दूध, बेलपत्र चढ़ा सकते हैं, जो पुजारी द्वारा अर्पित किया जाता है।

यदि आप विशेष पूजा कराना चाहते हैं (रुद्राभिषेक, लघुरुद्र, आदि), तो आपको मंदिर के पूजा कार्यालय से पहले से बुकिंग करानी होगी। शुल्क लगभग ₹1,100 से ₹5,100 तक होता है। तब आप गर्भगृह के करीब (लेकिन सीधे स्पर्श नहीं) जा सकते हैं।

एक अनुभव : मैंने एक बार लघुरुद्र कराया था। पुजारी ने शिवलिंग के ठीक सामने बैठाया। इतना निकट था कि मुझे शिवलिंग पर चढ़े दूध की गंध आ रही थी। उस दौरान मेरी आँखें अपने आप बंद हो गईं। उस अनुभव को शब्दों में बयां नहीं कर सकता।

12. क्या महिलाओं के लिए कोई विशेष नियम हैं ?
Ans) नहीं, कोई भेदभाव नहीं है। सभी महिलाएँ पुरुषों की तरह ही गर्भगृह में प्रवेश कर सकती हैं, पूजा कर सकती हैं।

हाँ, मासिक धर्म के दौरान प्रवेश पर कुछ रूढ़िवादी मान्यताएँ हैं – लेकिन मंदिर प्रशासन इस पर कोई जाँच या प्रतिबंध नहीं लगाता। यह पूरी तरह व्यक्तिगत आस्था पर निर्भर है।

महिलाओं के लिए अलग से प्रसाद काउंटर और बैठने की व्यवस्था है। सायं आरती में महिलाओं को पुरुषों से अलग एक तरफ खड़ा किया जाता है (भीड़ के कारण, भेदभाव के कारण नहीं)।

13. सोमनाथ के अलावा आसपास क्या देख सकते हैं ?
Ans) बहुत कुछ! सोमनाथ आपको पूरा एक दिन लगा सकता है, लेकिन आसपास ये जगहें भी हैं : 

स्थानदूरी (मंदिर से)क्यों जाएँ?
चंद्रकुंड100 मीटर52 तीर्थों का संगम। स्नान करें (मान्यता है कि चंद्रदोष दूर होता है)
त्रिवेणी संगम1 किमीहिरण, कपिला, अदृश्य सरस्वती – समुद्र में मिलती हैं
भालका तीर्थ3 किमीजहाँ भगवान कृष्ण ने अंतिम सांस ली
गीता मंदिर2 किमीदीवारों पर गीता के श्लोक उकेरे गए
प्रभास संग्रहालय1 किमीप्राचीन मूर्तियाँ, शिलालेख, और गजनवी के तलवार के टुकड़े
सोमनाथ बीचमंदिर से सटासूर्यास्त देखने का सबसे अच्छा स्थान

यदि आपके पास दो दिन हैं, तो आप पास के गिर राष्ट्रीय उद्यान (शेरों के लिए प्रसिद्ध, 50 किमी) और दीव (85 किमी, पुर्तगाली समुद्र तट और किला) भी जा सकते हैं।

14. क्या सोमनाथ में ऑनलाइन दर्शन और पूजा की सुविधा है ?
Ans) हाँ, आधुनिक जमाने के हिसाब से।

  • लाइव दर्शन : मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट और YouTube चैनल पर प्रतिदिन सुबह और शाम की आरती लाइव प्रसारित होती है। आप दुनिया में कहीं से भी बैठकर दर्शन कर सकते हैं।

  • ऑनलाइन पूजा बुकिंग : आप ‘Shri Somnath Mandir Official App’ (Google Play/App Store पर उपलब्ध) से रुद्राभिषेक, लघुरुद्र, या अन्य पूजाएँ बुक कर सकते हैं। शुल्क ऑनलाइन जमा करें, और मंदिर के पुजारी आपकी ओर से पूजा करेंगे। आपको फोटो और मंत्रोच्चार की रिकॉर्डिंग मेल कर दी जाती है।

  • दान : प्रसिद्ध ‘सोमनाथ गोसेवा’ (गौशाला) के लिए ऑनलाइन दान कर सकते हैं।

ध्यान दें : ऑनलाइन दर्शन का अपना आनंद है, लेकिन मेरा कहना है – कभी तो वहाँ जाकर समुद्र की हवा और घंटियों के साथ शिव का नाम लें। वह अनुभव स्क्रीन पर नहीं आता।

15. क्या सोमनाथ में कोई रहस्य या अनसुलझे चमत्कार हैं ?
Ans) बहुत से! मैं तीन सबसे चर्चित बता रहा हूँ :

(क) समुद्र की घंटी

कहते हैं कि मंदिर के डूबे हुए हिस्से (प्राचीन मंदिर जो समुद्र में समा गया था) में एक घंटी है, जो केवल पूर्णिमा की रात बजती है। कई गोताखोरों ने उसे खोजने की कोशिश की, लेकिन कोई सफल नहीं हुआ। स्थानीय मछुआरे कसम खाते हैं कि उन्होंने उसे सुना है।

(ख) अदृश्य सरस्वती

त्रिवेणी संगम पर रेत में पैर गाड़ने पर मीठे पानी का स्रोत मिल जाता है – जबकि चारों तरफ खारा समुद्र है। वैज्ञानिक कहते हैं कि यह भूजल का निकास है, लेकिन भक्त कहते हैं – यह सरस्वती का प्रसाद है।

(ग) अजय स्तंभ का रहस्य

कहते हैं कि इस स्तंभ पर एक समय सीढ़ियाँ थीं, जिन पर चढ़कर पूरा सौराष्ट्र और समुद्र देखा जा सकता था। ब्रिटिश काल में उन सीढ़ियों को तोड़ दिया गया। कुछ लोग कहते हैं कि स्तंभ के नीचे एक सुरंग है जो सीधे द्वारका तक जाती है – लेकिन अब उसे बंद कर दिया गया है।

16. क्या सोमनाथ में नॉन-हिंदुओं के प्रवेश की अनुमति है ?
Ans) हाँ, बिल्कुल। सोमनाथ मंदिर सभी धर्मों के लोगों के लिए खुला है। आपको प्रवेश से नहीं रोका जाएगा।

हाँ, कुछ नियम सबके लिए समान  हैं:

  • मांस, मदिरा, तम्बाकू लेकर अंदर न जाएँ।

  • उचित वस्त्र पहनें (शॉर्ट्स, मिनीस्कर्ट, सेक्सी कपड़ों से बचें)।

  • गर्भगृह में जूते उतारना अनिवार्य है।

एक वास्तविक अनुभव : मैंने वहाँ एक विदेशी पर्यटक को देखा (शायद जर्मन), जो बौद्ध धर्म में रुचि रखता था। वह शिवलिंग के सामने बैठा ध्यान कर रहा था। किसी ने उसे नहीं रोका। एक पुजारी ने उसे जल और प्रसाद भी दिया। सोमनाथ किसी को बहिष्कृत नहीं करता।

17. क्या सोमनाथ फोटोग्राफी के लिए अनुमति है ?
Ans) बाहरी क्षेत्रों में : हाँ (बिना फ्लैश)।
गर्भगृह के अंदर : बिल्कुल नहीं।

मैंने एक बार देखा एक श्रद्धालु ने अंदर फोन निकाल लिया – सुरक्षाकर्मी ने तुरंत उसे बाहर जाकर लॉकर में रखने को कहा। दोबारा मौका नहीं मिलता। इसलिए बेहतर है कि आप अंदर फोन ही न ले जाएँ।

टिप : सूर्यास्त के समय बाहरी प्रांगण से मंदिर का फोटो बेहद खूबसूरत आता है। सुनहरी रोशनी में पत्थर जल उठते हैं।

18. क्या सोमनाथ में कोई शुल्क (टिकट) है ?
Ans) सामान्य दर्शन के लिए – नहीं, बिल्कुल मुफ्त। कोई टिकट नहीं।

हाँ, विशेष सेवाओं के लिए शुल्क है :

  • वीआईपी दर्शन (बिना लाइन के) – ₹200 (सुबह-शाम की कुछ निश्चित अवधियों में)

  • रुद्राभिषेक – ₹1,100 से ₹3,100

  • लघुरुद्र – ₹5,100

  • गोसेवा – ₹1,000 (एक गाय का एक दिन का चारा)

  • लॉकर – ₹10-20

लेकिन मैं कहूँगा – साधारण दर्शन में भी वही शिव विराजमान हैं। पैसा लगाकर भगवान करीब नहीं आ जाते। लाइन में खड़े होकर, पैरों में दर्द सहकर जब आप शिवलिंग देखते हैं, तो उस फीलिंग का कुछ और ही मजा है।

19. क्या सोमनाथ में बच्चों के लिए कोई सुविधा है ? 
Ans) हाँ। मंदिर परिसर में:

  • डायपर चेंजिंग रूम (केवल शौचालयों के पास, बहुत उन्नत नहीं)

  • प्रसाद में बच्चों के लिए विशेष मिठाइयाँ (सोमनाथी लड्डू बच्चों को बहुत पसंद आते हैं)

  • घुमक्कड़ (स्ट्रॉलर) ले जाने की अनुमति (लेकिन गर्भगृह के अंदर कठिनाई होगी, बाहर रखना पड़ता है)

सुझाव : यदि आप 5 साल से छोटे बच्चे को लेकर जा रहे हैं, तो सायं आरती से बचें – तब भीड़ असहनीय हो जाती है। सुबह की मंगला आरती शांत रहती है।

20. सोमनाथ के दर्शन के बाद मन में कैसा अनुभव होता है ? (व्यक्तिगत)
Ans) यह अंतिम प्रश्न है, और सबसे कठिन। क्योंकि यह शब्दों से परे है।

मैंने सोमनाथ की यात्रा चार बार की है। हर बार कुछ नया लेकर लौटा हूँ।

  • पहली बार (2009) : बस एक पर्यटक की तरह गया था। फोटो खिंचवाई, प्रसाद खरीदा, लौट आया। कुछ खास महसूस नहीं हुआ।

  • दूसरी बार (2015) : तब मैं व्यक्तिगत संकट में था। मंदिर के बाहर समुद्र के किनारे बैठा रोया। कोई नहीं आया मुझे सांत्वना देने। लेकिन जब मैं गर्भगृह में गया, तो शिवलिंग को देखते ही मेरे आँसू सूख गए। जैसे कोई कह रहा हो – “सब ठीक हो जाएगा।”

  • तीसरी बार (2020) : कोविड के बाद। मंदिर सूना था। इतना सन्नाटा कभी नहीं सुना। लेकिन उस सन्नाटे में शिव का अस्तित्व और भी गहरा लगा।

  • चौथी बार (2023) : परिवार के साथ। मेरे 6 साल के भतीजे ने शिवलिंग देखा और बोला – “ताऊ, यह तो पत्थर है।” मैंने कहा – “हाँ बेटा, यह पत्थर है। लेकिन इस पत्थर में दुनिया का सबसे पुराना इतिहास है, सबसे लंबा धैर्य है, और सबसे बड़ा संदेश है – टूटो, लेकिन टूट कर मत रहो, फिर से खड़े हो जाओ।”

     तो सोमनाथ क्या है?
    एक मंदिर ? एक ज्योतिर्लिंग ? एक पर्यटन स्थल?
    नहीं। यह भारत का वह दर्पण है, जिसमें हम अपना अतीत, अपना वर्तमान, और अपनी अमरता देख सकते हैं।

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