CP Radhakrishnan Biography In Hindi
Hello Friends, CP राधाकृष्णन (Radhakrishnan) चुनाव जितने के बाद भारत के 15 वे उपराष्ट्रपति बन गये हैं | आइये इनके बारे में विस्तृत से अध्यन करते हैं –
Table of Contents
Toggle1. प्रारंभिक जीवन व शिक्षा
सी. पी. राधाकृष्णन (C. P. Radhakrishnan) भारतीय राजनीति का एक जाना-माना नाम हैं, जिनकी पहचान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता, समाजसेवी, लोकसभा सांसद, और वर्तमान में महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में है। वे उन नेताओं में गिने जाते हैं जिन्होंने न केवल तमिलनाडु में भाजपा की जड़ों को मजबूत किया बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी अलग पहचान बनाई।
A) जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि
सी. पी. राधाकृष्णन (Radhakrishnan) का जन्म 4 मई 1957 को तमिलनाडु के कोयंबटूर ज़िले में हुआ। उनका परिवार एक मध्यमवर्गीय हिंदू परिवार था, जो शिक्षा, अनुशासन और सामाजिक सेवा में विश्वास रखता था। राधाकृष्णन बचपन से ही पढ़ाई के साथ-साथ खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहे।
उनके पिता एक साधारण लेकिन समाज के प्रति समर्पित व्यक्ति थे। वे चाहते थे कि बेटा पढ़-लिखकर समाज की सेवा करे। माँ धार्मिक विचारों वाली महिला थीं, जिन्होंने बचपन से ही राधाकृष्णन में संस्कार, ईमानदारी और परिश्रम का बीज बोया।
B) शिक्षा
सी. पी. राधाकृष्णन (Radhakrishnan) ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कोयंबटूर में प्राप्त की। वे हमेशा से मेधावी छात्र रहे और गणित तथा विज्ञान जैसे विषयों में गहरी रुचि रखते थे। बाद में उन्होंने कोयंबटूर इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (CIT) से स्नातक की डिग्री हासिल की।
कॉलेज जीवन के दौरान ही वे छात्र राजनीति, सामाजिक सेवा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की गतिविधियों से जुड़ गए। यह वही दौर था जब उनमें राष्ट्रवाद, अनुशासन और संगठनात्मक कार्यों के प्रति गहरी आस्था विकसित हुई।
C) प्रारंभिक रुचियाँ और व्यक्तित्व
राधाकृष्णन (Radhakrishnan) का व्यक्तित्व शुरू से ही नेतृत्वकारी रहा। स्कूल और कॉलेज में वे वाद-विवाद, खेलकूद और नेतृत्वकारी गतिविधियों में भाग लेते थे। खेलों में विशेष रूप से क्रिकेट और फुटबॉल के प्रति उनकी गहरी रुचि थी।
उनकी रुचियाँ केवल राजनीति या पढ़ाई तक सीमित नहीं थीं। वे हमेशा समाज में व्याप्त समस्याओं, जैसे—गरीबी, अशिक्षा, और जातिगत भेदभाव—को करीब से देखते थे। यह संवेदनशीलता बाद में उनकी राजनीतिक और सामाजिक यात्रा की नींव बनी।
D) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ाव
युवा अवस्था में ही राधाकृष्णन (Radhakrishnan) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े। संघ की शाखाओं में नियमित रूप से भाग लेने से उन्होंने संगठनात्मक कार्य, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति समर्पण की शिक्षा प्राप्त की। यही जुड़ाव आगे चलकर उन्हें भाजपा से जोड़ने का माध्यम बना।
RSS के कार्यकर्ता के रूप में उन्होंने न केवल सामाजिक कार्य किए बल्कि लोगों में राष्ट्रभक्ति की भावना जगाने के लिए भी लगातार प्रयास किया। इससे उनके अंदर नेतृत्व की क्षमता और अधिक निखरी।
2. राजनीतिक आरंभ और लोकसभा (1998–2004)
A) राजनीति में पहला कदम
सी. पी. राधाकृष्णन (Radhakrishnan) की सक्रिय राजनीति की शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के माध्यम से हुई। संघ से जुड़ने के बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की तमिलनाडु इकाई में काम करना शुरू किया। उस दौर में तमिलनाडु की राजनीति लगभग पूरी तरह DMK और AIADMK जैसी क्षेत्रीय पार्टियों के इर्द-गिर्द घूमती थी। भाजपा का जनाधार बहुत सीमित था। ऐसे माहौल में राधाकृष्णन (Radhakrishnan) जैसे कार्यकर्ताओं के लिए चुनौती यह थी कि वे राष्ट्रीय राजनीति के विचारों को दक्षिण भारत के सामाजिक–राजनीतिक परिदृश्य से जोड़ सकें।
राधाकृष्णन (Radhakrishnan) ने जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को जोड़ा, गाँव-गाँव जाकर संगठन को मजबूत किया और स्थानीय भाषा व संस्कृति को अपनाकर भाजपा के संदेश को जनता तक पहुँचाया। उनकी मेहनत और ईमानदारी के कारण वे जल्दी ही पार्टी की नज़र में एक ऊर्जावान नेता बन गए।
B) 1998 का ऐतिहासिक लोकसभा चुनाव
1998 के आम चुनाव भाजपा के लिए तमिलनाडु में एक अहम मोड़ साबित हुए। पार्टी ने AIADMK के साथ गठबंधन किया, और इसी गठबंधन के तहत राधाकृष्णन (Radhakrishnan) को कोयंबटूर लोकसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया गया।
कोयंबटूर क्षेत्र खासकर 1997 के कोयंबटूर बम धमाकों की वजह से राष्ट्रीय चर्चा में था, जिसमें 50 से ज़्यादा लोग मारे गए थे। उस घटना ने पूरे तमिलनाडु को झकझोर दिया था। भाजपा ने राधाकृष्णन (Radhakrishnan) को उम्मीदवार बनाकर यह संदेश दिया कि पार्टी आतंकवाद और अलगाववाद के खिलाफ खड़ी है।
भारी चुनौतियों और भावनात्मक माहौल के बीच राधाकृष्णन (Radhakrishnan) ने चुनाव लड़ा और शानदार जीत दर्ज की। वे पहली बार लोकसभा पहुँचे और तमिलनाडु से भाजपा के प्रमुख चेहरे बन गए।
C) संसद में योगदान
1998 से 2004 तक लगातार दो बार सांसद रहने के दौरान राधाकृष्णन ने संसद में सक्रिय भूमिका निभाई। वे कई महत्वपूर्ण समितियों के सदस्य रहे—जैसे:
- वित्त समिति
- उद्योग समिति
- सूचना प्रौद्योगिकी समिति
उन्होंने कोयंबटूर और तमिलनाडु के विकास से जुड़े कई मुद्दे संसद में उठाए। उनका विशेष ध्यान औद्योगिक विकास, वस्त्र उद्योग, रेलवे संपर्क, और शिक्षा पर रहा।
राधाकृष्णन (Radhakrishnan) का वक्तृत्व और तर्कसंगत शैली ने उन्हें संसद में अलग पहचान दिलाई। वे कम बोलते थे लेकिन जब भी बोलते, तथ्य और समाधान के साथ बोलते।
D) संयुक्त राष्ट्र (UN) में भारत का प्रतिनिधित्व
1999 में उन्हें भारत सरकार ने संयुक्त राष्ट्र (UN) में भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर दिया। यह उनके राजनीतिक करियर की एक बड़ी उपलब्धि थी। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की नीतियों और दृष्टिकोण को प्रस्तुत किया।
यह उपलब्धि न केवल व्यक्तिगत सम्मान थी बल्कि इसने भाजपा और तमिलनाडु में उनके राजनीतिक कद को भी मज़बूती दी।
E) 2004 तक का सफर
1998 और 1999 दोनों चुनावों में जीत हासिल करने के बाद राधाकृष्णन (Radhakrishnan) ने कोयंबटूर की जनता के बीच गहरी पकड़ बनाई। हालाँकि, 2004 के आम चुनाव में भाजपा और उसके सहयोगियों को पूरे देश में कठिनाई का सामना करना पड़ा और यूपीए सत्ता में आया। उस चुनाव में राधाकृष्णन भी हार गए, लेकिन उन्होंने हार को स्वीकारते हुए संगठन में अपनी सक्रिय भूमिका बनाए रखी।
3. तमिलनाडु में प्रमुख नेतृत्व — रथ यात्रा और राज्य अध्यक्षता
A) तमिलनाडु की राजनीति में भाजपा की चुनौती
तमिलनाडु की राजनीति हमेशा से ही द्रविड़ पार्टियों—जैसे DMK और AIADMK—के इर्द-गिर्द घूमती रही है। ऐसे माहौल में भाजपा जैसी राष्ट्रीय पार्टी के लिए जगह बनाना बेहद कठिन कार्य था। लेकिन राधाकृष्णन (Radhakrishnan) ने यह चुनौती स्वीकार की और संगठन को मजबूत करने के लिए लगातार काम किया।
भाजपा का मतदाता आधार तब सीमित था, परंतु राधाकृष्णन (Radhakrishnan) का मानना था कि यदि जनता तक राष्ट्रवाद, सुशासन और विकास का संदेश पहुँचे तो भाजपा तमिलनाडु में भी अपने पैर जमा सकती है।
B) 2004–07: रथ यात्रा का नेतृत्व
2004 के आम चुनाव के बाद भाजपा तमिलनाडु में कमजोर स्थिति में आ गई थी। उस कठिन दौर में राधाकृष्णन (Radhakrishnan) ने कार्यकर्ताओं को संगठित रखने के लिए साहसिक कदम उठाया।
उन्होंने 2004–2007 के बीच ‘रथ यात्रा’ का आयोजन किया। इस रथ यात्रा का उद्देश्य था:
- भाजपा के विचारों को गाँव-गाँव तक पहुँचाना
- कार्यकर्ताओं में आत्मविश्वास भरना
- केंद्र सरकार (तब NDA) की नीतियों का प्रचार करना
- आतंकवाद और अलगाववाद के खिलाफ जनजागरण
रथ यात्रा के दौरान वे सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा कर जनता से मिले। वे सड़क पर खड़े होकर लोगों से सीधा संवाद करते और उनकी समस्याएँ सुनते। यह शैली तमिलनाडु की जनता को बहुत भायी क्योंकि उन्होंने देखा कि राधाकृष्णन (Radhakrishnan) केवल मंच पर भाषण देने वाले नेता नहीं, बल्कि लोगों के बीच रहने वाले जननेता हैं।
C) भाजपा तमिलनाडु अध्यक्ष
2004 की हार के बाद भाजपा को राज्य में एक ऐसे नेता की ज़रूरत थी जो संगठन को फिर से खड़ा कर सके। पार्टी नेतृत्व ने यह ज़िम्मेदारी सी. पी. राधाकृष्णन (Radhakrishnan) को दी और वे भाजपा तमिलनाडु इकाई के अध्यक्ष बनाए गए।
अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने कई संगठनात्मक सुधार किए:
- पार्टी की शाखाओं को गाँव-गाँव तक पहुँचाया
- युवाओं और महिलाओं को पार्टी से जोड़ने की मुहिम चलाई
- सामाजिक और धार्मिक संगठनों से संवाद स्थापित किया
- स्थानीय भाषा (तमिल) में प्रचार और जनसंपर्क को प्राथमिकता दी
उनके नेतृत्व में भाजपा तमिलनाडु में धीरे-धीरे फिर से सक्रिय होने लगी। हालाँकि चुनावी सफलता तुरंत नहीं मिली, लेकिन कार्यकर्ताओं का आत्मविश्वास काफी बढ़ा।
D) राष्ट्रीय नेतृत्व से करीबी
तमिलनाडु में अध्यक्ष रहते हुए राधाकृष्णन (Radhakrishnan) ने राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई। वे उस समय अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी जैसे वरिष्ठ नेताओं के विश्वसनीय माने जाते थे। आडवाणी की कई यात्राओं और अभियानों में राधाकृष्णन (Radhakrishnan) ने सक्रिय भूमिका निभाई।
उनकी यही सक्रियता आगे चलकर उन्हें राष्ट्रीय राजनीति और विभिन्न प्रशासनिक पदों तक ले गई।
E) समाजसेवा और जनसंपर्क
राजनीतिक गतिविधियों के साथ-साथ राधाकृष्णन (Radhakrishnan) समाजसेवा में भी सक्रिय रहे। उन्होंने कोयंबटूर और आस-पास के इलाकों में कई शैक्षिक संस्थाओं और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए योगदान दिया। उनकी सबसे बड़ी ताकत यह थी कि वे चुनाव हारने के बावजूद जनता से संपर्क नहीं तोड़ते थे।
4. कोइर बोर्ड, केरल प्रभारी और प्रशासनिक भूमिकाएँ
A) राजनीति से प्रशासनिक भूमिकाओं की ओर
2009 के बाद जब भाजपा को तमिलनाडु में लगातार चुनावी चुनौतियाँ झेलनी पड़ीं, तो पार्टी ने राधाकृष्णन (Radhakrishnan) की संगठनात्मक क्षमता और प्रशासनिक अनुभव का इस्तेमाल अन्य भूमिकाओं में करना शुरू किया। राधाकृष्णन (Radhakrishnan) ने यह साबित कर दिया था कि वे केवल चुनाव लड़ने वाले नेता नहीं, बल्कि संगठन और प्रशासन दोनों में दक्ष व्यक्ति हैं।
B) कोइर बोर्ड के अध्यक्ष (2016–2020)
वर्ष 2016 में केंद्र सरकार ने उन्हें कोइर बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया। यह बोर्ड भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग मंत्रालय (MSME) के अधीन कार्य करता है और मुख्यतः नारियल से बनने वाले उत्पादों (Coir industry) को बढ़ावा देने के लिए जिम्मेदार है।
C) उनके कार्यकाल की मुख्य उपलब्धियाँ:
- निर्यात में वृद्धि – राधाकृष्णन (Radhakrishnan) के नेतृत्व में कोइर उद्योग का निर्यात ऐतिहासिक स्तर पर पहुँचा। भारतीय कोइर उत्पाद अमेरिका, यूरोप और खाड़ी देशों में अधिक लोकप्रिय हुए।
- तकनीकी सुधार – परंपरागत उद्योग को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के प्रयास किए। मशीनों और नए डिज़ाइन के प्रयोग को बढ़ावा दिया गया।
- रोज़गार सृजन – कोइर उद्योग ग्रामीण क्षेत्रों में लाखों लोगों, खासकर महिलाओं, के लिए रोजगार का बड़ा स्रोत है। राधाकृष्णन (Radhakrishnan) ने नए प्रशिक्षण केंद्रों और स्वयं सहायता समूहों के ज़रिए रोजगार बढ़ाया।
- स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन – युवाओं को इस पारंपरिक उद्योग से जोड़ने के लिए विशेष योजनाएँ शुरू की गईं।
उनके नेतृत्व में कोइर बोर्ड को देशभर में एक सफल संस्था के रूप में नई पहचान मिली।
D) भाजपा केरल प्रभारी (2020–2022)
कोइर बोर्ड में सफलता के बाद पार्टी ने उन्हें एक और कठिन ज़िम्मेदारी सौंपी। 2020 में उन्हें केरल भाजपा का प्रभारी बनाया गया।
केरल में भाजपा की स्थिति तमिलनाडु से भी अधिक चुनौतीपूर्ण थी, क्योंकि यहाँ वामपंथी और कांग्रेस की गहरी जड़ें थीं। राधाकृष्णन (Radhakrishnan) ने संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देने और जनता से सीधा संपर्क बनाने पर ज़ोर दिया।
(*) उनके प्रयासों की खास बातें:
- जनसंवाद यात्रा: उन्होंने कार्यकर्ताओं को जनता के बीच जाकर भाजपा की नीतियाँ समझाने का निर्देश दिया।
- धार्मिक-सामाजिक संगठनों से संवाद: उन्होंने हिंदू संगठनों और चर्च दोनों से संवाद बनाने का प्रयास किया ताकि भाजपा को व्यापक समर्थन मिल सके।
- युवा नेतृत्व पर जोर: युवाओं को संगठन में लाने के लिए विशेष अभियान चलाए।
हालाँकि केरल में भाजपा अभी तक बड़ी चुनावी सफलता हासिल नहीं कर पाई, लेकिन राधाकृष्णन (Radhakrishnan) के प्रयासों से संगठन मजबूत हुआ और पार्टी का वोट शेयर लगातार बढ़ा।
E) अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियाँ
राधाकृष्णन (Radhakrishnan) को समय-समय पर केंद्र सरकार ने विभिन्न समितियों और बोर्ड्स में भी शामिल किया। उनका अनुभव और साफ-सुथरी छवि उन्हें हमेशा प्रशासनिक कार्यों के लिए उपयुक्त बनाती रही।
5. राज्यपाल के रूप में कार्यकाल
A) झारखंड के राज्यपाल (2023–2024)
सी. पी. राधाकृष्णन (Radhakrishnan) को फरवरी 2023 में झारखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया। झारखंड एक खनिज-समृद्ध लेकिन सामाजिक–राजनीतिक दृष्टि से जटिल राज्य है। यहाँ आदिवासी समाज, खनन कंपनियाँ और विकास के बीच संतुलन बनाना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है।
(*) झारखंड में उनके कार्यकाल की प्रमुख विशेषताएँ
- जनता से सीधा संवाद – राधाकृष्णन (Radhakrishnan) ने राजभवन को जनता के लिए सुलभ बनाया। उन्होंने नियमित रूप से जनता दरबार आयोजित किए।
- शिक्षा और आदिवासी कल्याण – आदिवासी युवाओं की शिक्षा और रोजगार के लिए विशेष योजनाओं को बढ़ावा दिया।
- पारदर्शिता पर जोर – सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही की बात बार-बार दोहराई।
- राजनीतिक संतुलन – उस समय झारखंड में राजनीतिक अस्थिरता थी। राधाकृष्णन (Radhakrishnan) ने संवैधानिक दायरे में रहते हुए सभी दलों से संतुलित संबंध बनाए।
B) अतिरिक्त प्रभार: तेलंगाना और पुदुच्चेरी
राज्यपाल रहते हुए उन्हें कुछ समय के लिए तेलंगाना और पुदुच्चेरी का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया। इन प्रभारों के दौरान उन्होंने प्रशासनिक सादगी और तटस्थता बनाए रखी। विशेष बात यह रही कि उन्होंने हर क्षेत्र की संस्कृति और भाषा का सम्मान किया।
C) महाराष्ट्र के राज्यपाल (2024–वर्तमान)
2024 में उन्हें भारत के एक सबसे बड़े और महत्वपूर्ण राज्य महाराष्ट्र का राज्यपाल बनाया गया। महाराष्ट्र की राजनीति अक्सर उतार-चढ़ाव और गठबंधन की जटिलताओं से भरी रहती है। ऐसे में राधाकृष्णन (Radhakrishnan) की भूमिका और भी अहम हो गई।
(*) महाराष्ट्र में उनके कार्यकाल की प्रमुख बातें
- संवैधानिक गरिमा – उन्होंने बार-बार कहा कि राज्यपाल का पद किसी राजनीतिक दल के लिए नहीं बल्कि संविधान के लिए है।
- किसानों से जुड़ाव – महाराष्ट्र के विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्रों में जाकर उन्होंने किसानों की समस्याएँ सुनीं।
- शिक्षण संस्थाओं में सुधार – राज्यपाल के रूप में वे विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति भी होते हैं। राधाकृष्णन (Radhakrishnan) ने विश्वविद्यालयों में अकादमिक गुणवत्ता और पारदर्शिता पर जोर दिया।
- जनसंपर्क – वे जनता से सीधा संवाद करना पसंद करते हैं। कई बार वे गाँवों और छोटे कस्बों में बिना किसी बड़े प्रोटोकॉल के पहुँच जाते हैं।
D) कार्यशैली और दृष्टिकोण
राज्यपाल के रूप में राधाकृष्णन (Radhakrishna) की कार्यशैली सादगीपूर्ण और संवादात्मक रही है।
- वे निर्णय लेने से पहले संबंधित पक्षों की बात ध्यान से सुनते हैं।
- किसी भी मुद्दे को राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय संवैधानिक दृष्टिकोण अपनाते हैं।
- जनता के बीच जाकर उनकी वास्तविक समस्याओं को समझने की कोशिश करते हैं।
6. उपराष्ट्रपति पद के लिए नामांकन और राजनीति
A) राष्ट्रीय स्तर पर पहचान
भाजपा संगठन, लोकसभा सांसद, कोइर बोर्ड अध्यक्ष और राज्यपाल के रूप में अपनी विविध भूमिकाओं के कारण सी. पी. राधाकृष्णन (Radhakrishnan) की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर एक अनुभवी, संतुलित और ईमानदार नेता के रूप में बन चुकी थी। वे दक्षिण भारत से आने वाले उन कुछ नेताओं में से एक हैं जिन्होंने लगातार राष्ट्रीय राजनीति में योगदान दिया।
उनका यह सफर उन्हें उस मुकाम तक ले गया जहाँ केंद्र सरकार और भाजपा नेतृत्व ने उन्हें और भी बड़ी जिम्मेदारी देने का निर्णय लिया।
B) उपराष्ट्रपति पद के लिए NDA का उम्मीदवार (2025)
2025 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने आगामी उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए सी. पी. राधाकृष्णन (Radhakrishnan) को अपना उम्मीदवार घोषित किया। यह निर्णय कई दृष्टिकोणों से महत्वपूर्ण था:
- दक्षिण भारत का प्रतिनिधित्व – भाजपा लंबे समय से दक्षिण भारत में अपने जनाधार को बढ़ाने की कोशिश कर रही है। राधाकृष्णन (Radhakrishnan) का नाम सामने लाकर पार्टी ने यह संदेश दिया कि दक्षिण भारत के नेताओं को भी राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान और प्रतिनिधित्व दिया जा रहा है।
- साफ-सुथरी छवि – राधाकृष्णन (Radhakrishnan) की छवि एक ईमानदार, सादगीपूर्ण और संविधान-निष्ठ नेता की रही है। यह गुण उपराष्ट्रपति जैसे संवैधानिक पद के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
- संगठनात्मक अनुभव – वे निचले स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक संगठन और प्रशासन दोनों में कार्य कर चुके हैं। इस अनुभव ने उन्हें योग्य उम्मीदवार बनाया।
C) राजनीतिक महत्व
उनके नामांकन ने भाजपा को कई राजनीतिक फायदे पहुँचाए:
- तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में भाजपा कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ा।
- दक्षिण भारत में पार्टी की स्वीकार्यता को बल मिला।
- राष्ट्रीय राजनीति में भाजपा ने यह संकेत दिया कि वह केवल उत्तर भारत केंद्रित पार्टी नहीं, बल्कि पूरे भारत की प्रतिनिधि है।
D) उपराष्ट्रपति पद की भूमिका और राधाकृष्णन की दृष्टि
भारत का उपराष्ट्रपति राज्यसभा का सभापति होता है। यह पद दलगत राजनीति से ऊपर उठकर संसदीय परंपराओं और बहसों को सुचारू रूप से चलाने की ज़िम्मेदारी निभाता है।
राधाकृष्णन ने नामांकन के समय अपने वक्तव्यों में कहा था:
- वे सभी दलों के साथ समान व्यवहार करेंगे।
- संसद की गरिमा और लोकतांत्रिक मूल्यों को सर्वोपरि मानेंगे।
- युवाओं और समाज के वंचित वर्गों की आवाज़ को संसद में अधिक स्थान दिलाने का प्रयास करेंगे।
E) समर्थन और प्रतिक्रियाएँ
- NDA के नेताओं ने उनके नामांकन का स्वागत करते हुए कहा कि वे संतुलित और अनुभवी व्यक्ति हैं।
- विपक्षी दलों में भी कई नेताओं ने व्यक्तिगत स्तर पर राधाकृष्णन की ईमानदार छवि की सराहना की, हालाँकि चुनावी राजनीति में समर्थन अलग-अलग रहा।
- तमिलनाडु और दक्षिण भारत में उनके समर्थकों ने इसे ऐतिहासिक क्षण माना।
7. व्यक्तिगत जीवन, रुचियाँ और विरासत
A) पारिवारिक जीवन
सी. पी. राधाकृष्णन (Radhakrishnan) का निजी जीवन बेहद सादा और अनुशासित माना जाता है।
- वे तमिलनाडु के पारंपरिक मूल्यों और संस्कारों से गहराई से जुड़े हुए हैं।
- परिवार में उनकी छवि एक जिम्मेदार और सरल व्यक्ति की है, जो सार्वजनिक जीवन की व्यस्तताओं के बावजूद पारिवारिक रिश्तों को महत्व देते हैं।
- उनकी पत्नी व बच्चे भी सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े रहते हैं, लेकिन राजनीतिक मंच पर वे अपेक्षाकृत कम दिखाई देते हैं।
उनका मानना है कि परिवार और समाज से मिलने वाले संस्कार ही व्यक्ति को सार्वजनिक जीवन में स्थिर और ईमानदार बनाए रखते हैं।
B) व्यक्तिगत रुचियाँ
राधाकृष्णन (Radhakrishnan) केवल राजनीति तक सीमित नहीं हैं।
- खेल-कूद – बचपन से ही क्रिकेट और फुटबॉल उनके पसंदीदा खेल रहे हैं। आज भी वे खेलों को युवाओं के जीवन का अनिवार्य हिस्सा मानते हैं।
- साहित्य और अध्ययन – वे नियमित रूप से तमिल और अंग्रेज़ी साहित्य पढ़ते हैं। इतिहास और संस्कृति से जुड़ी किताबें विशेष रूप से उन्हें प्रिय हैं।
- संगीत और संस्कृति – तमिलनाडु की पारंपरिक संगीत और सांस्कृतिक गतिविधियों में उनकी गहरी रुचि है।
- समाजसेवा – राजनीति के बाहर भी वे कई शैक्षिक संस्थानों और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े रहते हैं।
C) जीवन दर्शन
राधाकृष्णन (Radhakrishnan) का जीवन दर्शन तीन मूल्यों पर आधारित माना जाता है:
- ईमानदारी – सार्वजनिक जीवन में उन्होंने कभी व्यक्तिगत स्वार्थ को प्राथमिकता नहीं दी।
- समर्पण – चाहे सांसद रहे हों या राज्यपाल, उन्होंने हमेशा खुद को संविधान और जनता की सेवा के लिए समर्पित रखा।
- सादगी – उनका रहन-सहन, बोलचाल और कार्यशैली बेहद सरल है।
D) तमिलनाडु और राष्ट्रीय राजनीति में योगदान
- तमिलनाडु में भाजपा का संगठन मजबूत करने में उनका योगदान अमूल्य है।
- कोयंबटूर में 1998 और 1999 की उनकी जीत ने दिखा दिया कि भाजपा दक्षिण भारत में भी जगह बना सकती है।
- कोइर बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने लाखों ग्रामीण परिवारों के जीवन में सुधार लाया।
- राज्यपाल रहते हुए उन्होंने संवैधानिक पद की गरिमा बनाए रखी।
- उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बनकर उन्होंने दक्षिण भारत को राष्ट्रीय राजनीति में नया प्रतिनिधित्व दिलाया।
E) विरासत और प्रभाव
सी. पी. राधाकृष्णन (Radhakrishnan) का जीवन आज की राजनीति में एक प्रेरणा है। वे इस बात के उदाहरण हैं कि राजनीति केवल सत्ता प्राप्ति का साधन नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की सेवा का माध्यम भी हो सकती है।
उनकी विरासत तीन स्तरों पर देखी जा सकती है:
- संगठनात्मक स्तर – भाजपा जैसे राष्ट्रीय दल को तमिलनाडु जैसे कठिन राज्य में खड़ा करने का साहस।
- प्रशासनिक स्तर – कोइर बोर्ड और राज्यपाल पद पर उनकी पारदर्शी कार्यशैली।
- राष्ट्रीय स्तर – उपराष्ट्रपति पद तक पहुँचने वाली उनकी यात्रा यह दर्शाती है कि एक साधारण कार्यकर्ता भी ईमानदारी और मेहनत से उच्चतम संवैधानिक पदों तक पहुँच सकता है।
8. निष्कर्ष
सी. पी. राधाकृष्णन (Radhakrishnan) का जीवन संघर्ष, सेवा और सादगी का प्रतीक है। उन्होंने एक कार्यकर्ता से लेकर सांसद, पार्टी अध्यक्ष, कोइर बोर्ड अध्यक्ष, राज्यपाल और अब उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार तक की लंबी यात्रा तय की।
उनकी यह यात्रा न केवल व्यक्तिगत सफलता की कहानी है, बल्कि यह भी दिखाती है कि भारतीय लोकतंत्र में हर व्यक्ति के लिए अवसर मौजूद हैं—बशर्ते वह समाज और राष्ट्र के लिए ईमानदारी से काम करे।