The Bengal Files
1. भूमिका और परिचय
भारतीय सिनेमा में समय-समय पर ऐसी फिल्में बनी हैं जिन्होंने इतिहास के दबे हुए और भूले हुए पन्नों को उजागर किया है। निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने अपनी Files Trilogy के माध्यम से इसी मिशन को अपनाया है। इस श्रृंखला की पहली कड़ी थी The Tashkent Files (2019), जिसमें भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की रहस्यमयी मृत्यु की गुत्थी को उठाया गया। दूसरी कड़ी थी The Kashmir Files (2022), जिसने कश्मीर में हुए कश्मीरी पंडितों के पलायन और नरसंहार की दास्तां को परदे पर लाकर देश को हिला दिया।
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Toggleइसी कड़ी की अंतिम फिल्म है “The Bengal Files: Right To Life”, जिसे संक्षेप में The Bengal Files कहा जाता है। यह फिल्म बंगाल के इतिहास के उस काले अध्याय पर प्रकाश डालती है जिसे बहुत लंबे समय तक न केवल छिपाया गया बल्कि भुला भी दिया गया। यह अध्याय है 1946 का Direct Action Day और उसके बाद हुए नोआखली दंगे, जिनमें हजारों निर्दोष लोगों ने अपनी जान गंवाई थी।
फिल्म की टैगलाइन है – “Boldest Film Ever” और इसका उपशीर्षक है – Right To Life। निर्देशक विवेक अग्निहोत्री का दावा है कि यह फिल्म एक “अभूतपूर्व सिनेमाई अनुभव” होगी और इसका उद्देश्य है इतिहास के उन सच्चाइयों को सामने लाना जिन्हें या तो जानबूझकर दबा दिया गया या फिर समय की धूल में गुम कर दिया गया।
2. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
फिल्म (The Bengal File) को समझने के लिए जरूरी है कि पहले उस दौर की पृष्ठभूमि को समझा जाए जिसमें इसकी कहानी आधारित है।
A) Direct Action Day (16 अगस्त 1946)
- यह दिन मुस्लिम लीग द्वारा “Pakistan Demand” को मजबूती से पेश करने के लिए चुना गया था।
- लीग ने पूरे बंगाल और विशेष रूप से कलकत्ता (अब कोलकाता) में बंद और रैलियों का आह्वान किया।
- शुरुआत में यह एक राजनीतिक प्रदर्शन था, लेकिन जल्द ही यह साम्प्रदायिक हिंसा में बदल गया।
- परिणामस्वरूप, चार दिनों तक कलकत्ता की सड़कों पर खून की नदियाँ बहती रहीं।
- मृतकों की संख्या 4,000 से 10,000 के बीच आँकी जाती है, जबकि हजारों लोग घायल हुए और लाखों विस्थापित हुए।
B) नोआखली दंगे (अक्टूबर–नवंबर 1946)
- Direct Action Day की चिंगारी बंगाल के ग्रामीण इलाकों तक पहुँच गई।
- अक्टूबर 1946 में नोआखली (अब बांग्लादेश में) और तिप्परा (Comilla) जिलों में भयानक हिंसा भड़की।
- हजारों हिंदुओं की हत्या की गई, उनकी महिलाओं के साथ बलात्कार हुआ, गाँव जला दिए गए और लाखों लोगों को पलायन करना पड़ा।
- महात्मा गांधी स्वयं नोआखली पहुँचे और कई हफ्तों तक गाँव-गाँव घूमकर लोगों को शांति का संदेश दिया।
C) विभाजन का पूर्वाभास
- 1946 की ये घटनाएँ एक तरह से आने वाले भारत-विभाजन का संकेत थीं।
- बंगाल (Bengal) और पंजाब में साम्प्रदायिक तनाव इतना बढ़ चुका था कि संयुक्त भारत की कल्पना व्यावहारिक रूप से कठिन हो गई।
- अंततः 1947 में देश का विभाजन हुआ और बंगाल भी पश्चिम बंगाल और पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में बँट गया।
3. फिल्म की कथा संरचना
फिल्म (The Bengal File) की कहानी पूरी तरह ऐतिहासिक डॉक्यूमेंट्री न होकर एक थ्रिलर और ड्रामा के रूप में बुनी गई है।
A) आधुनिक दौर की कहानी
- फिल्म (The Bengal File) में एक महिला पत्रकार “सीता” की गुमशुदगी की जाँच दिखाई गई है।
- सीबीआई की एक टीम इस केस को सुलझाने में जुटी है।
- उनकी जाँच धीरे-धीरे उन्हें अतीत के उन पन्नों तक ले जाती है जहाँ Direct Action Day और नोआखली दंगे जैसे भयावह अध्याय दर्ज हैं।
B) फ्लैशबैक और ऐतिहासिक दृश्य
- फिल्म (The Bengal File) में 1946 के कलकत्ता और नोआखली की घटनाओं को बड़े ही यथार्थवादी तरीके से पुनःनिर्मित किया गया है।
- दर्शकों को सीधे उस दौर में ले जाने के लिए निर्देशक ने 500 से अधिक किताबों और ऐतिहासिक दस्तावेजों का अध्ययन किया।
- फिल्म (The Bengal File) में गांधी, जिन्नाह और अन्य ऐतिहासिक किरदारों को भी दिखाया गया है।
C) मुख्य संदेश
- फिल्म (The Bengal File) केवल इतिहास की पुनर्कथन नहीं है, बल्कि एक चेतावनी भी है।
- विवेक अग्निहोत्री का कहना है कि “अगर समाज समय पर अपने अतीत से सबक नहीं लेता, तो इतिहास खुद को दोहराता है।”
- फिल्म (The Bengal File) यह सवाल उठाती है कि क्या बंगाल एक और “कश्मीर” बनने की ओर बढ़ रहा है?
4. कलाकार और उनके किरदार
फिल्म (The Bengal File) के लिए विवेक अग्निहोत्री ने एक बड़ा और विविध कलाकार समूह चुना है। इसमें हिंदी सिनेमा के दिग्गज कलाकारों से लेकर बंगाल के लोकप्रिय अभिनेताओं तक को शामिल किया गया है।
A) मिथुन चक्रवर्ती
- फिल्म (The Bengal File) के प्रमुख चेहरों में से एक हैं।
- वे एक ऐसे बुज़ुर्ग नेता की भूमिका निभा रहे हैं जो बंगाल के सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य को बेहद गहराई से समझता है।
- मिथुन का बंगाल से गहरा नाता है, इसलिए उनकी मौजूदगी इस फिल्म को और प्रामाणिक बनाती है।
B) अनुपम खेर
- अनुपम खेर ने महात्मा गांधी की भूमिका निभाई है।
- गांधीजी नोआखली दंगों के समय स्वयं वहाँ जाकर लोगों को शांति और भाईचारे का संदेश देने की कोशिश करते हैं।
- खेर के लिए यह भूमिका चुनौतीपूर्ण रही क्योंकि गांधी को परदे पर उतारना एक बड़ी ज़िम्मेदारी है।
C) पल्लवी जोशी
- निर्देशक विवेक अग्निहोत्री की पत्नी और एक शानदार अभिनेत्री।
- उन्होंने The Kashmir Files में भी अहम किरदार निभाया था।
- इस फिल्म (The Bengal File) में वे एक इतिहासकार और बुद्धिजीवी का किरदार निभाती हैं, जो घटनाओं की सच्चाई को सामने लाने में सक्रिय भूमिका अदा करती है।
D) दर्शान कुमार
- दर्शान ने एक सीबीआई अफसर की भूमिका निभाई है।
- वे उस गुमशुदा पत्रकार के केस को सुलझाने की कोशिश करते हैं और धीरे-धीरे उन्हें समझ आता है कि यह केस महज़ एक व्यक्तिगत घटना नहीं बल्कि एक “ऐतिहासिक रहस्य” से जुड़ा हुआ है।
E) सस्वता चटर्जी
- बंगाल के जाने-माने अभिनेता।
- वे एक स्थानीय नेता की भूमिका में हैं जो दंगों की राजनीति में उलझे हुए हैं।
F) राजेश खेरा
- इस फिल्म (The Bengal File) में मोहम्मद अली जिन्नाह की भूमिका निभा रहे हैं।
- जिन्नाह को Direct Action Day का मुख्य सूत्रधार माना जाता है, और फिल्म में उनका यह पक्ष दर्शाया गया है।
G) अन्य कलाकार
सिमरत कौर, नमाशी चक्रवर्ती, पुनीत इस्सर, प्रियांशु चटर्जी, दिबेंदु भट्टाचार्य, सौरव दास, मोहन कपूर, एक्लव्य सूद और अनुभा अरोरा भी अहम भूमिकाओं में नज़र आएँगे।
5. निर्माण और सिनेमाई प्रस्तुति
A) निर्माण प्रक्रिया
- फिल्म (The Bengal File) का ऐलान अप्रैल 2022 में हुआ था, जब The Kashmir Files की सफलता ने पूरे देश में चर्चा बटोरी थी।
- रिसर्च के लिए विवेक अग्निहोत्री ने लगभग 500 किताबें पढ़ीं, कई पुराने अभिलेख खंगाले और प्रत्यक्षदर्शियों के परिवारों से बातचीत की।
- फिल्म (The Bengal File) की शूटिंग 2023–2024 के बीच कोलकाता, मुंबई और लंदन में हुई।
- जनवरी 2025 तक फिल्म पूरी हो गई और पोस्ट-प्रोडक्शन कार्य पूरा हुआ।
B) छायांकन और दृश्यावली
- सिनेमैटोग्राफर अतार सिंह सैनी ने 1940 के दशक के कोलकाता और नोआखली को पर्दे पर जीवंत करने के लिए विशेष तकनीक अपनाई।
- फिल्म (The Bengal File) में उस दौर की गलियों, ट्रामों, कपड़ों और माहौल को पुनःनिर्मित किया गया है।
C) संगीत और पृष्ठभूमि
- संगीतकार रोहित शर्मा ने इस फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर तैयार किया है।
- इसमें बंगाली लोकसंगीत, शास्त्रीय राग और आधुनिक ऑर्केस्ट्रा का मिश्रण है।
- उद्देश्य है कि दर्शक खुद को सीधे उस ऐतिहासिक दौर का हिस्सा महसूस करें।
D) नाम परिवर्तन का प्रसंग
- पहले इस फिल्म का नाम The Delhi Files: The Bengal Chapter रखा गया था।
- लेकिन जून 2025 में इसे बदलकर The Bengal Files: Right To Life कर दिया गया।
- सोशल मीडिया पर हुए एक पोल में 99% लोगों ने यह नाम चुना था।
6. रिलीज़ और ट्रेलर विवाद
A) रिलीज़ की योजना
- फिल्म (The Bengal File), 5 सितंबर 2025 (शिक्षक दिवस) को रिलीज़ होगी।
- यह तिथि प्रतीकात्मक है क्योंकि विवेक अग्निहोत्री इसे “जनजागरण का दिन” मानते हैं।
B) ट्रेलर लॉन्च (16 अगस्त 2025, कोलकाता)
- यह दिन भी प्रतीकात्मक था क्योंकि 16 अगस्त 1946 को ही Direct Action Day हुआ था।
- ट्रेलर लॉन्च कोलकाता के एक होटल में किया गया।
- लेकिन कार्यक्रम के दौरान अराजकता फैल गई—बिजली की तार काट दी गईं और कार्यक्रम दो बार बाधित हुआ।
C) विवाद और राजनीतिक प्रतिक्रिया
- विवेक अग्निहोत्री ने इसे “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला” बताया और पश्चिम बंगाल सरकार को जिम्मेदार ठहराया।
- तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेताओं ने फिल्म को “राजनीतिक प्रोपेगेंडा” कहा और आरोप लगाया कि अग्निहोत्री भाजपा के एजेंडे पर काम कर रहे हैं।
- इस घटना ने राष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी कि क्या कला और सिनेमा को राजनीति से अलग रखा जा सकता है।
7. सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व
A) दबा हुआ इतिहास
- पाठ्यपुस्तकों में Direct Action Day और नोआखली दंगों का उल्लेख बहुत संक्षिप्त रूप में मिलता है।
- करोड़ों भारतीयों को यह तक नहीं पता कि स्वतंत्रता से ठीक पहले बंगाल में इतने बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी।
- फिल्म (The Bengal File) इस भूले-बिसरे इतिहास को सामने लाती है।
B) साम्प्रदायिक चेतावनी
- निर्देशक का कहना है कि यह फिल्म केवल अतीत की कहानी नहीं बल्कि भविष्य के लिए चेतावनी है।
- अगर समाज साम्प्रदायिकता, विभाजन और राजनीतिक स्वार्थ से सबक नहीं लेगा, तो वही त्रासदी फिर दोहराई जाएगी।
C) पीढ़ियों का दर्द
- फिल्म (The Bengal File) उन परिवारों के दृष्टिकोण को भी सामने लाती है जो दंगों में बर्बाद हो गए।
- यह पीढ़ियों से दबे हुए आघात (generational trauma) को उजागर करती है।
8. आलोचना और शुरुआती समीक्षाएँ
फिल्म (The Bengal File) की रिलीज़ से पहले ही इसके ट्रेलर और विषय-वस्तु पर गहन चर्चा शुरू हो चुकी है।
A) सकारात्मक प्रतिक्रियाएँ
- कई इतिहासकार और सामाजिक कार्यकर्ता मानते हैं कि यह फिल्म उन घटनाओं को सामने लाएगी जिन्हें लंबे समय से दबाकर रखा गया है।
- सोशल मीडिया पर ट्रेलर को लाखों व्यूज़ मिले और दर्शकों ने इसे “हिलाकर रख देने वाला” बताया।
- खासकर बंगाल और उत्तर-पूर्व भारत के लोग इसे “अपनी भूली हुई त्रासदी की आवाज़” मान रहे हैं।
B) आलोचनात्मक दृष्टिकोण
- कुछ बुद्धिजीवियों का कहना है कि विवेक अग्निहोत्री की फिल्मों में एक “राजनीतिक झुकाव” दिखाई देता है।
- उनका तर्क है कि इतिहास को केवल एक दृष्टिकोण से दिखाना खतरनाक हो सकता है।
- वामपंथी और उदारवादी समूहों ने आरोप लगाया कि फिल्म समाज में “ध्रुवीकरण” बढ़ा सकती है।
C) फिल्म समीक्षकों की राय
- शुरुआती समीक्षाओं में कहा गया है कि यह फिल्म सिनेमाई दृष्टि से भी शक्तिशाली है।
- कलाकारों का अभिनय, छायांकन और बैकग्राउंड स्कोर दर्शकों को सीधे 1940 के दशक में ले जाता है।
- हालांकि, कुछ समीक्षक यह भी कहते हैं कि फिल्म “बहुत ही ग्राफिक” और “इमोशनल” है, जिसे सभी दर्शक आसानी से पचा नहीं पाएँगे।
9. राजनीतिक और बौद्धिक हलकों की प्रतिक्रिया
A) राजनीतिक बहस
- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कई नेताओं ने फिल्म का स्वागत किया और कहा कि यह “सत्य को उजागर करने वाली फिल्म” है।
- तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इसे “फेक नैरेटिव” बताया और कहा कि विवेक अग्निहोत्री राज्य की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।
- कांग्रेस पार्टी ने अपेक्षाकृत संतुलित रुख अपनाया और कहा कि “इतिहास को तोड़-मरोड़कर नहीं दिखाना चाहिए।”
B) अकादमिक प्रतिक्रिया
- कुछ विश्वविद्यालयों के इतिहास विभागों ने इसे अध्ययन का विषय बनाने की पेशकश की है।
- वहीं, कुछ इतिहासकारों ने कहा कि फिल्म में “क्रिएटिव लिबर्टी” और “तथ्यात्मक शोध” के बीच अंतर करना ज़रूरी होगा।
C) बौद्धिक हलचलों पर प्रभाव
- यह फिल्म (The Bengal File) फिर से वही बहस खड़ी कर रही है जो The Kashmir Files के बाद हुई थी—
- क्या सिनेमा केवल मनोरंजन है?
- या यह समाज की चेतना को जगाने का माध्यम है?
- बौद्धिक वर्ग में यह भी सवाल उठ रहा है कि “क्या हर अनकही त्रासदी को सिनेमा में लाना चाहिए, भले ही उससे समाज का कोई हिस्सा आहत हो?”
10. निष्कर्ष और संभावित प्रभाव
A) ऐतिहासिक पुनःखोज
The Bengal Files केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक पुनःखोज है। यह उन घटनाओं को याद दिलाती है जिन्हें दशकों तक दबा दिया गया।
B) सामाजिक चेतावनी
फिल्म (The Bengal File) का मुख्य संदेश यह है कि अगर समाज समय पर अपने अतीत से सबक नहीं लेगा तो वही गलतियाँ दोहराई जाएँगी। यह चेतावनी सिर्फ बंगाल या भारत के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए है।
C) संभावित प्रभाव
- यह फिल्म (The Bengal File) निश्चित ही व्यापक बहस और विवाद पैदा करेगी।
- बंगाल के इतिहास, विभाजन और साम्प्रदायिक हिंसा पर नए सिरे से शोध और अध्ययन को प्रोत्साहित करेगी।
- हो सकता है कि यह फिल्म आने वाली पीढ़ियों के लिए “इतिहास की याद दिलाने वाला सांस्कृतिक दस्तावेज़” साबित हो।
11. समापन
इस विस्तृत विवरण में आपने देखा कि The Bengal Files एक साधारण फिल्म से कहीं अधिक है। यह इतिहास, राजनीति, समाज और संस्कृति का संगम है।
- इसकी कहानी 1946 के कलकत्ता दंगे और नोआखली त्रासदी को सामने लाती है।
- कलाकारों ने अपने-अपने किरदारों के माध्यम से इस त्रासदी को जीवंत किया है।
- फिल्म के निर्माण, ट्रेलर लॉन्च और राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ पहले ही इसे चर्चा का विषय बना चुकी हैं।
- और सबसे अहम बात, यह फिल्म हमें हमारे इतिहास से सबक लेने की प्रेरणा देती है।