पुष्कर मेला
1. पुष्कर मेला (Pushkar Fair) : एक परिचय
पुष्कर मेला (Pushkar Fair), जिसे स्थानीय भाषा में “पुष्कर ऊंट मेला” या “कर्तिक मेला” के नाम से भी जाना जाता है, दुनिया के सबसे बड़े पशु मेलों में से एक है। लेकिन इसकी पहचान केवल एक पशु मेले तक सीमित नहीं है। यह एक ऐसा अद्भुत संगम है जहाँ आस्था, व्यापार, मनोरंजन और परंपरा का अनोखा मेल देखने को मिलता है। यह पुष्कर मेला (Pushkar Fair) हर साल कार्तिक मास की पूर्णिमा के आस-पास राजस्थान के अजमेर जिले में स्थित पवित्र पुष्कर नगरी में आयोजित किया जाता है। इसकी भव्यता और विशालता इसे विश्व भर में एक अलग पहचान दिलाती है, जिसके कारण यह देश-विदेश के लाखों पर्यटकों, तीर्थयात्रियों और फोटोग्राफरों को अपनी ओर आकर्षित करता है।
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Toggle2. पौराणिक इतिहास और धार्मिक महत्व
पुष्कर मेले (Pushkar Fair) को समझने के लिए सर्वप्रथम पुष्कर के धार्मिक और पौराणिक महत्व को जानना आवश्यक है। पुष्कर शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के दो शब्दों ‘पुष्प’ (फूल) और ‘कर’ (हाथ) से मानी जाती है, अर्थात ‘वह स्थान जहाँ फूलों की वर्षा भगवान के हाथों से हुई’।
(A) पौराणिक कथा
हिंदू पुराणों के अनुसार, पुष्कर की उत्पत्ति की कथा भगवान ब्रह्मा से जुड़ी हुई है। कहा जाता है कि सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी एक बार यज्ञ करना चाहते थे। यज्ञ के लिए एक उपयुक्त स्थान की खोज करते हुए वे पृथ्वी पर आए। उनके हाथ से कमल का एक पुष्प (पंखुड़ी) गिर गया, जिसके तीन स्थानों पर गिरने से तीन झीलें बन गईं – ज्येष्ठ पुष्कर (बड़ा पुष्कर), मध्यम पुष्कर (मध्य पुष्कर) और कनिष्ठ पुष्कर (छोटा पुष्कर)। इनमें से ज्येष्ठ पुष्कर सबसे प्रमुख है।
यज्ञ स्थल की रक्षा के लिए ब्रह्मा जी ने अपने पुत्र नारद जी को राक्षसों का वध करने के लिए भेजा, लेकिन नारद जी असफल रहे। तब ब्रह्मा जी ने भगवान विष्णु से सहायता मांगी। विष्णु जी ने उन्हें एक वरदान दिया कि एक दिन के लिए वे स्वयं एक तलवार बनेंगे और ब्रह्मा जी का पुत्र बनकर राक्षसों का वध करेंगे।
इस प्रकार विष्णु जी ने ‘सुदर्शन’ नामक एक कुमार का रूप धारण किया और एक तलवार से सभी राक्षसों का संहार कर दिया। लेकिन क्रोध में आकर उन्होंने अपनी ही पत्नी सावित्री का भी सिर धड़ से अलग कर दिया। बाद में, पश्चाताप करने पर विष्णु जी ने उन्हें दर्शन दिए और कहा कि सावित्री का सिर उसी स्थान पर गिरा था, जहाँ आज सावित्री मंदिर स्थित है। ब्रह्मा जी ने अपने यज्ञ की पूर्णता के लिए देवी गायत्री से विवाह किया, जो सावित्री का ही दूसरा रूप मानी जाती हैं।
इस यज्ञ के पश्चात, ब्रह्मा जी ने पुष्कर को अपना निवास स्थान बनाया और घोषणा की कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन जो भी व्यक्ति यहाँ स्नान करेगा और पूजा-अर्चना करेगा, उसे मोक्ष की प्राप्ति होगी। यही कारण है कि पुष्कर को ‘तीर्थराज’ यानी तीर्थों का राजा कहा जाता है और यह दुनिया के चुनिंदा ब्रह्मा मंदिरों में से सबसे प्रसिद्ध है।
(B) धार्मिक महत्व
पुष्कर हिंदुओं के लिए पांच प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक है। ऐसी मान्यता है कि यहाँ स्नान करने से सभी पाप धुल जाते हैं और आत्मा शुद्ध हो जाती है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन यहाँ स्नान का विशेष महत्व है। लाखों श्रद्धालु इस पवित्र अवसर पर पुष्कर झील में डुबकी लगाते हैं और ब्रह्मा मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं। यह झील 52 घाटों से घिरी हुई है, जिनमें से प्रमुख हैं: ब्रह्मा घाट, वराह घाट, गौ घाट और जयपुर घाट। प्रत्येक घाट का अपना एक अलग ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व है।
3. पुष्कर मेले (Pushkar Fair) का ऐतिहासिक सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य
पुष्कर मेले (Pushkar Fair) की शुरुआत एक व्यापारिक मेले के रूप में हुई थी। राजस्थान एक पशु पालन प्रधान राज्य रहा है, जहाँ किसान और खानाबदोश समुदायों के लिए ऊँट, घोड़े, गाय-बैल आदि पशु जीवनयापन का प्रमुख साधन थे। कार्तिक पूर्णिमा के पवित्र अवसर पर जब दूर-दूर से तीर्थयात्री पुष्कर आते थे, तो स्थानीय पशुपालक और व्यापारी भी अपने पशुओं को बेचने और खरीदने के लिए यहाँ एकत्रित होने लगे। धीरे-धीरे यह एक परंपरा बन गई और इस छोटे से मेले ने एक विशाल रूप धारण कर लिया।
राजस्थान के रजवाड़ों ने भी इस मेले को प्रोत्साहन दिया। यह मेला न केवल व्यापार का एक बड़ा केंद्र बना, बल्कि यहाँ विभिन्न क्षेत्रों के लोगों का मिलन-स्थल भी बन गया। लोग न केवल पशु खरीद-बेचने आते, बल्कि एक-दूसरे से समाचारों का आदान-प्रदान करते, रिश्ते तय करते और सांस्कृतिक उल्लास में भाग लेते। इस प्रकार, यह पुष्कर मेला (Pushkar Fair) सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन गया।
समय के साथ, इस मेले ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। ब्रिटिश काल में भी इस मेले का महत्व बना रहा। आजादी के बाद, राजस्थान सरकार और भारत सरकार ने इसे पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया और इसे दुनिया भर में प्रचारित-प्रसारित किया। आज, यह पुष्कर मेला (Pushkar Fair) राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर का एक जीवंत प्रतीक है।
4. मेले का आयोजन और समय
पुष्कर मेला (Pushkar Fair) हिंदू कैलेंडर के अनुसार कार्तिक मास की पूर्णिमा को आयोजित किया जाता है, जो आमतौर पर अंग्रेजी कैलेंडर के अक्टूबर-नवंबर महीने में पड़ता है। यह मेला पांच दिनों तक चलता है, लेकिन इसकी तैयारियाँ हफ्तों पहले से शुरू हो जाती हैं। मेले के मुख्य दिन कार्तिक पूर्णिमा का दिन होता है, जिस दिन सबसे अधिक संख्या में श्रद्धालु झील में स्नान करने आते हैं।
पुष्कर मेले (Pushkar Fair) का आयोजन मुख्य रूप से पुष्कर के विशाल मैदान में होता है, जिसे ‘मेला ग्राउंड’ कहा जाता है। इस विशाल परिसर में ऊँट, घोड़े और अन्य पशुओं के लिए अलग-अलग enclosures बनाए जाते हैं, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए मंच तैयार किए जाते हैं और दुकानें लगाई जाती हैं। राजस्थान पर्यटन विभाग, स्थानीय प्रशासन और विभिन्न समितियों का संयुक्त तत्वावधान में इस भव्य आयोजन को सफल बनाया जाता है।
5. मेले का मुख्य आकर्षण - पशु व्यापार और ऊँट
पुष्कर मेले (Pushkar Fair) की सबसे प्रमुख पहचान इसका पशु व्यापार है, और इसमें भी ऊँट सर्वाधिक आकर्षण का केंद्र होते हैं।
(A) ऊँट - रेगिस्तान का जहाज
राजस्थान की रेतीली धरती के लिए ऊँट एक वरदान हैं। यह परिवहन, सामान ढोने, खेती और दूध देने का काम करते हैं। पुष्कर मेला ऊँटों और उनके व्यापारियों के लिए सबसे बड़ा बाजार है। हज़ारों की संख्या में ऊँटों को उनके मालिक सजा-धजा कर लाते हैं। इन ऊँटों की खरीद-फरोख्त एक दिलचस्प प्रक्रिया है। खरीदार और विक्रेता आपस में मोल-भाव करते हैं, ऊँटों के दांत देखते हैं, उनकी सेहत का जायजा लेते हैं और उनकी चाल परखते हैं।
ऊँटों को सजाने की परंपरा भी बहुत पुरानी है। उन्हें रंग-बिरंगी कंबल, मोतियों और घंटियों से सजाया जाता है। ऊँट की सवारी करना पर्यटकों के लिए सबसे लोकप्रिय गतिविधि होती है। मेले में ऊँट की सुंदरता प्रतियोगिता भी आयोजित की जाती है, जहाँ सबसे सुंदर ऊँट को पुरस्कृत किया जाता है।
(B) अन्य पशु
ऊँटों के अलावा, यहाँ घोड़ों, गायों, भेड़ों और बकरियों का भी व्यापार होता है। राजस्थान के मारवाड़ी घोड़े अपनी सुंदरता और ताकत के लिए प्रसिद्ध हैं। इन्हें देखने और खरीदने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं।
6. एक विस्तृत यात्रा - मेले के विभिन्न पहलू
पुष्कर मेला (Pushkar Fair) एक बहुआयामी अनुभव है। इसे केवल एक घटना के रूप में नहीं, बल्कि कई समानांतर चलने वाले उत्सवों के संगम के रूप में देखा जा सकता है।
(A) धार्मिक और आध्यात्मिक पहलू
पुष्कर मेले (Pushkar Fair) का सबसे पवित्र पक्ष इसका धार्मिक आयोजन है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन सूर्योदय से पहले ही श्रद्धालु पुष्कर झील के घाटों पर एकत्रित होने लगते हैं। पुजारियों के मंत्रोच्चार के बीच वे झील में डुबकी लगाते हैं और सूर्य देवता को अर्घ्य देते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन स्नान करने से सभी तीर्थों में स्नान का पुण्य प्राप्त होता है। इसके बाद श्रद्धालु ब्रह्मा मंदिर और झील के आस-पास स्थित अन्य मंदिरों के दर्शन करते हैं। पूरे शहर में भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों का वातावरण छाया रहता है।
(B) सांस्कृतिक और लोक कला का अद्भुत संसार
पुष्कर मेला (Pushkar Fair) राजस्थानी लोक संस्कृति का एक जीवंत संग्रहालय है। यहाँ दूर-दूर से लोक कलाकार आते हैं और अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं।
(1) लोक नृत्य और संगीत
कालबेलिया नृत्य (सपेरा नृत्य), घूमर, गैर, फिरंगी नृत्य जैसे पारंपरिक नृत्यों की धूम मेले में देखने को मिलती है। ढोल, नगाड़े, अलगोजा, रावणहत्था जैसे वाद्ययंत्रों की मधुर धुनें पूरे वातावरण को मंत्रमुग्ध कर देती हैं।
(2) कठपुतली शो
राजस्थान का पारंपरिक कठपुतली शो बच्चों और बड़ों सभी को समान रूप से आकर्षित करता है। इन शोों में पौराणिक कथाओं और सामाजिक मुद्दों को रोचक ढंग से प्रस्तुत किया जाता है।
(3) लोक गायन
मांगणियार और लंगा समुदाय के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत लोक गीत राजस्थानी संस्कृति की आत्मा हैं। ये गीत प्रेम, बलिदान, वीरता और विरह की कहानियाँ सुनाते हैं।
(C) शिल्प और हस्तकला का खजाना
पुष्कर मेले (Pushkar Fair) में राजस्थान की समृद्ध हस्तकला का भंडार देखने को मिलता है। यहाँ सैकड़ों की संख्या में दुकानें लगती हैं, जो स्थानी कलाकारों के हाथों से बनी विभिन्न वस्तुओं से सजी होती हैं।
(1) टेराकोटा और चमड़े का सामान
हाथ से बनी मिट्टी की आकर्षक कलाकृतियाँ और चमड़े के जूते (जूतियाँ), बैग, पर्स आदि।
(2) जेवरात
चांदी के पारंपरिक आभूषण, कड़े, झुमके, हार आदि जो राजस्थानी संस्कृति की शान हैं।
(3) कपड़े और कढ़ाई
बंधेज, लहरिया, सांगानेरी ब्लॉक प्रिंट के रंग-बिरंगे कपड़े, पगड़ियाँ (साफ़ा), और मिरर वर्क वाले कपड़े।
(4) कालीन और दरियाँ
राजस्थान के प्रसिद्ध हस्तनिर्मित कालीन और दरियाँ।
(5) लकड़ी की नक्काशी
हाथ से नक्काशीदार लकड़ी के फर्नीचर और सजावटी सामान।
(D) पाक कला के स्वाद
पुष्कर मेला (Pushkar Fair) राजस्थानी व्यंजनों के स्वाद का आनंद लेने का एक शानदार अवसर है। यहाँ के स्ट्रीट फूड का स्वाद अविस्मरणीय होता है।
(1) मालपुआ
पुष्कर मेले (Pushkar Fair) की मशहूर मिठाई, जो खासतौर पर तीर्थयात्रियों के बीच बहुत लोकप्रिय है।
(2) दाल बाटी चूरमा
पुष्कर मेले (Pushkar Fair) में राजस्थान का राजसी और प्रसिद्ध व्यंजन मिलता है |
(3) कचौड़ी और मिर्ची बड़ा
गर्मागर्म मसालेदार नाश्ता।
(4) गर्मागर्म चाय और कुल्फी
पुष्कर मेले (Pushkar fair) में रेगिस्तानी गर्मी में राहत देने वाले पेय और मिठाई मिलता है |
(E) मनोरंजक प्रतियोगिताएँ और आयोजन
पुष्कर मेले (Pushkar Fair) में पर्यटकों के मनोरंजन के लिए कई तरह की रोमांचक प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाती हैं।
(1) ऊँट दौड़
पुष्कर मेले (Pushkar Fair) में यह एक बेहद रोमांचक और मजेदार आयोजन है, जहाँ ऊँटों को दौड़ाया जाता है।
(2) मत्था फोड़ी (कुश्ती)
पारंपरिक कुश्ती की प्रतियोगिता, जिसमें राजस्थान और आस-पास के राज्यों के पहलवान भाग लेते हैं।
(3) लंबी दाढ़ी प्रतियोगिता
एक अनोखी प्रतियोगिता जहाँ सबसे लंबी और सुंदर दाढ़ी वाले व्यक्ति को पुरस्कृत किया जाता है।
(4) ब्रीडर्स कॉन्टेस्ट
सबसे सुंदर ऊँट और पशु की प्रतियोगिता।
(5) गर्म हवा के गुब्बारे (Hot Air Balloon)
आधुनिक समय में, पर्यटकों के लिए गर्म हवा के गुब्बारों में बैठकर पूरे मेले का हवाई दृश्य देखने की सुविधा भी शुरू की गई है, जो एक अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करता है।
7. पुष्कर मेला (Pushkar Fair) और आधुनिक पर्यटन
समय के साथ, पुष्कर मेले ने एक बड़ा बदलाव देखा है। अब यह केवल एक स्थानीय व्यापारिक मेला नहीं रह गया है, बल्कि एक वैश्विक पर्यटन आकर्षण बन चुका है। इसके विकास में राजस्थान पर्यटन विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
(A) अंतर्राष्ट्रीय भागीदारी
आज, इस मेले में दुनिया भर से पर्यटक, फोटोग्राफर, शोधार्थी और सांस्कृतिक प्रेमी आते हैं। यह मेला विदेशी पर्यटकों के लिए भारतीय संस्कृति को समझने का एक सशक्त माध्यम बन गया है।
(B) इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास
मेले के दौरान पर्यटकों की सुविधा के लिए बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाता है। टेंट सिटी बसाई जाती है, जहाँ लक्जरी तंबुओं में रहने की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। इसके अलावा, होटल्स, गेस्ट हाउस और रिसॉर्ट्स की भी भरमार रहती है।
(C) डिजिटल प्रचार
सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से मेले का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाता है, जिससे दुनिया के कोने-कोने में इसकी जानकारी पहुँचती है।
8. चुनौतियाँ और संरक्षण के प्रयास
इतनी विशालता और लोकप्रियता के बावजूद, पुष्कर मेला कुछ चुनौतियों का सामना भी कर रहा है।
(A) पर्यावरणीय चिंताएँ
लाखों लोगों के आगमन से झील के पानी की गुणवत्ता, कचरे के प्रबंधन और पर्यावरण प्रदूषण की समस्या उत्पन्न होती है।
(B) पारंपरिक स्वरूप का खतरा
आधुनिकता और व्यावसायिकता के चलते मेले के पारंपरिक स्वरूप के विलुप्त होने का खतरा बना रहता है। पशु व्यापार में कमी आई है और पर्यटन अधिक प्रमुख होता जा रहा है।
(C) सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन
इतनी बड़ी भीड़ को प्रबंधित करना और सभी की सुरक्षा सुनिश्चित करना एक बड़ी जिम्मेदारी है।
इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार और स्थानीय प्रशासन द्वारा कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। झील की सफाई, कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान, जल संरक्षण के उपाय और स्थानीय कलाकारों को प्रोत्साहन जैसे कार्य किए जा रहे हैं ताकि मेले की मौलिकता और परंपरा बरकरार रह सके।
9. एक पर्यटक के रूप में अनुभव और सुझाव
यदि आप पुष्कर मेले (Pushkar Fair) का भ्रमण करने की योजना बना रहे हैं, तो यहाँ कुछ सुझाव दिए जा रहे हैं जो आपके अनुभव को और भी समृद्ध बना सकते हैं:
(A) योजना पहले बनाएँ
मेले के दौरान होटलों और यातायात में भीड़ बहुत अधिक होती है। इसलिए, अपने रहने और यात्रा की व्यवस्था पहले से ही बुक कर लें। यात्रा पे जाने के कुछ दिनों पहले ही आप सब चीजें जांच ले कि सब व्यवस्था आप के अनुसार हुई है की नही क्यूंकि नयी जगह जाने के बाद वहा कुछ करने में आपको कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है | बच्चों को लेकर सभी जरुरी चीजे अपने साथ ले ले |
(B) पारंपरिक पोशाक पहनें
मेले के माहौल में घुलने-मिलने के लिए राजस्थानी पारंपरिक पोशाक जैसे कि घाघरा-चोली या कुर्ता-पजामा पहनना एक अच्छा विचार हो सकता है। इनकी ड्रेस पहनकर आप कुछ हद तक राजस्थानी लगेंगे जो एक अलग ही अनुभव होगा आप के लिए और आप के परिवार के लिए भी | इसलिए इसे जरुर अपनाये |
(C) कैमरा साथ रखें
यहाँ का हर पल एक फोटोग्राफिक अवसर है। अपना कैमरा जरूर साथ रखें। अपना और अपने परिवार की हर फोटो को जरुर खीचें | ये पल बहुत ही यादगार होते है | इसलिए इसे अपने साथ ले जाये |
(D) स्थानीय व्यंजनों का आनंद लें
मालपुआ, दाल बाटी चूरमा और अन्य स्थानीय स्वादों को जरूर आजमाएँ। राजस्थान अपने व्यंजनों के दूर दूर तक प्रसिद्ध है | यहाँ की दल बाटी चूरमा विश्व भर में प्रसिद्ध है |
(E) सम्मानजनक व्यवहार
स्थानीय लोगों, उनकी संस्कृति और धार्मिक स्थलों का सम्मान करें। किसी भी सांस्कृतिक धरोहर को नुकसान नही पहुचना चाहिए क्यूंकि ये विश्व में हमारे देश का प्रतिनिधितव करता है | किसी नये जगह पे जाने पे वहां भाईचारा का माहोल बनाये रखना है | प्रेमपूर्वक वहां के लोगो का सहयोग करना है |
(F) सावधानी बरतें
भीड़ में अपने सामान का ध्यान रखें और निर्देशों का पालन करें। किसी अनजाने व्यक्ति से किसी भी प्रकार का खाना नहीं लेना चाहिए | खासकर छोटे बच्चों का विशेषकर ध्यान रखना चाहिए |
10. निष्कर्ष
पुष्कर मेला (Pushkar Fair) केवल एक आयोजन नहीं है; यह एक भावना है, एक जीवंत परंपरा है जो सदियों से चली आ रही है। यह वह दर्पण है जिसमें राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक आस्था और सामाजिक सद्भाव की झलक साफ़ दिखाई देती है। यह मेला हमें याद दिलाता है कि कैसे परंपरा और आधुनिकता एक साथ मिलकर एक अद्भुत समामेलन create कर सकती हैं। जब भी कोई व्यक्ति पुष्कर मेले (Pushkar Fair) की भव्यता, रंगीनियत और आध्यात्मिकता का अनुभव करता है, तो वह भारत की ‘अनेकता में एकता’ की भावना को महसूस कर पाता है। पुष्कर मेला (Pushkar Fair) truly राजस्थान का गौरव और भारत की सांस्कृतिक धरोहर का एक अमूल्य हिस्सा है।
Frequently Asked Questions (FAQ)
1. पुष्कर मेला क्या है ?
Ans) पुष्कर मेला, जिसे पुष्कर ऊंट मेला (Pushkar Camel Fair) भी कहा जाता है, विश्व के सबसे बड़े पशु मेलों में से एक है। यह राजस्थान के पुष्कर शहर में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला एक अद्वितीय पशु व्यापार, सांस्कृतिक उत्सव और धार्मिक मेला है। यह मेला मुख्य रूप से ऊंटों, घोड़ों और पशुओं के व्यापार के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन अब यह एक वैश्विक पर्यटन आकर्षण बन चुका है जहाँ रंग-बिरंगी सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, प्रतियोगिताएँ और पारंपरिक राजस्थानी बाज़ार लगते हैं।
2. पुष्कर मेला कब लगता है ? (2025 और 2026 की तारीखें) |
Ans) पुष्कर मेला कार्तिक मास (अक्टूबर-नवंबर) में लगता है और कार्तिक पूर्णिमा के दिन समाप्त होता है। यह तारीख हर साल हिंदू कैलेंडर के अनुसार बदलती है।
| वर्ष | मेला तिथियाँ | विशेष |
|---|---|---|
| 2025 | 30 अक्टूबर – 5 नवंबर-3-5-8 | समापन कार्तिक पूर्णिमा (6 नवंबर) को-8 |
| 2026 | 20 नवंबर – 24 नवंबर (अनुमानित)-1 | सटीक तिथियों की पुष्टि 3-4 महीने पहले होती है-6 |
3. पुष्कर मेला कहाँ आयोजित होता है ?
Ans) यह मेला पुष्कर मेला ग्राउंड में आयोजित होता है, जो राजस्थान के अजमेर जिले में स्थित पुष्कर शहर के पास रेगिस्तानी मैदानों में फैला है-3-5। पुष्कर शहर अजमेर से लगभग 15 किमी और जयपुर से लगभग 135 किमी दूर है-1।
4. मेले का मुख्य आकर्षण क्या है?
पुष्कर मेले के प्रमुख आकर्षण इस प्रकार हैं:
ऊंटों का व्यापार और प्रतियोगिताएँ: हजारों सजे-धजे ऊंट, ऊंट दौड़, ऊंट सौंदर्य प्रतियोगिता और ऊंट नृत्य-3-5-7
सांस्कृतिक कार्यक्रम: राजस्थानी लोक नृत्य (कालबेलिया), संगीत, कठपुतली शो-3-5
प्रतियोगिताएँ: सबसे लंबी मूंछें प्रतियोगिता, पगड़ी बांधने की प्रतियोगिता, मटका रेस-3-5
पुष्कर झील: कार्तिक पूर्णिमा पर पवित्र स्नान और संध्या आरती (महा आरती) – दीपकों से जगमगाती झील-3-5
राजस्थानी बाज़ार: हस्तशिल्प, चांदी के गहने, बंधेज साड़ियाँ, चमड़े के बैग, लघु चित्रकला-3-5
साहसिक गतिविधियाँ: गर्म हवा के गुब्बारे में उड़ान, रेगिस्तान में ऊंट सफारी और जीप सफारी-3-8
5. क्या पुष्कर मेले में प्रवेश शुल्क है?
मेले में प्रवेश निःशुल्क है। हालाँकि, कुछ विशेष अनुभवों जैसे गर्म हवा के गुब्बारे की सवारी, निर्देशित रेगिस्तान सफारी, या विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए शुल्क लिया जा सकता है-3-5-10।
6. पुष्कर मेले के लिए कौन से दिन सबसे अच्छे होते हैं?
| यात्रा अवधि | सर्वोत्तम दिन | क्यों? |
|---|---|---|
| 1 दिन (जल्दी) | मध्य के दिन (21-22 नवंबर) | पशु मेला और सांस्कृतिक कार्यक्रम दोनों देख सकते हैं-1 |
| 2 दिन (आदर्श) | 21-23 नवंबर | व्यापार और प्रतियोगिताओं का अच्छा मिश्रण-1 |
| 3 दिन (सर्वोत्तम) | 20-23 नवंबर | झील पर सूर्योदय, टीलों पर सूर्यास्त, पूरा अनुभव-1 |
| आध्यात्मिक फोकस | 24-25 नवंबर | कार्तिक पूर्णिमा स्नान, आरती, मंदिर अनुष्ठान-1 |
7. पुष्कर मेले में क्या खाएँ?
पुष्कर मेले में आपको शुद्ध शाकाहारी राजस्थानी व्यंजन मिलेंगे (पुष्कर एक शाकाहारी और शराब-मुक्त शहर है-3)। अवश्य चखें:
दाल बाटी चूरमा – राजस्थान का सिग्नेचर डिश-3
कचौरी और मिर्ची बड़ा – तीखे नाश्ते-5
गुलाब लस्सी – मिट्टी के कुल्हड़ में-3
कुल्हड़ वाली चाय – ठंडी सुबह के लिए परफेक्ट-3
8. पुष्कर मेले में कहाँ ठहरें?
मेले के दौरान आवास जल्दी बुक करना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि सब कुछ हफ्तों पहले फुल हो जाता है-3। विकल्प इस प्रकार हैं:
| प्रकार | उदाहरण | कीमत (प्रति रात) |
|---|---|---|
| हॉस्टल / होमस्टे | Moustache Pushkar, Zostel | ₹800 – ₹2,000-3 |
| हेरिटेज हवेली | Pushkar Fort | ₹3,000 – ₹10,000-3 |
| लग्जरी डेज़र्ट कैंप | The Westin Pushkar, Royal Safari Camp | ₹10,000 – ₹18,000+-3 |
प्रो टिप: यदि शांति चाहिए तो मुख्य मेला ग्राउंड से थोड़ी दूर रहें-3।
9. पुष्कर कैसे पहुँचें?
| साधन | विवरण |
|---|---|
| हवाई मार्ग | निकटतम हवाई अड्डा किशनगढ़ हवाई अड्डा है (लगभग 18 किमी दूर)-5। दूसरा विकल्प जयपुर हवाई अड्डा (लगभग 150 किमी)-10 |
| रेल मार्ग | निकटतम रेलवे स्टेशन अजमर है (लगभग 11-15 किमी दूर)। वहाँ से टैक्सी या बस-5-10 |
| सड़क मार्ग | अजमर सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा है। जयपुर, दिल्ली, जोधपुर से नियमित बसें और टैक्सियाँ-5 |
10. मेले के दौरान कौन-से धार्मिक अनुष्ठान होते हैं?
पुष्कर मेले का गहरा धार्मिक महत्व है। प्रमुख अनुष्ठान:
कार्तिक पूर्णिमा स्नान: हजारों तीर्थयात्री पुष्कर झील (सरोवर) में डुबकी लगाते हैं, जिससे पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है-9-10
संध्या आरती (महा आरती): झील के घाटों पर दीपक जलाकर भव्य आरती की जाती है-3-5
ब्रह्मा मंदिर दर्शन: यह विश्व का एकमात्र ब्रह्मा मंदिर है-4-8। मान्यता है कि ब्रह्मा जी ने यहाँ यज्ञ किया था-7-9
11. क्या पुष्कर मेला सिर्फ ऊंटों के लिए है?
नहीं! जबकि ऊंट सितारे हैं, मेले में हजारों घोड़े, भैंस, बकरियाँ और अन्य पशु भी लाए जाते हैं-2-5। कुछ भैंसों की कीमत करोड़ों रुपये तक होती है-7। पशु व्यापार मेले का मूल है, लेकिन अब यह एक विशाल सांस्कृतिक महोत्सव बन चुका है-2-3।
12. पुष्कर मेले में क्या खरीदारी करें?
पुष्कर मेले की खरीदारी अपने आप में एक अनुभव है। आप यहाँ ले सकते हैं:
चमड़े के उत्पाद – बैग, जूते (मोजड़ी)-3
लघु चित्रकला – हाथ से बनाई गई पेंटिंग्स-3
पारंपरिक पुतलियाँ – स्मारिका के लिए बेहतरीन-3
प्रो टिप: मोल-भाव (बार्गेनिंग) करना न भूलें – यह यहाँ की संस्कृति का हिस्सा है-10।
13. मेले के दौरान मौसम कैसा रहता है?
नवंबर में पुष्कर का मौसम ठंडा और सुहावना होता है:
दिन का तापमान: 20°C से 28°C – धूप में आरामदायक-8
रात का तापमान: 8°C से 15°C – रात में ठंड हो सकती है-8
क्या पैक करें: दिन के लिए सूती कपड़े, लेकिन सुबह-शाम के लिए स्वेटर, जैकेट, शॉल और मोजे ज़रूर ले जाएँ-10
14. क्या पुष्कर मेले में शराब मिलती है?
नहीं। पुष्कर एक शराब-मुक्त (alcohol-free) और शाकाहारी (vegetarian) शहर है-3। मेले के दौरान भी कहीं भी शराब उपलब्ध नहीं है और न ही इसकी अनुमति है। यह शहर की धार्मिक संवेदनशीलता का हिस्सा है।
15. क्या पुष्कर मेले के लिए पहले से बुकिंग कराना ज़रूरी है?
हाँ, अत्यंत आवश्यक है। मेले के दौरान हर साल 2 लाख से अधिक पर्यटक आते हैं-3-4। होटल, कैंप और गुब्बारे की सवारी हफ्तों या महीनों पहले बुक हो जाते हैं-3-5-10। खासकर अगर आप लग्जरी टेंट या विशेष अनुभव चाहते हैं, तो जल्दी से जल्दी बुक करें-3।
16. पुष्कर मेले के लिए यात्रा टिप्स क्या हैं?
सिर ढकें और शालीन कपड़े पहनें – खासकर मंदिरों और घाटों पर-5-8
पैसे रखें – छोटे विक्रेता कार्ड/UPI स्वीकार नहीं करते; ATM खाली हो सकते हैं-3
पानी पीते रहें – रेगिस्तानी क्षेत्र में डिहाइड्रेशन से बचें-3
जल्दी पहुँचें – मुख्य कार्यक्रमों (जैसे ऊंट दौड़) के लिए सुबह जल्दी पहुँचना बेहतर-5
लोगों की फोटो लेने से पहले अनुमति लें – स्थानीय संस्कृति का सम्मान करें-10
पैरों में आरामदायक जूते पहनें – आपको बहुत चलना होगा-3
घाटों और मंदिरों में जूते उतारने होंगे – आसानी से निकलने वाले जूते पहनें-8
17. पुष्कर में घूमने की अन्य जगहें क्या हैं?
मेले के अलावा, पुष्कर में ये स्थान ज़रूर देखें:
| जगह | विशेषता |
|---|---|
| ब्रह्मा मंदिर | विश्व का एकमात्र ब्रह्मा मंदिर, लाल शिखर वाला-4-8 |
| पुष्कर झील और 52 घाट | पवित्र झील, शाम की आरती अवश्य देखें-9-8 |
| सावित्री मंदिर | पहाड़ी पर स्थित, केबल कार से जाएँ – पूरे पुष्कर का मनोरम दृश्य-5-8 |
| अजमर शरीफ दरगाह | अजमर में (15 किमी दूर), प्रसिद्ध सूफी दरगाह-5 |
| रंगजी मंदिर | दक्षिण भारतीय शैली का विष्णु मंदिर |
18. क्या बच्चों के लिए पुष्कर मेला उपयुक्त है?
हाँ, बिल्कुल! मेले में बच्चों के लिए बहुत कुछ है:
कठपुतली शो और जादू के करतब-3
ऊंट की सवारी – बच्चों को बहुत पसंद आती है-3
रंग-बिरंगे खिलौने और मिठाइयाँ – बाज़ारों में-5
19. क्या पुष्कर मेला फोटोग्राफी के लिए अच्छा है?
दुनिया के सबसे फोटोजेनिक मेलों में से एक-1-10! बेहतरीन फोटो के लिए:
सुबह जल्दी और शाम को – सुनहरी रोशनी बेहतरीन तस्वीरें देती है-10
स्थानीय लोग – राजस्थानी पोशाक, बड़ी मूंछें, पगड़ियाँ – लेकिन अनुमति लेना न भूलें-10
पुष्कर झील – सूर्यास्त और आरती के दौरान जादुई दृश्य-8
20. पुष्कर मेले की शुभकामनाएँ कैसे दें?
प्रचलित संदेश:
“पुष्कर मेले की हार्दिक शुभकामनाएँ! ऊंटों, रंगों और राजस्थानी संस्कृति का यह उत्सव आपके जीवन में भी रंग भर दे।”
“Wishing you a vibrant Pushkar Fair! May the colours of Rajasthan fill your life with joy and prosperity.”
“पुष्कर के रेत के टीले, ऊंटों की सवारी, और कार्तिक पूर्णिमा की पवित्र आरती… आपका पुष्कर मेला अनुभव अविस्मरणीय हो!”
21. पुष्कर मेले का इतिहास क्या है?
पुष्कर मेले का इतिहास सैकड़ों वर्ष पुराना है:
पौराणिक महत्व: मान्यता है कि ब्रह्मा जी ने यहाँ यज्ञ किया था, और इसी दिन से ऊंटों का व्यापार शुरू हुआ।
व्यापारिक पृष्ठभूमि: मेला शुरू में स्थानीय किसानों और पशु व्यापारियों का एक छोटा सा बाज़ार था, जहाँ वे अपने ऊंट, घोड़े, भैंस बेचते और खरीदते थे।
आधुनिक रूप: 20वीं सदी के अंत में राजस्थान सरकार ने इसे वैश्विक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया। अब यहाँ 400,000 से अधिक पर्यटक आते हैं, जिनमें कई विदेशी भी शामिल हैं।
22. पुष्कर मेले में कितने ऊंट आते हैं?
एक अनुमान के अनुसार, मेले के चरम दिनों में 20,000 से 30,000 ऊंट, घोड़े, भैंस और अन्य पशु लाए जाते हैं। हालाँकि, यह संख्या साल दर साल बदलती है और मानसून (बारिश) पर निर्भर करती है। कुछ वर्षों में यह 50,000 तक भी पहुँच गई है।
23. क्या पुष्कर मेले में ऊंटों की नीलामी होती है?
हाँ, यह मेले का मुख्य व्यावसायिक आकर्षण है। नीलामी प्रतिदिन होती है, लेकिन सबसे बड़ी नीलामी आखिरी दो दिनों में लगती है। एक अच्छी नस्ल के ऊंट की कीमत ₹40,000 से ₹1,50,000 तक हो सकती है। प्रतियोगिता जीतने वाले ऊंटों की कीमत और भी अधिक होती है।
24. पुष्कर मेले में “मूंछ प्रतियोगिता” क्या है?
यह सबसे लंबी और सबसे स्टाइलिश मूंछों की प्रतियोगिता है। राजस्थानी पुरुष बड़े गर्व से अपनी मूंछों को स्टाइल करते हैं और प्रतियोगिता में भाग लेते हैं। कुछ मूंछें 6 से 7 फीट तक लंबी होती हैं! विजेताओं को ट्रॉफी और नकद पुरस्कार मिलते हैं। यह मेले के सबसे मज़ेदार और अनोखे कार्यक्रमों में से एक है।
25. क्या पुष्कर मेले में विदेशी पर्यटक आते हैं?
हाँ, बड़ी संख्या में। हर साल 15,000 से अधिक विदेशी पर्यटक पुष्कर मेला देखने आते हैं। इनमें अधिकांश इज़राइल, जर्मनी, फ्रांस, यूके, यूएसए, रूस और जापान से आते हैं। कई तो हफ्तों तक रुकते हैं और रेगिस्तानी कैंपों में रहते हैं। कुछ विदेशी पर्यटक तो पारंपरिक राजस्थानी पोशाक और पगड़ी पहनकर मेले का आनंद लेते हैं!
26. पुष्कर मेले का सांस्कृतिक महत्व क्या है?
यह मेला राजस्थानी संस्कृति का जीता-जागता संग्रहालय है:
लोक संगीत और नृत्य: मांगणियार और लंगा समुदाय के गायक, कालबेलिया नृत्य, गैर नृत्य
पारंपरिक खेल: रस्साकशी, मटका फोड़ प्रतियोगिता, कबूतरबाजी
वेशभूषा: पगड़ियाँ, घूंघट, बंधेज साड़ियाँ, मूंछें, सोने-चांदी के गहने
शिल्प: कठपुतलियाँ, मिट्टी के बर्तन, चमड़े के जूते, हाथी दांत का काम (अब प्रतिबंधित), पत्थर की मूर्तियाँ
27. क्या पुष्कर मेले में नकारात्मक पहलू भी हैं?
हर बड़े आयोजन की तरह, कुछ चुनौतियाँ हैं:
भीड़ और अव्यवस्था: मुख्य दिनों में भयानक भीड़ लगती है
पशु कल्याण की चिंता: कुछ पशु अधिकार संगठन ऊंटों के साथ दुर्व्यवहार की शिकायत करते हैं (हालाँकि सरकार ने अब नियम कड़े कर दिए हैं)
अत्यधिक व्यावसायीकरण: मेला अब पूरी तरह से पर्यटन पर केंद्रित हो गया है, कुछ का मानना है कि इससे इसकी प्रामाणिकता कम हुई है
प्लास्टिक प्रदूषण: पिछले कुछ वर्षों में प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगा है, लेकिन फिर भी समस्या बनी हुई है
28. क्या पुष्कर मेले में पशु दुर्व्यवहार पर कोई नियंत्रण है?
हाँ, राजस्थान सरकार और पशु कल्याण बोर्ड ने कई कदम उठाए हैं:
पशु चिकित्सा शिविर: मेले में निःशुल्क पशु चिकित्सा सेवाएँ
नियम: ऊंटों को अत्यधिक लादने, मारने, या उनकी नाक में छेद करने पर प्रतिबंध
प्रतियोगिताएँ: अब ऊंटों को प्राकृतिक सजावट (रंगों और धातु के बजाय फूल-कपड़े) की अनुमति है
जागरूकता: पर्यटकों को पशुओं को परेशान न करने के लिए कहा जाता है
फिर भी, पशु अधिकार कार्यकर्ता इसे अभी भी अपर्याप्त मानते हैं।
29. क्या पुष्कर मेले में हॉट एयर बैलून की सवारी करनी चाहिए?
बिल्कुल! यह मेले के सबसे रोमांचक अनुभवों में से एक है। सूर्योदय के समय आप पुष्कर झील, ब्रह्मा मंदिर, रेगिस्तान, और ऊंटों की रंगीन लाइनों का हवाई दृश्य देख सकते हैं।
कीमत: लगभग ₹8,000 से ₹15,000 प्रति व्यक्ति (30-60 मिनट की उड़ान)
बुकिंग: बहुत पहले से (ऑनलाइन या ट्रैवल एजेंट से) करवानी पड़ती है
सुरक्षा: लाइसेंस प्राप्त ऑपरेटर ही उड़ान भरते हैं
30. क्या पुष्कर मेले में कैम्पिंग की सुविधा है?
हाँ, रेगिस्तान में कैम्पिंग मेले का मुख्य आकर्षण है। विकल्प:
लग्जरी टेंट सिटी: एसी, अटैच बाथरूम, गर्म पानी, बुफे डिनर, लाइव संगीत – ₹8,000 – ₹25,000 प्रति रात
स्विस टेंट: मध्यम सुविधाएँ – ₹4,000 – ₹10,000 प्रति रात
बजट टेंट: बुनियादी, साझा स्नानघर – ₹1,500 – ₹3,000 प्रति रात
खुद का टेंट: आप अपना टेंट ला सकते हैं, लेकिन अनुमति लेनी होगी
31. पुष्कर मेले में घूमने के लिए कितने दिन चाहिए?
| अवधि | कवरेज |
|---|---|
| 1 दिन | सिर्फ ऊंट दौड़ और प्रतियोगिताएँ देख सकते हैं – बहुत जल्दबाजी होगी |
| 2 दिन (न्यूनतम) | एक दिन मेला, एक दिन झील और मंदिर – संभव है |
| 3 दिन (आदर्श) | दिन 1: मेला और प्रतियोगिताएँ; दिन 2: झील आरती, बाज़ार, कैंप; दिन 3: ब्रह्मा मंदिर, सावित्री मंदिर, विदाई |
| 4+ दिन (अधिकतम अनुभव) | पूरा मेला अनुभव, आसपास के शहर (अजमर, किशनगढ़) भी घूम सकते हैं |
32. क्या पुष्कर मेले में ऊंट की सवारी कर सकते हैं?
हाँ, यह सबसे लोकप्रिय गतिविधियों में से एक है। मेले के मैदान और आसपास के टीलों पर आप ऊंट सफारी कर सकते हैं:
छोटी सवारी (15-20 मिनट): ₹200 – ₹500 प्रति व्यक्ति
टीले की सवारी (1 घंटा): ₹500 – ₹1,000 प्रति व्यक्ति
सूर्यास्त सफारी (2-3 घंटे): ₹1,500 – ₹3,000 प्रति व्यक्ति (चाय और स्नैक्स सहित)
ध्यान दें: सवारी से पहले कीमत तय कर लें और ऊंट को परेशान न करें।
33. पुष्कर मेले के बाज़ार कब लगते हैं?
मेले के पहले दिन से आखिरी दिन तक बाज़ार लगते हैं, लेकिन सबसे ज्यादा रौनक अंतिम 3-4 दिनों में होती है। बाज़ार सुबह 10 बजे से रात 10-11 बजे तक खुले रहते हैं। कुछ खास बातें:
रात के बाज़ार: देर रात तक चलते हैं, रोशनी, संगीत, खाने के स्टॉल
गली के किनारे विक्रेता: अधिकतर कैश लेते हैं, UPI सीमित है
मोल-भाव: आधी कीमत से बोली शुरू करें, 60-70% पर सौदा पक्का करें
34. क्या पुष्कर मेले के लिए कोई ऐप या वेबसाइट है?
हाँ, राजस्थान पर्यटन विभाग की वेबसाइट और मोबाइल ऐप “Rajasthan Tourism” पर मेले का शेड्यूल, नक्शा, आवास, और कार्यक्रम की जानकारी मिलती है। इसके अलावा:
Pushkar Mela आधिकारिक वेबसाइट: pushkarmela.rajasthan.gov.in
फेसबुक/इंस्टाग्राम: #PushkarMela, #PushkarFairCamel से ताज़ा तस्वीरें देख सकते हैं
स्थानीय ट्रैवल एजेंट: ज्यादातर होटल और कैंप बुकिंग उनके माध्यम से होती है
35. क्या पुष्कर मेले में बीमारी या चोट लगने पर डॉक्टर मिलते हैं?
हाँ, मेले में अस्थाई चिकित्सा शिविर लगाए जाते हैं:
सरकारी अस्थाई अस्पताल: 24 घंटे खुला, बुनियादी सुविधाएँ
निजी क्लीनिक: कुछ होटल और रिसॉर्ट अपने डॉक्टर रखते हैं
एंबुलेंस: 108 और 102 एंबुलेंस सेवाएँ उपलब्ध
बड़ी चोटों के लिए: निकटतम बड़ा अस्पताल अजमर में है (15 किमी)
अपनी ज़रूरी दवाइयाँ और प्राथमिक चिकित्सा किट ज़रूर ले जाएँ।
36. क्या पुष्कर मेले में व्हीलचेयर उपलब्ध है?
बहुत सीमित। कुछ बड़े होटल और कैंप व्हीलचेयर उपलब्ध करा सकते हैं, लेकिन मेले के मैदान में व्हीलचेयर किराए पर नहीं मिलती। मेले का मैदान रेतीला और असमतल है, इसलिए व्हीलचेयर पर चलना मुश्किल हो सकता है। बुजुर्ग या विकलांग यात्रियों के लिए यह मेला उपयुक्त नहीं है।
37. क्या पुष्कर मेले में शाकाहारी भोजन ही मिलता है?
हाँ, पुष्कर पूरी तरह से शाकाहारी शहर है। आपको कोई भी मांसाहारी व्यंजन (अंडा भी नहीं) मेले में नहीं मिलेगा। यह शहर का धार्मिक नियम है। मिलने वाला भोजन:
शुद्ध शाकाहारी राजस्थानी
गुजराती थाली (मीठा, दाल, बाजरे की रोटी)
दक्षिण भारतीय (डोसा, इडली, वड़ा)
चीनी और कॉन्टिनेंटल (वेज केवल)
पिज़्ज़ा, बर्गर (वेज)
कुछ कैफे विदेशी पर्यटकों के लिए शाकाहारी (vegan) और ग्लूटेन-फ्री विकल्प भी रखते हैं।
38. क्या पुष्कर मेले में मोबाइल नेटवर्क और चार्जिंग की सुविधा है?
मोबाइल नेटवर्क: Jio, Airtel, BSNL अच्छा काम करता है। Vi (Vodafone Idea) कभी-कभी कमजोर रहता है।
Wi-Fi: कुछ होटल और कैंप मुफ्त Wi-Fi देते हैं, लेकिन गति धीमी हो सकती है।
पावर बैंक: जरूर ले जाएँ – मेले के मैदान में कुछ चार्जिंग पॉइंट हैं, लेकिन लंबी कतार लगती है।
UPS/जनरेटर: अधिकतर होटलों में बिजली कटौती के लिए बैकअप है।
39. क्या पुष्कर मेले में सुरक्षा के लिए पुलिस तैनात रहती है?
हाँ, भारी सुरक्षा प्रबंध रहता है। राजस्थान पुलिस के अलावा:
पर्यटक पुलिस – विदेशी पर्यटकों की सहायता के लिए
महिला पुलिस – महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए
CCTV कैमरे – मेले के मुख्य स्थानों पर
लॉस्ट एंड फाउंड सेंटर – खोए हुए सामान या व्यक्तियों के लिए
फिर भी, अपने कीमती सामान (पासपोर्ट, पैसे) का ध्यान रखें और रात में अकेले न घूमें।
40. पुष्कर मेले के बाद क्या करें? (आसपास के आकर्षण)
मेले के बाद या एक्सट्रा दिन निकालकर यहाँ जाएँ:
| स्थान | दूरी (पुष्कर से) | विशेषता |
|---|---|---|
| अजमर | 15 किमी | अजमर शरीफ दरगाह (सूफी संत मोइनुद्दीन चिश्ती), आदि दिन का झील पैलेस |
| किशनगढ़ | 25 किमी | किशनगढ़ किला, फूल महल, और नीली पेंटिंग्स के लिए प्रसिद्ध |
| जयपुर | 135 किमी | हवा महल, आमेर किला, जंतर मंतर, सिटी पैलेस |
| ब्यावर | 60 किमी | संगमरमर की मूर्तियाँ और प्राचीन मंदिर |
| नागौर | 110 किमी | एक और बड़ा पशु मेला (जनवरी में) |