Diwali 2025

1. दिवाली (Diwali) क्योँ मनाते हैं ?

diwali

भारत एक ऐसा देश है जहाँ पर्वों और त्योहारों की एक लंबी और समृद्ध परंपरा रही है। इनमें से दीपावली, जिसे दिवाली या दीपोत्सव के नाम से भी जाना जाता है, सबसे महत्वपूर्ण, लोकप्रिय और प्रतीकात्मक त्योहारों में से एक है। यह केवल एक धार्मिक उत्सव मात्र नहीं है, बल्कि एक सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक घटना है जो पूरे देश को एक सूत्र में बाँधती है। “दीपावली” शब्द संस्कृत के दो शब्दों – ‘दीप’ (दीया) और ‘आवली’ (श्रृंखला) से मिलकर बना है, जिसका शाब्दिक अर्थ है “दीयों की पंक्ति” या “दीयों की कतार”। यह त्योहार अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान, बुराई पर अच्छाई और निराशा पर आशा की विजय का प्रतीक है।

Table of Contents

2. दिवाली (Diwali) का ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व

दिवाली (diwali) मनाने के पीछे कई ऐतिहासिक और पौराणिक कथाएँ जुड़ी हुई हैं, जो इसके सार्वभौमिक और बहुआयामी चरित्र को दर्शाती हैं।

(A) भगवान राम की अयोध्या वापसी

सबसे प्रसिद्ध और व्यापक रूप से मान्य कथा भगवान राम से जुड़ी है। रामायण के अनुसार, जब अयोध्या के राजकुमार राम ने 14 वर्ष के वनवास के बाद लंका के अत्याचारी राजा रावण का वध किया और सीता तथा लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे, तो अयोध्यावासियों ने उनके स्वागत में घी के दीये जलाकर पूरी नगरी को जगमगा दिया। उस दिन अमावस्या की रात थी, लेकिन दीयों की रोशनी से पूरा शहर दिन जैसा चमक रहा था। तब से, इस दिन को बुराई (रावण) पर अच्छाई (राम) की जीत के रूप में और प्रियजनों के घर लौटने के उल्लास के रूप में मनाया जाने लगा।

(B) भगवान कृष्ण द्वारा नरकासुर वध

एक अन्य महत्वपूर्ण कथा भगवान कृष्ण से संबंधित है। मान्यता है कि द्वापर युग में नरकासुर नाम का एक राक्षस था जिसने स्वर्ग लोक तक में आतंक मचा रखा था। उसने देवताओं से माता अदिति की बालियाँ तक छीन ली थीं। उसके अत्याचारों से त्रस्त प्रजा की प्रार्थना पर भगवान कृष्ण ने नरकासुर का वध किया। इससे पहले नरकासुर ने यह वरदान प्राप्त किया था कि उसकी मृत्यु केवल एक स्त्री के हाथों होगी, इसलिए भगवान कृष्ण ने सत्यभामा को अपना सारथी बनाया और उनकी सहायता से नरकासुर का वध किया। इस विजय के उपलक्ष्य में लोगों ने दीप जलाकर खुशियाँ मनाईं। 

(C) समुद्र मंथन और लक्ष्मी जी का प्राकट्य

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, दीपावली के दिन ही समुद्र मंथन के दौरान देवी लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था। इसलिए इस दिन उनकी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है ताकि वे अपने भक्तों पर धन-वैभव और समृद्धि की कृपा बनाए रखें।

(D) महावीर स्वामी का निर्वाण दिवस

जैन धर्म के अनुयायियों के लिए दीपावली का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि इसी दिन 527 ईसा पूर्व में जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी ने पावापुरी में मोक्ष (निर्वाण) प्राप्त किया था। उनके निर्वाण से आत्मा को अजर-अमर और अनंत शांति की प्राप्ति हुई। इस शुभ घटना की याद में जैन मंदिरों एवं घरों में दीपक जलाए जाते हैं।

(E) गुरु हरगोबिंद सिंह जी की रिहाई

सिख धर्म के इतिहास में भी दिवाली (Diwali) का एक विशेष स्थान है। सिखों के छठे गुरु, गुरु हरगोबिंद सिंह जी को मुगल बादशाह जहाँगीर ने ग्वालियर के किले में कैद कर रखा था। दीपावली के दिन ही वे 52 अन्य राजाओं के साथ कैद से मुक्त हुए थे। जब वे अमृतसर पहुँचे, तो वहाँ के लोगों ने उनके स्वागत में हज़ारों दीये जलाए। इस खुशी को मनाने के लिए सिख समुदाय के लोग गुरुद्वारों को दीयों से सजाते हैं और विशेष कीर्तन और प्रार्थनाएँ आयोजित करते हैं।

(F) सम्राट विक्रमादित्य का राज्याभिषेक

ऐतिहासिक रूप से, यह भी माना जाता है कि दिवाली (Diwali) के दिन ही महान हिंदू सम्राट विक्रमादित्य का राज्याभिषेक हुआ था। उनके शासनकाल को भारत के स्वर्णिम युग के रूप में जाना जाता है। इसलिए इस दिन को एक शुभ और ऐतिहासिक दिवस के रूप में भी याद किया जाता है।

3. दिवाली (Diwali) का पंचांग - पाँच दिवसीय उत्सव

 दिवाली (Diwali) का महत्व केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक भी है। यह लेख दीपावली के इतिहास, पौराणिक कथाओं, विभिन्न धर्मों में इसके महत्व, रीति-रिवाजों, अनुष्ठानों, सांस्कृतिक पहलुओं और आधुनिक संदर्भ में इसकी प्रासंगिकता पर एक विस्तृत दृष्टिकोण प्रस्तुत करेगा | दीपावली कोई एक दिन का त्योहार नहीं है, बल्कि यह पाँच दिनों तक चलने वाला एक महोत्सव है, जिसमें प्रत्येक दिन का अपना विशेष महत्व और रीति-रिवाज है।

(A) धनतेरस (धन्वंतरी त्रयोदशी)

दिवाली (Diwali)  उत्सव की शुरुआत धनतेरस से होती है। इस दिन को धन्वंतरी जयंती के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन समुद्र मंथन के दौरान आयुर्वेद के देवता धन्वंतरी अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसलिए इस दिन स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की जाती है।

  • महत्व: इस दिन नए बर्तन, सोना-चाँदी, जेवरात आदि खरीदना शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन खरीदारी करने से धन-संपदा में वृद्धि होती है।

  • रात्रि में रिवाज: रात में सोने से पहले एक दीया जलाकर दिशा (उत्तर) की ओर पैर करके सोने की परंपरा भी है ताकि अकाल मृत्यु से बचा जा सके।

(B) नरक चतुर्दशी / छोटी दीवाली (Diwali)

धनतेरस के अगले दिन नरक चतुर्दशी मनाई जाती है। इस दिन भगवान कृष्ण द्वारा नरकासुर के वध की कथा को याद किया जाता है।

  • महत्व: इस दिन सुबह जल्दी उठकर तेल की मालिश करके स्नान करने का विशेष महत्व है। इसे ‘अभ्यंग स्नान’ कहते हैं। मान्यता है कि इससे सारे पाप धुल जाते हैं और स्वास्थ्य लाभ होता है।

  • शाम के रिवाज: शाम को यम के लिए दीया जलाया जाता है और घर के मुख्य द्वार पर 13 दीये जलाए जाते हैं।

(C) लक्ष्मी पूजन / दिवाली (अमावस्या)

यह दिवाली (Diwali) उत्सव का मुख्य दिन है। इस दिन अमावस्या की घनी रात होती है, लेकिन दीयों की रोशनी से पूरा वातावरण जगमगा उठता है।

  • महत्व: इस दिन घर-घर में देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। लक्ष्मी जी धन और समृद्धि की देवी हैं और गणेश जी विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता हैं। दोनों की संयुक्त पूजा से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है।

  • पूजा विधि: शाम को शुभ मुहूर्त में परिवार के सभी सदस्य नए कपड़े पहनकर पूजा में शामिल होते हैं। घर के मुख्य द्वार और पूजा स्थल पर रंगोली बनाई जाती है। दीये जलाए जाते हैं। लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति की स्थापना करके विधि-विधान से पूजा की जाती है। पूजा के बाद आतिशबाजी की जाती है।

  • सामाजिक पहलू: इस दिन लोग एक-दूसरे के घर जाकर मिठाइयाँ बाँटते हैं और बधाई देते हैं।

(D) गोवर्धन पूजा / अन्नकूट / पड़वा

दिवाली (Diwali) के अगले दिन गोवर्धन पूजा का दिन होता है। यह पर्व भगवान कृष्ण की ब्रज भूमि में विशेष रूप से मनाया जाता है।

  • महत्व: इस दिन भगवान कृष्ण ने इंद्र के कोप से ब्रजवासियों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठा लिया था। तब से यह दिन गोवर्धन पूजा के रूप में मनाया जाता है।

  • रिवाज: इस दिन गाय-बैलों की पूजा की जाती है क्योंकि वे कृषि और समृद्धि का प्रतीक हैं। घरों में अन्नकूट बनाया जाता है, यानी विभिन्न प्रकार के अन्न और सब्जियों से बना एक विशेष भोग। इसे भगवान को चढ़ाया जाता है और फिर प्रसाद के रूप में बाँटा जाता है।

  • भाई दूज की शुरुआत: इस दिन को ‘पड़वा’ भी कहते हैं और कुछ regions में इसी दिन भाई-बहन के रिश्ते का त्योहार ‘भाई दूज’ भी मनाया जाता है।

(E) भाई दूज / यम द्वितीया

पंचांग के अनुसार, यह दिवाली (Diwali) उत्सव का अंतिम दिन होता है। यह भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को समर्पित है।

  • महत्व: इस दिन बहनें अपने भाइयों के लंबी उम्र और सुखी जीवन की कामना करती हैं। इसकी कथा यम (मृत्यु के देवता) और उनकी बहन यमुना से जुड़ी है। कहते हैं कि इस दिन यमुना ने यम को भोजन कराया था, जिससे प्रसन्न होकर यम ने उन्हें वरदान दिया था कि जो भाई इस दिन अपनी बहन के घर जाकर उसके हाथ का बना भोजन ग्रहण करेगा, उसकी आयु लंबी होगी।

  • रिवाज: इस दिन बहनें अपने भाई की आरती उतारती हैं, उनके माथे पर तिलक लगाती हैं और मिठाई खिलाती हैं। बदले में भाई अपनी बहन को उपहार देते हैं और उसकी रक्षा का वचन दोहराते हैं।

4. दिवाली (Diwali) मनाने की रीति-रिवाज और परंपराएँ

दिवाली (Diwali) की तैयारियाँ कई दिन पहले से ही शुरू हो जाती हैं। यह केवल पूजा-पाठ तक सीमित त्योहार नहीं है, बल्कि इसके साथ कई सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियाँ जुड़ी हैं।

(A) सफाई और सजावट

दिवाली (Diwali) से पहले घरों, दुकानों और कार्यालयों की पूरी तरह से सफाई की जाती है। इसे ‘दीपावली सफाई’ के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि साफ-सुथरे घर में ही देवी लक्ष्मी का वास होता है। सफाई के बाद घरों को रंगोली, फूलों, दीयों, लाइट्स और तोरणों से सजाया जाता है। दरवाज़े पर आम के पत्तों के बंदनवार लगाए जाते हैं।

(B) दीप जलाना

यह त्योहार का सबसे प्रमुख और प्रतीकात्मक रिवाज है। घर के मुख्य द्वार, छत, बालकनी, पूजा स्थल, कमरों आदि में तेल के दीये जलाए जाते हैं। आधुनिक समय में इलेक्ट्रिक लाइट्स का भी प्रचलन है, लेकिन मिट्टी के दीयों की महत्ता आज भी बरकरार है।

(C) रंगोली

रंगोली भारतीय संस्कृति की एक beautiful कला है जो दीपावली पर विशेष रूप से बनाई जाती है। चावल के आटे, रंगीन पाउडर, फूलों आदि से बनाई गई यह कलाकृति न केवल घर की शोभा बढ़ाती है बल्कि इसे शुभ और सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत भी माना जाता है।

(D) पूजा-अर्चना और आरती

लक्ष्मी-गणेश पूजन दीपावली की रात का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। पूजा में फूल, अक्षत, हल्दी, कुमकुम, धूप-दीप, नैवेद्य आदि चढ़ाए जाते हैं। पूजा के बाद आरती गाई जाती है और परिवार के सदस्य आतिशबाजी करते हैं।

(E) मिठाइयाँ और उपहार

दिवाली (Diwali) पर विभिन्न प्रकार की मिठाइयाँ बनाई और खरीदी जाती हैं। लोग एक-दूसरे के घर मिठाइयाँ, Dry Fruits और उपहार बाँटते हैं। यह प्यार और सौहार्द का प्रतीक है।

(F) नए वस्त्र और आभूषण

दिवाली (Diwali) पर नए कपड़े पहनने की परंपरा है। लोग खरीदारी करते हैं और त्योहार की रात नए कपड़े पहनकर पूजा में शामिल होते हैं। धनतेरस के दिन सोना-चाँदी खरीदने का भी रिवाज है।

(G) आतिशबाजी और पटाखे

पटाखे जलाना दीपावली (Diwali) का एक अभिन्न अंग रहा है। बच्चों और बड़ों सभी को आतिशबाजी का बेसब्री से इंतज़ार रहता है। हालाँकि, पर्यावरण प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के कारण आजकल इस परंपरा पर पुनर्विचार किया जा रहा है।

(H) जुआ खेलना

कुछ regions में दिवाली (Diwali) की रात जुआ खेलने की एक पुरानी परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन देवी पार्वती ने भगवान शिव के साथ पासे खेले थे और उन्होंने यह आशीर्वाद दिया था कि इस दिन जुआ खेलने वालों को दरिद्रता नहीं सताएगी। हालाँकि, यह एक हानिकारक प्रथा है और आधुनिक समय में इसकी आलोचना भी की जाती है।

5. भारत के विभिन्न क्षेत्रों में दिवाली (Diwali)

भारत की विविधता इसके त्योहारों में भी झलकती है। दीपावली को देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है।

 (A)  उत्तर भारत: यहाँ राम की अयोध्या वापसी की कथा के आधार पर त्योहार मनाया जाता है। घरों में लक्ष्मी-गणेश पूजन और आतिशबाजी का विशेष महत्व है।

 (B)  पश्चिम भारत (विशेषकर गुजरात और महाराष्ट्र): यहाँ दिवाली (Diwali) को धन की देवी लक्ष्मी के पूजन के रूप में मनाया जाता है। व्यापारी community इस दिन नए बही-खाते शुरू करते हैं। गुजरात में गरबा और डांडिया का आयोजन भी होता है।

 (C) पूर्वी भारत (विशेषकर पश्चिम बंगाल और ओडिशा): यहाँ दिवाली (Diwali) की रात काली पूजा के रूप में मनाई जाती है। मान्यता है कि इसी रात देवी काली का जन्म हुआ था। लोग देवी काली की मूर्ति की पूजा करते हैं और उनसे शक्ति और सुरक्षा की प्रार्थना करते हैं।

 (D) दक्षिण भारत: यहाँ दिवाली (Diwali) का स्वरूप थोड़ा अलग है। इस दिन लोग सुबह जल्दी तेल स्नान करते हैं। यहाँ नरक चतुर्दशी को बहुत महत्व दिया जाता है। कुछ क्षेत्रों में इसे भगवान कृष्ण के नरकासुर वध के उपलक्ष्य में मनाया जाता है तो कहीं इसे बाली की हार के दिन के रूप में देखा जाता है।

6. दिवाली (Diwali) का आर्थिक और सामाजिक महत्व

दिवाली (Diwali)  केवल एक धार्मिक त्योहार नहीं है, बल्कि इसका एक मजबूत आर्थिक पहलू भी है।

 (A) आर्थिक गतिविधि में वृद्धि: दीपावली से पहले बाजारों में खरीदारी का दौर शुरू हो जाता है। कपड़े, गहने, इलेक्ट्रॉनिक सामान, बर्तन, मिठाइयाँ, पटाखे आदि की बिक्री में भारी इजाफा होता है। इससे retail और manufacturing sector को बहुत बढ़ावा मिलता है।

 (B) नए व्यवसाय की शुरुआत: दीपावली को व्यापारिक नजरिए से बहुत शुभ माना जाता है। कई दुकानदार और व्यापारी इस दिन नए बही-खाते शुरू करते हैं। ‘चोपड़ा पूजन’ की परंपरा है जहाँ व्यापारी अपने लेखा-जोखा के बही-खातों की पूजा करते हैं।

 (C) सामाजिक समरसता: यह त्योहार सामाजिक एकता को मजबूत करता है। लोग एक-दूसरे के घर जाते हैं, मिठाइयाँ बाँटते हैं, गले मिलते हैं और पुराने गिले-शिकवे भुलाकर नए सिरे से रिश्तों की शुरुआत करते हैं।

 (D) घरेलू उद्योग को बढ़ावा: मिट्टी के दीये, रंगोली के colors, मोमबत्तियाँ, लाइट्स, पटाखे आदि बनाने वाले छोटे और कुटीर उद्योगों को इस मौसम में अच्छी कमाई होती है।

7. आधुनिक संदर्भ में दिवाली (Diwali) : चुनौतियाँ और जिम्मेदारी

परंपरा और आधुनिकता के बीच दीपावली ने भी एक नया रूप ले लिया है, साथ ही कुछ चुनौतियाँ भी सामने आई हैं।

 (A) पर्यावरण प्रदूषण: पटाखों से निकलने वाला धुआँ वायु प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण का एक बहुत बड़ा कारण बनता है। इससे सांस की बीमारियाँ, अस्थमा के मरीजों को तकलीफ और पशु-पक्षियों पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

 (B) स्वास्थ्य पर प्रभाव: तेज आवाज़ के पटाखों से बुजुर्गों, बीमार लोगों और पालतू जानवरों में तनाव और डर पैदा होता है।

 (C) अत्यधिक खर्च और दिखावा: आजकल दीपावली मनाने में competition और दिखावे की culture ने एक अलग ही रूप ले लिया है। महंगे उपहार, costly parties और फिजूलखर्ची के चलन ने त्योहार की सादगी और आध्यात्मिकता को कुछ हद तक प्रभावित किया है।

 (D) सुरक्षा संबंधी चिंताएँ: नकली मिठाइयाँ और घटिया quality के पटाखों से दुर्घटनाएँ होने का खतरा बना रहता है।

जिम्मेदारीपूर्ण उत्सव:
इन चुनौतियों के मद्देनजर, एक “Green Diwali” या “प्रदूषण मुक्त दीपावली” मनाने पर जोर दिया जा रहा है।

 (A) प्राकृतिक दीये और सजावट: मिट्टी के दीये और प्राकृतिक flowers की सजावट को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

 (B) पटाखों से परहेज: कम से कम पटाखे जलाने या बिल्कुल न जलाने की सलाह दी जाती है। अगर जलाएँ भी तो Green Crackers का इस्तेमाल करें।

 (C) स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता: स्थानीय रूप से बनी मिठाइयाँ और उत्पाद खरीदकर हम छोटे उद्योगों का समर्थन कर सकते हैं।

 (D) जरूरतमंदों की मदद: त्योहार की खुशी को जरूरतमंदों के साथ बाँटना चाहिए। उन्हें कपड़े, मिठाइयाँ या अन्य जरूरी सामान दान करना त्योहार का सही अर्थ है।

8. वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण

दिवाली (Diwali) का महत्व केवल धार्मिक ही नहीं है, बल्कि इसके पीछे कुछ वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक कारण भी छिपे हैं।

 (A) सफाई और स्वच्छता: दीपावली से पहले की जाने वाली सफाई से घर और आस-पास का वातावरण स्वच्छ होता है, जिससे मच्छर और कीटाणु पनप नहीं पाते और बीमारियाँ फैलने का खतरा कम हो जाता है।

 (B) तेल स्नान और स्वास्थ्य: नरक चतुर्दशी पर तेल की मालिश और स्नान करने से त्वचा स्वस्थ रहती है और शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है। सर्दियों की शुरुआत में यह शरीर के लिए बहुत लाभदायक है।

 (C) मनोवैज्ञानिक प्रभाव: दीयों की रोशनी और रंग-बिरंगी रंगोली से घर का माहौल खुशनुमा और सकारात्मक हो जाता है। यह मन से नकारात्मक विचारों को दूर करता है और उत्साह और उमंग भरता है।

 (D) पारिवारिक एकता: यह त्योहार परिवार के सदस्यों को एक साथ लाता है। साथ मिलकर पूजा करना, मिठाइयाँ बाँटना और समय बिताना पारिवारिक रिश्तों को मजबूत करता है।

9. निष्कर्ष

दिवाली (Diwali) प्रकाश का त्योहार है, जो हमें अंधेरे से लड़ने और अपने अंदर की सकारात्मक ऊर्जा को जगाने की प्रेरणा देता है। यह हमें सिखाता है कि बुराई चाहे कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंत में सत्य और धर्म की ही जीत होती है। यह त्योहार हमें एक-दूसरे के करीब लाता है, पुराने विवादों को भुलाकर नई शुरुआत करने का संदेश देता है।

आज के दौर में, जहाँ तनाव और नकारात्मकता हमारे जीवन का हिस्सा बनती जा रही है, दीपावली का संदेश और भी प्रासंगिक हो जाता है। हमें चाहिए कि हम इस त्योहार की गहरी spiritual और सामाजिक भावना को समझें और इसे भौतिकवाद और दिखावे से ऊपर उठाकर मनाएँ। आइए, इस दीपावली मैं और आप मिलकर  न सिर्फ अपने घरों को, बल्कि अपने दिलों को भी प्रकाशित करें। अंधकार पर प्रकाश की, घृणा पर प्रेम की, और अज्ञान पर ज्ञान की इसी विजय का नाम है – दीपावली।

शुभ दीपावली!

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