Dussehra 2025

1. दशहरा (Dussehra) क्योँ मनाते हैं ?

DUSSEHRA

भारत अपनी संस्कृति, सभ्यता और धार्मिक विविधताओं के कारण विश्व में विशिष्ट स्थान रखता है। यहां वर्षभर अनेक पर्व और त्योहार मनाए जाते हैं, जिनमें प्रत्येक त्योहार का अपना धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व है। इन्हीं प्रमुख त्योहारों में से एक है दशहरा (Dussehra), जिसे विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है।

Table of Contents

दशहरा (Dussehra) अच्छाई की बुराई पर विजय का प्रतीक है। यह पर्व न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है बल्कि यह समाज में नैतिकता, आदर्श और सत्य के पालन का संदेश भी देता है। इस दिन दो प्रमुख पौराणिक घटनाओं का स्मरण किया जाता है—

  1. भगवान श्रीराम द्वारा रावण का वध।
  2. माता दुर्गा द्वारा महिषासुर का संहार।

नवरात्रि के नौ दिन माता दुर्गा की पूजा-अर्चना की जाती है, और दसवें दिन विजयादशमी के रूप में विजय का उत्सव मनाया जाता है। इस पर्व का संदेश है कि चाहे बुराई कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंततः धर्म और सत्य की ही विजय होती है।

इस विस्तृत लेख में मैं और आप दशहरा के  इतिहास, धार्मिक कथाएं, इसे मनाने की परंपराएं, सांस्कृतिक महत्व, सामाजिक प्रभाव और आधुनिक युग में इसकी प्रासंगिकता जैसे सभी पहलुओं पर गहराई से चर्चा करेंगे।

2. दशहरा (Dussehra) का अर्थ और व्युत्पत्ति

दशहरा (Dussehra) शब्द संस्कृत भाषा के दो शब्दों से मिलकर बना है—”दश” और “हारा”।

  • “दश” का अर्थ है दस
  • “हारा” का अर्थ है हारना या नष्ट होना

इस प्रकार दशहरा का अर्थ हुआ—”दस का हारना” या “दस सिर वाले रावण का नाश होना”। इसे विजयादशमी भी कहा जाता है।

  • “विजय” का अर्थ है विजय प्राप्त करना
  • “दशमी” का अर्थ है हिंदू पंचांग के अनुसार शुक्ल पक्ष की दसवीं तिथि

इस दिन भगवान श्रीराम ने असत्य, अन्याय और अधर्म के प्रतीक रावण का वध किया था, इसलिए यह दिन विजय का प्रतीक माना जाता है।

3. दशहरा (Dussehra) का इतिहास और उत्पत्ति

दशहरा की उत्पत्ति के पीछे कई पौराणिक और ऐतिहासिक कारण माने जाते हैं।

(A) त्रेता युग की घटना – रामायण से जुड़ी कथा

रामायण के अनुसार, त्रेता युग में राक्षसराज रावण ने अपनी तपस्या और बल से अत्यधिक शक्तियां प्राप्त कर ली थीं। वह अहंकारी और अत्याचारी बन गया था।

  • रावण ने माता सीता का हरण करके उन्हें लंका ले गया।
  • भगवान श्रीराम ने हनुमान, लक्ष्मण और वानर सेना की सहायता से सीता माता को वापस लाने का संकल्प लिया।
  • युद्ध से पूर्व श्रीराम ने माता दुर्गा की आराधना की।
  • नौ दिनों तक भीषण युद्ध के बाद दशमी तिथि को भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया।

इस घटना के स्मरण में दशहरा मनाया जाता है। यह बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।

(B) महिषासुर वध – दुर्गा सप्तशती की कथा

दूसरी कथा माता दुर्गा और महिषासुर से जुड़ी है।

  • महिषासुर नामक राक्षस ने भगवान ब्रह्मा से वरदान प्राप्त किया था कि कोई पुरुष उसका वध नहीं कर सकेगा।
  • इस वरदान के बल पर वह अत्याचारी बन गया और उसने स्वर्गलोक तक पर कब्जा कर लिया।
  • सभी देवताओं ने अपनी शक्तियां मिलाकर माता दुर्गा को उत्पन्न किया।
  • माता दुर्गा ने नौ रातों तक महिषासुर से युद्ध किया और दशमी तिथि को उसका वध किया।

इसलिए इस दिन को विजयादशमी कहा जाता है।

4. दशहरा (Dussehra) का धार्मिक महत्व

  1. सत्य और धर्म की विजय का प्रतीक: दशहरा हमें यह संदेश देता है कि चाहे असत्य और अधर्म कितने भी बलवान क्यों न हों, अंततः सत्य और धर्म की ही विजय होती है।
  2. नवरात्रि का समापन: यह पर्व नवरात्रि के नौ दिनों की पूजा-अर्चना का अंतिम दिन है।
  3. माता दुर्गा और भगवान श्रीराम की पूजा: इस दिन विशेष रूप से माता दुर्गा और भगवान श्रीराम की आराधना की जाती है।
  4. नए कार्यों की शुरुआत का शुभ दिन: दशहरा को शुभ मुहूर्त माना जाता है। व्यापारी इस दिन नए खातों की शुरुआत करते हैं।

5. दशहरा (Dussehra) मनाने की परंपराएं और विधियां

(A) रामलीला का आयोजन

  • दशहरे से पूर्व नौ दिनों तक रामलीला का आयोजन किया जाता है।
  • इसमें श्रीराम के जीवन की घटनाओं का मंचन किया जाता है।
  • अंतिम दिन रावण, मेघनाद और कुम्भकर्ण का वध दिखाया जाता है।

(B) रावण दहन

  • दशहरे की सबसे प्रमुख परंपरा है रावण दहन
  • विशाल मैदानों में हजारों लोग एकत्रित होकर रावण, मेघनाद और कुम्भकर्ण के पुतलों को जलाते हैं।
  • यह बुराई के नाश का प्रतीक है।

(C) शस्त्र पूजन

  • महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य प्रदेश में दशहरे के दिन शस्त्र पूजन की परंपरा है।
  • इसे आयुध पूजन भी कहा जाता है।
  • लोग अपने हथियारों, औजारों और वाहनों की पूजा करते हैं।

(D) सोना-खरी परंपरा

  • महाराष्ट्र में दशहरे के दिन लोग आम के पत्तों या सोना-खरी का आदान-प्रदान करते हैं।
  • यह समृद्धि और शुभता का प्रतीक है।

(E) दुर्गा विसर्जन

  • पश्चिम बंगाल और असम में दशहरा दुर्गा पूजा का अंतिम दिन होता है।
  • इस दिन माता दुर्गा की प्रतिमाओं का भव्य जल विसर्जन किया जाता है।

6. दशहरा (Dussehra) के क्षेत्रीय स्वरूप

(A) उत्तर भारत

  • अयोध्या, वाराणसी, दिल्ली आदि स्थानों पर विशाल रामलीला और रावण दहन का आयोजन होता है।
  • अयोध्या में भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े स्थानों पर विशेष पूजा होती है।

(B) पश्चिम बंगाल

  • यहां दशहरा दुर्गा पूजा का अंतिम दिन है।
  • दुर्गा प्रतिमाओं का जल विसर्जन “बिजया दशमी” के रूप में किया जाता है।

(C) महाराष्ट्र और गुजरात

  • यहां शस्त्र पूजन और सोना-खरी की परंपरा विशेष प्रसिद्ध है।
  • लोग एक-दूसरे को आम के पत्ते देकर शुभकामनाएं देते हैं।

(D) दक्षिण भारत

  • कर्नाटक का मैसूर दशहरा विश्व प्रसिद्ध है।
  • मैसूर पैलेस को विशेष रूप से सजाया जाता है और भव्य जुलूस निकाला जाता है।

7. दशहरा (Dussehra) और नवरात्रि का संबंध

  • नवरात्रि के नौ दिनों तक माता दुर्गा की पूजा की जाती है।
  • दसवें दिन विजयादशमी को विजय का उत्सव मनाया जाता है।
  • यह पर्व शक्ति और भक्ति दोनों का संगम है।

8. दशहरा (Dussehra) से मिलने वाले संदेश

  1. सत्य और धर्म की विजय: यह त्योहार हमें सिखाता है कि सत्य का मार्ग कठिन हो सकता है, लेकिन उसकी विजय निश्चित है।
  2. अहंकार का नाश: रावण का वध इस बात का प्रतीक है कि अहंकार और घमंड का परिणाम विनाश होता है।
  3. नारी शक्ति का सम्मान: माता दुर्गा के महिषासुर वध से हमें नारी शक्ति की महिमा का बोध होता है।
  4. सामाजिक एकता: यह त्योहार विभिन्न समुदायों को एकजुट करता है।

9. दशहरा (Dussehra) और आध्यात्मिकता

दशहरा केवल बाहरी उत्सव नहीं है, बल्कि यह हमें आंतरिक बुराइयों को समाप्त करने का संदेश भी देता है।

  • हमारे भीतर भी “रावण” जैसे दस दोष होते हैं –
  1. क्रोध
  2. लोभ
  3. मोह
  4. अहंकार
  5. आलस्य
  6. ईर्ष्या
  7. कामवासना
  8. लालच
  9. असत्य
  10. हिंसा
  • दशहरे पर हमें इन दोषों का “दहन” करना चाहिए।

10. दशहरा (Dussehra) का सामाजिक महत्व

  1. सामूहिकता का विकास:
  • इस पर्व पर लोग एक साथ एकत्रित होकर उत्सव मनाते हैं।
  • यह समाज में एकता और भाईचारे की भावना को मजबूत करता है।
  1. सांस्कृतिक संरक्षण:
  • रामलीला, नृत्य, नाटक आदि कार्यक्रम हमारी सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित रखते हैं।
  1. नैतिक शिक्षा:
  • यह त्योहार सिखाता है कि हमें बुराइयों का त्याग करके अच्छाई को अपनाना चाहिए।

11. आधुनिक युग में दशहरा (Dussehra) की प्रासंगिकता

आज के समय में दशहरा केवल धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह सामाजिक बुराइयों के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक बन गया है।

  • भ्रष्टाचार, नशाखोरी, असमानता और हिंसा जैसे आधुनिक “रावण” को खत्म करना आवश्यक है।
  • हमें अपने भीतर की बुराइयों को पहचानकर उनका अंत करना चाहिए।
  • रावण दहन केवल प्रतीकात्मक न होकर हमारे आचरण में भी परिवर्तन लाना चाहिए।

12. दशहरा (Dussehra) और आर्थिक प्रभाव

  • दशहरा भारत में व्यापारिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
  • इस दिन वाहन, सोना-चांदी, कपड़े आदि की खरीदारी शुभ मानी जाती है।
  • बाजारों में विशेष रौनक रहती है।

13. पर्यावरण संरक्षण और दशहरा (Dussehra)

हाल के वर्षों में रावण दहन से होने वाले प्रदूषण को देखते हुए कई स्थानों पर पर्यावरण-अनुकूल दशहरा मनाया जाता है।

  • पुतलों में बायोडिग्रेडेबल सामग्री का उपयोग।
  • कम धुएं और प्रदूषण वाले आतिशबाजियों का प्रयोग।
  • वृक्षारोपण अभियान।

14. निष्कर्ष

दशहरा भारतीय संस्कृति का एक जीवंत और प्रेरणादायक पर्व है। यह न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह हमें जीवन में सत्य, धर्म, नारी शक्ति के सम्मान और अहंकार के त्याग का संदेश देता है।

यदि हम दशहरे का वास्तविक अर्थ समझें और अपने जीवन में अपनाएं, तो समाज से कई बुराइयां समाप्त हो सकती हैं।

  • बाहरी रावण का दहन केवल एक परंपरा है,
  • लेकिन वास्तविक दशहरा तभी होगा जब हम अपने भीतर के रावण को समाप्त करेंगे।

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