GST Update

1. GST क्या है?

gst

GST (Goods and Services Tax) का अर्थ है वस्तु एवं सेवा कर। यह एक अप्रत्यक्ष कर (Indirect Tax) है जिसे भारत में 1 जुलाई 2017 से लागू किया गया। इससे पहले, भारत में वस्तुओं और सेवाओं पर अलग-अलग कई कर लगते थे, जैसे:

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  • केंद्रीय कर (Central Taxes) — केंद्रीय उत्पाद शुल्क (Excise Duty), सेवा कर (Service Tax), कस्टम ड्यूटी (Customs Duty) आदि।
  • राज्य कर (State Taxes) — वैट (VAT), एंट्री टैक्स (Entry Tax), ऑक्ट्रॉई (Octroi), मनोरंजन कर (Entertainment Tax) आदि।

इन सभी करों के कारण:

  1. डबल टैक्सेशन (Double Taxation) — एक ही उत्पाद/सेवा पर कई बार कर लगता था।
  2. जटिल प्रणाली — अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग कानून और दरें थीं।
  3. व्यापार में कठिनाई — कारोबारियों को हर राज्य के अलग नियमों का पालन करना पड़ता था।

GST इन सभी समस्याओं का समाधान है। इसका मुख्य उद्देश्य है “One Nation, One Tax, One Market” यानी पूरे भारत में एक समान कर व्यवस्था लागू करना।

2. GST लागू करने का उद्देश्य

GST लागू करने के पीछे सरकार के मुख्य उद्देश्य थे:

(A) कर प्रणाली को सरल बनाना

पहले कई तरह के कर थे। GST ने सभी को एक कर में मिला दिया, जिससे व्यापारी और उपभोक्ता दोनों को सुविधा हुई।

(B) करों में पारदर्शिता लाना

GST पूरी तरह से ऑनलाइन और टेक्नोलॉजी-आधारित प्रणाली है। इसमें हर इनवॉइस, रिटर्न और टैक्स पेमेंट का डेटा रियल टाइम में रिकॉर्ड होता है। इससे कर चोरी (Tax Evasion) की संभावना कम हो गई।

(C) डबल टैक्सेशन खत्म करना

पहले उत्पाद पर हर स्टेज में नया टैक्स लगता था। GST में Input Tax Credit (ITC) की सुविधा है, जिससे व्यापारी पिछले स्टेज में दिए गए टैक्स को समायोजित कर सकते हैं।

उदाहरण:

  • यदि एक निर्माता (Manufacturer) ने कच्चा माल खरीदा और उस पर ₹5000 GST दिया।
  • फिर उसने तैयार उत्पाद बेचा और उस पर ₹8000 GST चार्ज किया।
  • तो उसे सरकार को केवल ₹3000 (8000 – 5000) ही जमा करना होगा।

(D) पूरे भारत में समान बाजार बनाना

GST ने राज्यों के बीच कर की दीवारें हटा दीं। अब पूरे भारत में एक ही दर लागू होती है। इससे व्यापार बढ़ा और ई-कॉमर्स जैसे उद्योगों को विशेष लाभ मिला।

(E) कर संग्रह बढ़ाना

पारदर्शी प्रणाली होने के कारण सरकार का राजस्व बढ़ा और काला धन कम हुआ।

3. GST की मुख्य विशेषताएँ

  1. एकीकृत कर प्रणाली — सभी पुराने कर समाप्त करके एक ही कर।
  2. ऑनलाइन पोर्टल — पंजीकरण, रिटर्न फाइलिंग, भुगतान सब कुछ डिजिटल।
  3. चार-स्तरीय दरें (Slabs) — 0%, 5%, 12%, 18%, 28%।
  4. ITC की सुविधा — कर का समायोजन संभव।
  5. सप्लाई पर आधारित कर — GST उत्पादन (Production) पर नहीं बल्कि सप्लाई (Supply) पर लगता है।
  6. राज्य और केंद्र दोनों की भागीदारी — CGST, SGST, IGST के रूप में।

4. 2025 तक GST की स्थिति

2025 में GST भारत की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।

  • सरकार ने e-invoicing को कई व्यवसायों के लिए अनिवार्य कर दिया है।
  • GSTR-3B के कुछ भाग non-editable कर दिए गए हैं, जिससे डेटा में पारदर्शिता बनी रहे।
  • Amnesty Scheme (Section 128A) के माध्यम से पुराने टैक्स विवादों का समाधान किया जा रहा है।
  • कई वस्तुओं और सेवाओं के GST रेट को सरलीकृत किया गया है।

5. GST का इतिहास और विकास

(A) प्रारंभिक विचार (2000-2006)

  • 2000: प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने जीएसटी की अवधारणा प्रस्तुत की।
  • 2003: विजय केलकर समिति (Vijay Kelkar Committee) ने जीएसटी पर अपनी रिपोर्ट दी।
  • 2006: वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने 2010 तक जीएसटी लागू करने की घोषणा की, लेकिन राज्यों के विरोध के कारण यह संभव नहीं हो पाया।

(B) 2011-2016: कानूनी प्रक्रिया

  • 2011: संविधान संशोधन विधेयक (Constitution Amendment Bill) संसद में पेश किया गया।
  • 2014: NDA सरकार ने संशोधित बिल पेश किया।
  • 2016: 122वां संविधान संशोधन बिल लोकसभा और राज्यसभा दोनों में पारित हुआ।
  • इस संशोधन से जीएसटी लागू करने का मार्ग प्रशस्त हुआ।
  • जीएसटी Council की स्थापना की गई, जिसमें केंद्र और राज्यों के प्रतिनिधि शामिल हैं।

(C) 2017: जीएसटी का शुभारंभ

  • 1 जुलाई 2017 को मध्यरात्रि में संसद के सेंट्रल हॉल में विशेष समारोह में जीएसटी लागू किया गया।
  • यह समारोह भारत के “आर्थिक स्वतंत्रता दिवस” के रूप में याद किया जाता है।
  • प्रारंभ में ही जीएसटी में चार प्रमुख स्लैब तय किए गए थे — 5%, 12%, 18%, 28%।

(D) 2018-2020: शुरुआती चुनौतियाँ और सुधार

  • 2018: कई छोटे व्यवसायों के लिए कंपोज़िशन स्कीम में राहत दी गई।
  • 2019: ई-कॉमर्स नियमों में बदलाव।
  • 2020: कोरोना महामारी के दौरान टैक्स कलेक्शन में गिरावट, सरकार ने कई छूटें दीं।

(E) 2021-2023: डिजिटल सुधार

  • e-invoicing प्रणाली लागू हुई।
  • QRMP स्कीम (Quarterly Return Monthly Payment) लागू हुई ताकि छोटे करदाताओं को सुविधा मिल सके।
  • GSTR-2B जैसी नई स्टेटमेंट्स लाईं गईं।

(F) 2024-2025: नवीनतम बदलाव

  • जुलाई 2025 से GSTR-3B के auto-populated हिस्से को non-editable किया गया।
  • बड़े व्यवसायों के लिए e-invoice रिपोर्टिंग 30 दिन के भीतर करना अनिवार्य।
  • जीएसटी रेट्स में सरलीकरण, कुछ वस्तुओं पर कर कम किए गए।
  • पुराने विवादों के लिए Amnesty Scheme (Section 128A) लागू की गई।

6. जीएसटी की संरचना (Structure of GST)

जीएसटी भारत में एक द्वि-स्तरीय कर प्रणाली (Dual GST Model) है। इसमें केंद्र और राज्य दोनों को कर लगाने और संग्रह करने का अधिकार है। GST को तीन मुख्य हिस्सों में विभाजित किया गया है:

(A) CGST (Central Goods and Services Tax)

  • परिभाषा: यह कर केंद्र सरकार द्वारा वसूला जाता है।
  • यह Intra-State Supplies (एक ही राज्य के भीतर माल/सेवा की सप्लाई) पर लगता है।
  • CGST से प्राप्त राजस्व केंद्र सरकार के पास जाता है।

उदाहरण:

  • यदि दिल्ली में कोई व्यापारी दिल्ली के ही ग्राहक को माल बेचता है,
  • मान लें उत्पाद की कीमत ₹10,000 और GST दर 18% है।
  • तो GST = ₹1800 (900 CGST + 900 SGST)।
  • यहाँ ₹900 केंद्र सरकार को CGST के रूप में मिलेगा।

(B) SGST (State Goods and Services Tax)

  • परिभाषा: यह कर राज्य सरकार द्वारा वसूला जाता है।
  • यह भी Intra-State Supplies पर लगता है।
  • SGST से प्राप्त राजस्व संबंधित राज्य सरकार के पास जाता है।

उदाहरण: ऊपर दिए गए उदाहरण में ₹900 SGST दिल्ली सरकार के खाते में जाएगा।

(C) IGST (Integrated Goods and Services Tax)

  • परिभाषा: यह कर Inter-State Supplies (राज्य से बाहर सप्लाई) पर लगता है।
  • इसे केंद्र सरकार वसूलती है और बाद में संबंधित राज्य को हिस्सा भेजती है।
  • e-commerce लेन-देन पर भी IGST लागू होता है।

उदाहरण:

  • यदि दिल्ली का व्यापारी महाराष्ट्र के ग्राहक को ₹10,000 का सामान बेचता है और दर 18% है।
  • तो पूरा ₹1800 IGST लगेगा।
  • यह राशि पहले केंद्र सरकार के पास जाएगी, फिर राज्य सरकारों के बीच बंटेगी।

(D) UTGST (Union Territory GST)

  • यह Union Territories (जैसे अंडमान-निकोबार, लक्षद्वीप, दमन-दीव आदि) में लागू होता है।
  • यह SGST जैसा ही होता है लेकिन UT क्षेत्रों के लिए।

(E) सप्लाई का प्रकार — Intra vs Inter-State

मानदंड

Intra-State (एक राज्य के भीतर)

Inter-State (राज्य से बाहर)

लागू कर

CGST + SGST

IGST

राजस्व किसके पास

केंद्र + संबंधित राज्य

केंद्र (बाद में वितरण)

उदाहरण

दिल्ली से दिल्ली सप्लाई

दिल्ली से मुंबई सप्लाई

(F) जीएसटी काउंसिल (GST Council)

जीएसटी की पूरी नीति और निर्णय जीएसटी Council द्वारा लिए जाते हैं। इसमें शामिल होते हैं:

  • केंद्रीय वित्त मंत्री — अध्यक्ष (Chairperson)।
  • सभी राज्यों के वित्त मंत्री
  • निर्णय लेने की प्रक्रिया:
  • 75% बहुमत से निर्णय पारित होते हैं।
  • केंद्र का 33% वोट, राज्यों का 66% वोट होता है।

कार्य:

  • कर दरें तय करना।
  • नियमों और प्रक्रियाओं में बदलाव करना।
  • तकनीकी सुधारों पर निर्णय लेना।
  • विवादों का समाधान करना।

(G) उदाहरण से समझें

मान लीजिए:

  • A Ltd. (दिल्ली) → दिल्ली के ग्राहक को ₹50,000 का सामान बेचती है।
  • जीएसटी दर: 18%

गणना:

  • जीएसटी = 50,000 × 18% = ₹9,000
  • CGST = 4,500
  • SGST = 4,500

दूसरी ओर, यदि A Ltd. (दिल्ली) → मुंबई के ग्राहक को सप्लाई करती है:

  • पूरा जीएसटी = ₹9,000 IGST के रूप में।
  • यह केंद्र सरकार द्वारा वसूला जाएगा और बाद में संबंधित राज्यों में बाँटा जाएगा।

(H) जीएसटी के तहत शामिल और बाहर सेवाएँ

(a) शामिल सेवाएँ:

  • वस्तुएँ और अधिकांश सेवाएँ जैसे रिटेल, ई-कॉमर्स, मैन्युफैक्चरिंग, होटल्स, आदि।

(b) बाहर सेवाएँ:

  • Alcohol for human consumption (शराब)।
  • Petroleum products (वर्तमान में जीएसटी के दायरे में नहीं)।
  • Stamp Duty और बिजली आदि।

7. GST कर दरें (Tax Slabs)

GST को विभिन्न स्लैब्स (Slabs) में विभाजित किया गया है ताकि अलग-अलग वस्तुओं और सेवाओं पर अलग दरें लागू हो सकें।

(A) वर्तमान जीएसटी स्लैब (2025 तक)

GST दर

उदाहरण वस्तुएँ/सेवाएँ

0% (मुक्त)

दूध, सब्जियाँ, अनाज, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएँ

5%

ट्रेन टिकट, हाउसहोल्ड जरूरी सामान, कुछ खाने-पीने की चीजें

12%

कंप्यूटर, मोबाइल, प्रोसेस्ड फूड, होटल रूम (₹1000-₹7500)

18%

अधिकांश वस्तुएँ और सेवाएँ — FMCG प्रोडक्ट्स, रेस्तरां सेवाएँ

28%

लग्ज़री सामान जैसे कार, एयर कंडीशनर, पेंट, तंबाकू आदि

(B) 0% जीएसटी — छूट प्राप्त वस्तुएँ और सेवाएँ

  • अनाज, ताजा दूध, फल, सब्जियाँ।
  • अस्पताल सेवाएँ।
  • स्कूल शिक्षा।
  • कुछ सरकारी सेवाएँ।

उद्देश्य: गरीब और मध्यम वर्ग को राहत देना।

(C) 5% जीएसटी — आवश्यक वस्तुएँ

  • पैकेज्ड फूड।
  • रेलवे टिकट (AC क्लास को छोड़कर)।
  • LPG सिलेंडर।
  • दवाइयाँ।

(D) 12% जीएसटी

  • रेडीमेड कपड़े।
  • कंप्यूटर और मोबाइल फोन।
  • प्रोसेस्ड फूड।
  • होटल रूम (₹1000 से ₹7500 तक)।

(E) 18% जीएसटी — स्टैंडर्ड स्लैब

यह सबसे आम स्लैब है और अधिकांश वस्तुएँ व सेवाएँ इसी में आती हैं। उदाहरण:

  • FMCG प्रोडक्ट्स।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स (टीवी, वॉशिंग मशीन)।
  • इंटरनेट सेवाएँ।
  • रेस्तरां (Non-AC)।

(F) 28% जीएसटी — लग्ज़री और हानिकारक वस्तुएँ

  • लग्ज़री कारें।
  • सिगरेट, तंबाकू।
  • एयर कंडीशनर, पेंट।
  • होटल रूम (₹7500 से अधिक)।

(G) नवीनतम बदलाव (2025 तक)

  • सितंबर 2025 में जीएसटी दरों में सरलीकरण किया गया।
  • कुछ वस्तुओं पर कर कम किए गए, विशेष रूप से छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए।
  • यह बदलाव 22 सितंबर 2025 से प्रभावी हुए।

(H) विशेष Cess

कुछ वस्तुओं पर अतिरिक्त Cess (जैसे Compensation Cess) लगाया जाता है। यह मुख्य रूप से लग्ज़री और हानिकारक वस्तुओं जैसे कार, तंबाकू पर लागू होता है। इससे प्राप्त राजस्व राज्यों के राजस्व हानि की भरपाई के लिए उपयोग होता है।

8. GST पंजीकरण (Registration Process)

(A) जीएसटी पंजीकरण क्या है?

जीएसटी पंजीकरण का मतलब है किसी भी व्यापारी, सेवा प्रदाता या व्यवसायी को जीएसटी प्रणाली में आधिकारिक रूप से शामिल करना। पंजीकरण के बाद व्यवसाय को GSTIN (Goods and Services Tax Identification Number) प्रदान किया जाता है।

  • यह 15 अंकों का विशिष्ट नंबर होता है।
  • इसे हर इनवॉइस, रिटर्न और सरकारी दस्तावेज़ पर उल्लेख करना अनिवार्य है।

(B) किसे जीएसटी पंजीकरण कराना आवश्यक है?

नीचे दिए गए व्यक्तियों/संस्थाओं को पंजीकरण कराना अनिवार्य है:

श्रेणी

पंजीकरण अनिवार्यता का कारण

टर्नओवर सीमा पार करने वाले

वस्तुओं के लिए ₹40 लाख (कुछ राज्यों में ₹20 लाख) और सेवाओं के लिए ₹20 लाख (विशेष राज्यों में ₹10 लाख)।

Inter-State सप्लाई करने वाले

राज्य से बाहर माल/सेवा सप्लाई करने वाले व्यापारी।

ई-कॉमर्स ऑपरेटर

Amazon, Flipkart जैसे प्लेटफ़ॉर्म पर विक्रेता।

Reverse Charge Mechanism वाले

RCM के तहत टैक्स भुगतान करने वाले।

Casual taxable person

मेले या अस्थायी व्यापार करने वाले व्यक्ति।

Non-Resident taxable person

भारत में अस्थायी व्यापार करने वाले विदेशी व्यक्ति।

(C) पंजीकरण के प्रकार

  1. नॉर्मल पंजीकरण (Normal Registration)
  • सामान्य व्यापारी और सेवा प्रदाताओं के लिए।
  1. कंपोज़िशन स्कीम पंजीकरण (Composition Scheme Registration)
  • छोटे व्यवसायियों के लिए सरल कर भुगतान प्रणाली।
  • टर्नओवर सीमा: ₹1.5 करोड़ (कुछ राज्यों में ₹75 लाख)।
  1. कैजुअल टैक्सेबल पर्सन पंजीकरण (Casual Taxable Person Registration)
  • जो अस्थायी व्यापार करते हैं, जैसे मेलों में स्टॉल लगाना।
  1. नॉन-रेजिडेंट पंजीकरण (Non-Resident Registration)
  • विदेशी कंपनियों या व्यक्तियों के लिए।

(D) पंजीकरण के लिए आवश्यक दस्तावेज़

श्रेणी

आवश्यक दस्तावेज़

व्यक्ति (Individual)

PAN कार्ड, आधार कार्ड, फोटो, बैंक विवरण, व्यवसाय स्थल का प्रमाण।

कंपनी (Company)

कंपनी का PAN, प्रमाण पत्र, अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता का PAN और आधार, बैंक विवरण।

पार्टनरशिप फर्म

साझेदारी डीड, पार्टनर्स का PAN और आधार, व्यवसाय स्थल का प्रमाण।

ई-कॉमर्स विक्रेता

ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म से अनुबंध, PAN, आधार।

(E) पंजीकरण प्रक्रिया (Step-by-Step Guide)

Step 1: जीएसटी पोर्टल पर जाएँ

  • आधिकारिक वेबसाइट: gst.gov.in
  • “Services → Registration → New Registration” पर क्लिक करें।

Step 2: बेसिक विवरण भरें

  • टैक्सपेयर प्रकार: (Taxpayer type) चुनें।
  • राज्य और जिला: जहाँ आपका व्यवसाय स्थित है।
  • PAN और ईमेल/मोबाइल: OTP वेरिफिकेशन के लिए।

Step 3: TRN (Temporary Reference Number) प्राप्त करें

  • OTP वेरिफिकेशन के बाद TRN जनरेट होगा।
  • इसे भविष्य के लॉगिन के लिए सुरक्षित रखें।

Step 4: विस्तृत जानकारी भरें

  • व्यवसाय की जानकारी, बैंक विवरण, स्थान का पता।
  • आवश्यक दस्तावेज़ अपलोड करें।

Step 5: ई-साइन और सबमिट करें

  • आधार आधारित OTP या डिजिटल सिग्नेचर (DSC) से फॉर्म को ई-साइन करें।

Step 6: GSTIN प्राप्त करें

  • आवेदन स्वीकृत होने के बाद GSTIN जारी होगा।
  • यह 15 अंकों का यूनिक नंबर होगा।

(F) जीएसटी पंजीकरण के लाभ

  1. कानूनी मान्यता प्राप्त होती है।
  2. बड़े ग्राहकों और सरकारी टेंडरों में अवसर बढ़ते हैं।
  3. Input Tax Credit (ITC) का लाभ मिलता है।
  4. ऑनलाइन व्यापार (e-commerce) संभव होता है।
  5. ब्रांड की विश्वसनीयता बढ़ती है।

(G) पंजीकरण न कराने पर दंड

यदि आवश्यक होने पर जीएसटी पंजीकरण नहीं कराया जाता है तो:

  • ₹10,000 या बकाया कर का 10% (जो अधिक हो) जुर्माना।
  • जानबूझकर कर चोरी पर 100% दंड।

9. GST रिटर्न फाइलिंग (Return Filing)

जीएसटी में रिटर्न का मतलब है — व्यवसाय की बिक्री (Sales), खरीद (Purchases), टैक्स भुगतान और ITC विवरण को सरकार को रिपोर्ट करना। रिटर्न फाइल करना हर करदाता का कानूनी दायित्व है।

(A) रिटर्न के प्रकार

रिटर्न का नाम

उद्देश्य

फाइलिंग की अवधि

GSTR-1

आउटवर्ड सप्लाई (Sales) की डिटेल्स

मासिक/त्रैमासिक

GSTR-2B

ITC के लिए ऑटो जनरेट स्टेटमेंट

केवल व्यू

GSTR-3B

टैक्स भुगतान और समरी रिटर्न

मासिक

GSTR-4

कंपोज़िशन स्कीम करदाताओं के लिए

वार्षिक

GSTR-9

वार्षिक रिटर्न

सालाना

GSTR-9C

ऑडिट रिटर्न

सालाना

IFF (Invoice Furnishing Facility)

QRMP स्कीम के लिए इनवॉइस विवरण

मासिक

(B) GSTR-1 — विस्तृत विवरण

  • उद्देश्य: बिक्री की हर इनवॉइस को रिपोर्ट करना।
  • डेडलाइन:
  • मासिक फाइलर: अगले महीने की 11 तारीख तक।
  • QRMP फाइलर: प्रत्येक तिमाही में।
  • कैसे फाइल करें:
  • GST पोर्टल पर लॉगिन → GSTR-1 → इनवॉइस अपलोड → सेव → सबमिट → फाइल।

(C) GSTR-3B — समरी और भुगतान

  • उद्देश्य: टैक्स भुगतान और ITC का समरी रिटर्न।
  • डेडलाइन:
  • मासिक फाइलर: अगले महीने की 20 तारीख तक।

नवीनतम अपडेट (2025):

  • जुलाई 2025 से GSTR-3B के कुछ हिस्से non-editable कर दिए गए हैं।
  • Auto-populated डेटा GSTR-1 और IFF से आएगा।
  • करदाता अब इन फील्ड्स को मैन्युअली बदल नहीं पाएंगे।
  • इसका उद्देश्य डेटा में पारदर्शिता और धोखाधड़ी रोकना है।

(D) GSTR-2B — ITC स्टेटमेंट

  • यह केवल View-Only स्टेटमेंट है।
  • इसमें सप्लायर द्वारा GSTR-1 में भरे गए डेटा के आधार पर आपका ITC (Input Tax Credit) दिखता है।
  • यह reconciliation के लिए महत्वपूर्ण है।

(E) वार्षिक रिटर्न (GSTR-9 और 9C)

  • GSTR-9: सभी लेन-देन का सालाना सारांश।
  • GSTR-9C: ऑडिटेड कारोबारों के लिए।
  • डेडलाइन: 31 दिसंबर तक।

(F) QRMP स्कीम (Quarterly Return, Monthly Payment)

  • छोटे करदाताओं के लिए सुविधा।
  • रिटर्न तिमाही में और टैक्स भुगतान मासिक
  • इसमें IFF का उपयोग होता है।

(G) रिटर्न फाइलिंग प्रक्रिया (Step-by-Step)

Step 1: जीएसटी पोर्टल पर लॉगिन करें

  • GSTIN और पासवर्ड का उपयोग करें।

Step 2: रिटर्न का चयन करें

  • जैसे GSTR-1, GSTR-3B आदि।

Step 3: डेटा अपलोड करें

  • बिक्री, खरीद, ITC का विवरण भरें।
  • यदि e-invoicing का उपयोग किया है तो डेटा ऑटो-फिल होगा।

Step 4: टैक्स भुगतान करें

  • नेट टैक्स देनदारी की गणना करें।
  • ऑनलाइन भुगतान करें (Net Banking, UPI, NEFT आदि)।

Step 5: रिटर्न फाइल करें

  • OTP या DSC के माध्यम से रिटर्न सबमिट करें।
  • रसीद (Acknowledgement Number) डाउनलोड करें।

(H) समय पर रिटर्न न फाइल करने के परिणाम

  1. Late Fee:
  • प्रति दिन ₹50 (CGST ₹25 + SGST ₹25)।
  • अधिकतम ₹5000।
  1. Interest:
  • 18% प्रति वर्ष।
  1. E-Way Bill ब्लॉक:
  • लगातार दो महीने रिटर्न न फाइल करने पर e-Way Bill जनरेशन बंद हो सकता है।
  1. ITC अवरुद्ध:
  • समय पर GSTR-1 न भरने पर आपके ग्राहकों को ITC नहीं मिलेगा।

(I) नवीनतम अपडेट्स (2025)

  • 3-वर्षीय लिमिट: अब किसी भी पुराने रिटर्न को 3 साल से ज्यादा पुराने पीरियड के लिए फाइल नहीं किया जा सकता।
  • Auto-Population Locking: GSTR-3B के कई फील्ड अब GSTR-1 से सीधे जुड़ेंगे।
  • Amnesty Scheme: पुराने रिटर्न और विवादों के निपटान के लिए।

(J) उदाहरण: GSTR-3B फाइलिंग

मान लें एक व्यापारी की:

  • बिक्री: ₹5,00,000
  • खरीद: ₹3,00,000
  • GST दर: 18%

गणना:

  • आउटपुट GST = 5,00,000 × 18% = ₹90,000
  • इनपुट GST = 3,00,000 × 18% = ₹54,000
  • नेट देनदारी = 90,000 – 54,000 = ₹36,000

फाइलिंग:

  • GSTR-3B में ₹36,000 टैक्स भुगतान किया जाएगा।
  • यह राशि ऑनलाइन पेमेंट के माध्यम से सीधे सरकार के खाते में जाएगी।

10. इनपुट टैक्स क्रेडिट (Input Tax Credit - ITC)

(A) ITC क्या है?

इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) एक ऐसा मैकेनिज़्म है जिसमें व्यवसाय अपनी खरीदारी (Purchases) पर दिए गए जीएसटी को अपनी बिक्री (Sales) पर देय जीएसटी से घटा सकता है।

  • सरल शब्दों में, जब कोई व्यापारी वस्तुएँ या सेवाएँ खरीदता है, तो उस पर GST देता है।
  • बाद में जब वही व्यापारी वस्तुएँ बेचता है, तो वह सरकार को केवल नेट टैक्स देता है।

सूत्र: नेट देय GST = आउटपुट GST (बिक्री पर) – इनपुट GST (खरीद पर)

(B) ITC का उद्देश्य

  1. टैक्स के दोहरे भुगतान को रोकना।
  2. उत्पाद की लागत कम करना।
  3. व्यवसाय के नकदी प्रवाह को संतुलित करना।
  4. कराधान में पारदर्शिता और सरलता लाना।

(C) ITC लेने की पात्रता (Eligibility Criteria)

शर्त

विवरण

GST पंजीकृत होना चाहिए

ITC केवल GST पंजीकृत व्यक्ति ही ले सकता है।

वैध टैक्स इनवॉइस

सप्लायर से प्राप्त वैध GST इनवॉइस होना आवश्यक है।

सामान/सेवा प्राप्त होना चाहिए

ITC तभी मिलेगा जब सामान/सेवा वास्तव में प्राप्त हो जाए।

रिटर्न फाइल करना अनिवार्य

सप्लायर और रिसीवर दोनों को समय पर GSTR-1 और GSTR-3B फाइल करना होगा।

भुगतान 180 दिन में करना होगा

यदि सप्लायर को भुगतान 180 दिन में नहीं किया गया तो ITC रिवर्स हो जाएगा।

(D) ITC न मिलने वाली स्थितियाँ

नीचे कुछ ऐसी स्थितियाँ दी गई हैं जब ITC का दावा नहीं किया जा सकता:

खर्च का प्रकार

कारण

पर्सनल खर्च

व्यक्तिगत उपयोग के सामान पर ITC नहीं मिलेगा।

मोटर वाहन (विशेष मामलों को छोड़कर)

जब तक वाहन का उपयोग परिवहन व्यवसाय में न हो।

फ्री सैंपल/डोनेशन

बिना शुल्क दी गई वस्तुओं पर ITC नहीं।

आउटडोर कैटरिंग/फूड खर्च

जब तक ये कर्मचारियों के लिए अनिवार्य न हों।

दंड और ब्याज

जुर्माने पर ITC नहीं।

(E) ITC का क्लेम करने की प्रक्रिया

Step 1: GSTR-2B में ITC जांचें

  • जीएसटी पोर्टल पर लॉगिन करें और GSTR-2B डाउनलोड करें।
  • यह ऑटो-जनरेट स्टेटमेंट है जिसमें सप्लायर की बिक्री का डेटा दिखाई देता है।

Step 2: सप्लायर का GST अनुपालन जांचें

  • ITC तभी मिलेगा जब सप्लायर ने GSTR-1 फाइल किया हो।
  • यदि सप्लायर ने डेटा अपलोड नहीं किया, तो आपका ITC ब्लॉक हो सकता है।

Step 3: ITC को GSTR-3B में रिपोर्ट करें

  • Table 4 में इनपुट टैक्स क्रेडिट की डिटेल भरें।
  • केवल वैध और पात्र ITC ही रिपोर्ट करें।

Step 4: Adjustment और Payment

  • यदि आउटपुट GST > इनपुट GST, तो बैलेंस राशि का भुगतान करें।
  • यदि इनपुट GST > आउटपुट GST, तो क्रेडिट अगले महीने ट्रांसफर होगा।

(F) ITC का व्यावहारिक उदाहरण

स्थिति:

  • व्यापारी ने ₹1,00,000 का माल खरीदा, जिस पर 18% GST = ₹18,000 दिया।
  • व्यापारी ने ₹1,50,000 का माल बेचा, जिस पर 18% GST = ₹27,000 वसूला।

गणना:

  • आउटपुट GST = ₹27,000
  • इनपुट GST = ₹18,000
  • नेट देय GST = 27,000 – 18,000 = ₹9,000

व्यापारी को केवल ₹9,000 सरकार को भुगतान करना होगा।

(G) ITC रिवर्सल (Reversal of ITC)

कभी-कभी ऐसी स्थिति आती है जब पहले लिए गए ITC को वापस करना पड़ता है। कारण:

  1. सप्लायर को भुगतान 180 दिन में न करना।
  2. वस्तु/सेवा का व्यक्तिगत उपयोग।
  3. चोरी, नुकसान या फ्री वितरण में उपयोग।

रिवर्सल का तरीका:

  • GSTR-3B में Table 4(B) में रिवर्सल राशि भरें।
  • ब्याज भी देय होगा।

(H) नवीनतम अपडेट्स (2025 तक)

अपडेट

विवरण

GSTR-2B अनिवार्य

ITC क्लेम केवल GSTR-2B में उपलब्ध डेटा पर आधारित होगा।

Time Limit

किसी वित्तीय वर्ष के लिए ITC क्लेम की अंतिम तारीख 30 नवंबर होगी।

Non-compliant Supplier Impact

यदि सप्लायर ने GSTR-1 फाइल नहीं किया तो ग्राहक को ITC नहीं मिलेगा।

AI-आधारित चेकिंग

2025 से जीएसटी पोर्टल में ITC फ्रॉड रोकने के लिए AI सिस्टम जोड़ा गया।

(I) ITC लेने के फायदे

  1. टैक्स का बोझ कम होता है।
  2. कैश फ्लो संतुलित रहता है।
  3. लागत मूल्य घटता है, जिससे उत्पाद प्रतिस्पर्धी बनते हैं।
  4. व्यवसाय में सटीक लेखांकन संभव होता है।

11. ई-इनवॉइसिंग (E-Invoicing)

(A) ई-इनवॉइसिंग क्या है?

ई-इनवॉइसिंग एक डिजिटल प्रणाली है जिसमें सभी B2B इनवॉइस सरकार के पोर्टल (IRP – Invoice Registration Portal) पर जनरेट और वेरिफाई किए जाते हैं।

  • इसका उद्देश्य टैक्स चोरी को रोकना और रिटर्न फाइलिंग को सरल बनाना है।
  • प्रत्येक इनवॉइस पर यूनिक इनवॉइस रेफरेंस नंबर (IRN) और QR कोड जनरेट होता है।

(B) ई-इनवॉइसिंग की आवश्यकता

  1. फर्जी इनवॉइस रोकना।
  2. टैक्स डेटा का रियल-टाइम रिकॉर्ड।
  3. रिटर्न फाइलिंग के लिए ऑटो-पॉपुलेटेड डेटा।
  4. ऑडिट और ट्रैकिंग को आसान बनाना।
  5. अंतर्राष्ट्रीय मानकों (JSON) के अनुरूप इनवॉइस तैयार करना।

(C) ई-इनवॉइसिंग के लिए पात्रता

सरकार ने टर्नओवर आधारित चरणबद्ध तरीके से ई-इनवॉइसिंग लागू की है:

वित्तीय वर्ष का कुल टर्नओवर

लागू होने की तिथि

₹500 करोड़ या अधिक

1 अक्टूबर 2020

₹100 करोड़ या अधिक

1 जनवरी 2021

₹50 करोड़ या अधिक

1 अप्रैल 2021

₹20 करोड़ या अधिक

1 अप्रैल 2022

₹10 करोड़ या अधिक

1 अक्टूबर 2022

₹5 करोड़ या अधिक

1 अगस्त 2023

₹2 करोड़ या अधिक

1 अप्रैल 2025 (नवीनतम अपडेट)

नोट: अब जिनका वार्षिक टर्नओवर ₹2 करोड़ या उससे अधिक है, उनके लिए ई-इनवॉइसिंग अनिवार्य है।

(D) ई-इनवॉइसिंग की प्रक्रिया (Step-by-Step Guide)

Step 1: JSON फाइल तैयार करें

  • अपने अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर (Tally, Zoho, Busy आदि) में इनवॉइस डेटा तैयार करें।
  • डेटा JSON फॉर्मेट में एक्सपोर्ट करें।

Step 2: IRP पोर्टल पर अपलोड करें

  • IRP (Invoice Registration Portal) पर लॉगिन करें।
  • JSON फाइल अपलोड करें।

Step 3: IRN और QR कोड जनरेट होगा

  • पोर्टल हर इनवॉइस के लिए IRN और QR कोड प्रदान करेगा।
  • यह QR कोड इनवॉइस पर प्रिंट करना अनिवार्य है।

Step 4: GSTR-1 में ऑटो अपडेट

  • ई-इनवॉइसिंग के बाद डेटा सीधे GSTR-1 में ऑटोमेटिकली भर जाएगा।
  • मैन्युअल एंट्री की आवश्यकता नहीं।

(E) ई-इनवॉइसिंग के लाभ

लाभ

विवरण

टैक्स चोरी रोकथाम

फर्जी इनवॉइस तुरंत पकड़े जा सकते हैं।

समय की बचत

रिटर्न फाइलिंग और ऑडिट सरल।

डेटा इंटीग्रेशन

GSTR-1 और e-Way Bill ऑटो जनरेट।

पारदर्शिता

सभी लेन-देन का रियल-टाइम रिकॉर्ड।

ऑडिट में आसानी

सभी इनवॉइस सुरक्षित रूप से संग्रहित।

(F) ई-इनवॉइसिंग से जुड़ी सामान्य गलतियाँ

  1. JSON फाइल में गलत GSTIN दर्ज करना।
  2. IRN जनरेट न करना और इनवॉइस सीधे ग्राहक को देना।
  3. समय पर QR कोड न जोड़ना।
  4. गलत HSN कोड का उपयोग करना।

(G) नवीनतम अपडेट्स (2025)

अपडेट

विवरण

टर्नओवर सीमा घटकर ₹2 करोड़

अब छोटे व्यवसायों को भी ई-इनवॉइसिंग करनी होगी।

QR कोड स्कैनिंग सुविधा

मोबाइल ऐप से रियल-टाइम इनवॉइस वेरिफिकेशन।

AI मॉनिटरिंग

सरकार अब AI आधारित एल्गोरिथ्म से फर्जी इनवॉइस पकड़ रही है।

(H) व्यावहारिक उदाहरण

मान लें कि ABC Pvt. Ltd. ने ₹10,00,000 का माल बेचा:

  • GST @ 18% = ₹1,80,000
  • कुल राशि = ₹11,80,000

प्रक्रिया:

  1. इनवॉइस सॉफ्टवेयर से JSON फाइल तैयार।
  2. IRP पर अपलोड → IRN और QR कोड प्राप्त।
  3. अंतिम इनवॉइस पर QR कोड प्रिंट।
  4. यह डेटा अपने-आप GSTR-1 में चला गया।

12. ई-वे बिल (E-Way Bill)

(A) ई-वे बिल क्या है?

ई-वे बिल (Electronic Way Bill) एक डिजिटल दस्तावेज़ है जो वस्तुओं की राज्य के अंदर या राज्यों के बीच आवाजाही के समय GST नेटवर्क (GSTN) पर जनरेट किया जाता है।

  • यह वस्तुओं के परिवहन की वैधता और टैक्स भुगतान का प्रमाण है।
  • हर ट्रक, लॉरी या वाहन जिसमें ₹50,000 से अधिक मूल्य का माल है, उसे E-Way Bill साथ में रखना अनिवार्य है।

नोट: यह प्रणाली 1 अप्रैल 2018 से पूरे भारत में लागू है।

(B) ई-वे बिल की आवश्यकता

  1. राज्य के अंदर माल की आवाजाही (Intra-State Movement)
  2. राज्यों के बीच माल की आवाजाही (Inter-State Movement)
  3. माल की वापसी (Return of Goods) या ट्रांसफर के लिए।
  4. ई-कॉमर्स कंपनियों द्वारा की जाने वाली डिलीवरी।

यदि माल का मूल्य ₹50,000 से कम है तो ई-वे बिल अनिवार्य नहीं।

(C) ई-वे बिल कौन जनरेट करेगा?

स्थिति

उत्तरदायी व्यक्ति

माल का सप्लायर (Seller)

अगर वह खुद माल भेज रहा है।

माल का रिसीवर (Buyer)

अगर रिसीवर स्वयं माल मंगवा रहा है।

ट्रांसपोर्टर

जब सप्लायर और रिसीवर दोनों ने ई-वे बिल नहीं बनाया।

(D) ई-वे बिल के लिए आवश्यक जानकारी

  1. GSTIN (सप्लायर और रिसीवर का)।
  2. इनवॉइस विवरण: इनवॉइस नंबर, तिथि, मूल्य।
  3. माल का विवरण: HSN कोड, मात्रा, यूनिट।
  4. परिवहन विवरण: वाहन नंबर, ट्रांसपोर्टर ID।
  5. माल की कीमत: यदि ₹50,000 से अधिक है।

(E) ई-वे बिल के घटक

ई-वे बिल मुख्यतः दो भागों में विभाजित होता है:

भाग

विवरण

Part A

सप्लायर, रिसीवर, इनवॉइस, HSN कोड, माल की जानकारी।

Part B

परिवहन साधन और वाहन से संबंधित जानकारी।

(F) ई-वे बिल की वैधता अवधि

ई-वे बिल की वैधता माल की दूरी पर आधारित होती है।

दूरी

वैधता अवधि

0-100 किमी तक

1 दिन

प्रत्येक अतिरिक्त 100 किमी

1 अतिरिक्त दिन

500 किमी

5 दिन

नोट:

  • ई-वे बिल की वैधता माल की पिकअप समय से शुरू होती है।
  • एक्सपायर होने के बाद यह अवैध हो जाता है और जुर्माना लग सकता है।

(G) ई-वे बिल जनरेट करने की प्रक्रिया

Step 1: पोर्टल पर लॉगिन करें

  • आधिकारिक वेबसाइट: gov.in
  • यूजर ID और पासवर्ड डालकर लॉगिन करें।

Step 2: “Generate New” पर क्लिक करें

  • डैशबोर्ड पर “E-Way Bill → Generate New” विकल्प चुनें।

Step 3: Part A विवरण भरें

  • From/To: सप्लायर और रिसीवर का विवरण।
  • इनवॉइस नंबर और तिथि।
  • माल की कीमत और HSN कोड।

Step 4: Part B विवरण भरें

  • वाहन नंबर या ट्रांसपोर्टर ID।

Step 5: ई-वे बिल जनरेट करें

  • सिस्टम 12 अंकों का यूनिक नंबर जनरेट करेगा।
  • इसे इनवॉइस पर प्रिंट करें और वाहन के साथ रखें।

(H) ई-वे बिल को संशोधित या रद्द करना

  • संशोधन (Edit): केवल Part B (वाहन विवरण) को बदला जा सकता है।
  • रद्द (Cancel):
  • जनरेट होने के 24 घंटे के भीतर ही रद्द किया जा सकता है।
  • रद्द होने पर इसका उपयोग नहीं किया जा सकता।

(I) जुर्माना और दंड

यदि वाहन के पास वैध ई-वे बिल नहीं है:

  1. ₹10,000 का जुर्माना या
  2. माल का मूल्य + टैक्स के बराबर पेनल्टी (जो भी अधिक हो)।
  3. माल को सीज (Seize) कर लिया जाएगा।

(J) नवीनतम अपडेट (2025)

अपडेट

विवरण

OTP आधारित वेरिफिकेशन

अब हर ई-वे बिल जनरेशन पर मोबाइल OTP की आवश्यकता होगी।

AI मॉनिटरिंग सिस्टम

फर्जी ई-वे बिलों को रोकने के लिए।

QR कोड अनिवार्य

अब सभी ई-वे बिल में QR कोड प्रिंट करना अनिवार्य है।

फास्टैग इंटीग्रेशन

हाईवे टोल पर ट्रक की ई-वे बिल जानकारी ऑटो-मैच होगी।

13. GST के नवीनतम अपडेट्स (2025 तक)

जीएसटी प्रणाली को समय-समय पर अपडेट किया जाता है। 2025 तक के कुछ महत्वपूर्ण बदलाव और सुधार इस प्रकार हैं:

(A) रिटर्न फाइलिंग में बदलाव

अपडेट

विवरण

3-वर्षीय लिमिट

अब किसी पुराने रिटर्न को 3 साल से अधिक पुराने पीरियड के लिए फाइल नहीं किया जा सकता।

Auto-Populated GSTR-3B

GSTR-1 का डेटा सीधे GSTR-3B में ऑटोमेटिक भर जाएगा।

Late Fee Amnesty Scheme

पुराने रिटर्न फाइल करने पर लेट फीस में छूट।

(B) इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) अपडेट्स

  1. GSTR-2B अनिवार्य: ITC क्लेम अब केवल GSTR-2B में दिखाए गए डेटा पर ही संभव।
  2. AI आधारित ITC फ्रॉड डिटेक्शन: 2025 से सरकार ने AI एल्गोरिद्म के माध्यम से फर्जी ITC का पता लगाना शुरू किया।
  3. टाइम लिमिट बदलाव: ITC क्लेम की अंतिम तिथि अब 30 नवंबर कर दी गई है।

(C) ई-इनवॉइसिंग अपडेट्स

अपडेट

विवरण

टर्नओवर सीमा घटकर ₹2 करोड़

अब ₹2 करोड़ या उससे अधिक टर्नओवर वाले व्यवसायों के लिए ई-इनवॉइसिंग अनिवार्य।

मोबाइल QR कोड स्कैनिंग

किसी भी ग्राहक को मोबाइल ऐप से इनवॉइस वेरिफाई करने की सुविधा।

फर्जी इनवॉइस पर सीधा ब्लॉक

गलत डेटा डालने पर GSTIN ब्लॉक हो सकता है।

(D) ई-वे बिल अपडेट्स

  1. फास्टैग इंटीग्रेशन:
  • हाईवे टोल पर वाहन की जानकारी अपने-आप वेरिफाई होगी।
  1. QR कोड अनिवार्य:
  • हर ई-वे बिल में अब QR कोड प्रिंट करना जरूरी।
  1. OTP वेरिफिकेशन:
  • ई-वे बिल जनरेशन के समय मोबाइल OTP की आवश्यकता।

(E) कर चोरी रोकने के लिए नए प्रावधान

  1. डायनामिक QR कोड अनिवार्य:
  • ₹500 से अधिक के B2C इनवॉइस पर।
  1. AI आधारित निगरानी:
  • सभी GSTR और ई-इनवॉइस को AI मॉनिटर करेगा।
  1. उच्च जोखिम वाले करदाताओं की प्रोफाइलिंग:
  • ITC फ्रॉड और ई-वे बिल मिसमैच वाले करदाताओं को ऑटो-फ्लैग किया जाएगा।

(F) MSME और छोटे व्यवसायों के लिए राहत

राहत योजना

विवरण

QRMP स्कीम में विस्तार

₹5 करोड़ तक टर्नओवर वाले व्यापारी तिमाही रिटर्न फाइल कर सकते हैं।

लेट फीस में कमी

छोटे व्यवसायों के लिए लेट फीस की सीमा कम की गई।

Amnesty Scheme 2025

पुराने विवाद और जुर्मानों के निपटान में राहत।

(G) GST काउंसिल की मुख्य सिफारिशें (2025)

  1. टैक्स स्लैब्स की समीक्षा:
  • 12% और 18% स्लैब को मिलाकर 15% करने पर विचार।
  1. डिजिटल पेमेंट प्रोत्साहन:
  • डिजिटल लेन-देन पर अतिरिक्त ITC लाभ।
  1. राज्यों के लिए मुआवजा तंत्र मजबूत करना।
  2. ई-इनवॉइसिंग और ई-वे बिल का एकीकरण।

(H) 2025 तक की बड़ी उपलब्धियाँ

  1. जीएसटी संग्रह रिकॉर्ड स्तर पर:
  • जुलाई 2025 में ₹2 लाख करोड़ से अधिक का संग्रह।
  1. 80% रिटर्न पूरी तरह ऑटोमेटिक:
  • AI और ऑटो-पॉपुलेटेड सिस्टम की वजह से।
  1. टैक्स चोरी में 40% की कमी:
  • डिजिटल निगरानी से।

(I) निष्कर्ष

जीएसटी प्रणाली ने भारतीय कराधान ढांचे को एकीकृत और पारदर्शी बनाया है। 2025 तक इसमें हुए तकनीकी सुधार, जैसे:

  • AI आधारित निगरानी,
  • ऑटोमेशन,
  • ई-इनवॉइसिंग और ई-वे बिल का एकीकरण, इन सबने इसे और प्रभावी बनाया है।

व्यवसायियों के लिए अब जीएसटी अनुपालन पहले से सरल और पारदर्शी हो गया है, लेकिन फर्जीवाड़ा और गैर-अनुपालन पर दंड काफी सख्त कर दिए गए हैं। आने वाले वर्षों में जीएसटी को और सरल और डिजिटल बनाने की दिशा में सरकार लगातार कार्य कर रही है।

14. GST Amnesty Scheme और विवाद निपटान

(A) Amnesty Scheme क्या है?

Amnesty Scheme एक विशेष योजना है जो सरकार समय-समय पर जारी करती है। इसका उद्देश्य:

  1. पुराने बकाया टैक्स और रिटर्न फाइलिंग में छूट देना,
  2. व्यापारियों को लेट फीस और पेनल्टी में राहत देना,
  3. टैक्स विवादों को निपटाना और जीएसटी प्रणाली को सरल बनाना है।

(B) GST Amnesty Scheme की आवश्यकता

भारत में जीएसटी लागू होने के शुरुआती वर्षों में:

  • कई व्यापारियों ने समय पर रिटर्न फाइल नहीं किए,
  • गलत ITC क्लेम किया गया,
  • या पंजीकरण रद्द (Cancelled Registration) हो गया।

इससे हजारों करोड़ रुपए के विवाद पेंडिंग हो गए। इस समस्या को हल करने के लिए सरकार समय-समय पर Amnesty Scheme लाती है।

(C) 2025 की नवीनतम Amnesty Scheme

मुख्य विशेषताएँ:

विशेषता

विवरण

लागू अवधि

1 जुलाई 2017 से 31 मार्च 2023 तक के सभी बकाया मामलों पर लागू।

लेट फीस में छूट

GSTR-1, GSTR-3B, GSTR-9, और CMP-08 में लेट फीस 80%-90% तक माफ।

पंजीकरण पुनर्स्थापना

जिनका पंजीकरण रद्द हो गया है, वे सरल आवेदन के बाद पुनः सक्रिय कर सकते हैं।

विवाद निपटान

चल रहे मामलों को निर्धारित प्रतिशत भुगतान करके बंद किया जा सकता है।

अंतिम तिथि

31 मार्च 2026।

(D) Amnesty Scheme का लाभ कैसे उठाएँ?

Step 1: पुराने रिटर्न की पहचान करें

  • जीएसटी पोर्टल पर लॉगिन करें।
  • “Returns → Dashboard → Past Returns” में जाकर बकाया रिटर्न देखें।

Step 2: रिटर्न तैयार करें

  • पुराने रिटर्न को सही डेटा के साथ तैयार करें।
  • यदि इनवॉइस खो गए हैं, तो अनुमानित डेटा डालें, क्योंकि Amnesty Scheme में कुछ छूट मिलती है।

Step 3: लेट फीस में छूट देखें

  • सिस्टम ऑटोमैटिक लेट फीस रियायती दर पर कैलकुलेट करेगा।
  • उदाहरण: यदि सामान्य लेट फीस ₹10,000 है, तो Amnesty Scheme में यह केवल ₹1,000 रह सकती है।

Step 4: भुगतान और फाइलिंग करें

  • नेट बैंकिंग या UPI से टैक्स का भुगतान करें।
  • रिटर्न फाइल करने के बाद पेनल्टी और ब्याज स्वतः समायोजित हो जाएगा।

(E) विवाद निपटान (Dispute Resolution)

जीएसटी में अक्सर निम्न विवाद होते हैं:

  1. गलत ITC क्लेम।
  2. टैक्स का कम भुगतान।
  3. ई-वे बिल होने पर पेनल्टी।
  4. विवादित टैक्स नोटिस।

नया सिस्टम: 2025 में सरकार ने “GST Dispute Settlement Portal” लॉन्च किया है। व्यापारी ऑनलाइन विवाद निपटान कर सकते हैं।

विवाद निपटान प्रक्रिया

चरण

विवरण

Step 1

जीएसटी पोर्टल पर “Dispute Settlement” टैब पर जाएं।

Step 2

पेंडिंग नोटिस या विवाद को चुनें।

Step 3

भुगतान करने योग्य राशि देखें।

Step 4

नेट बैंकिंग या UPI से राशि का भुगतान करें।

Step 5

केस ऑटोमेटिक क्लोज़ हो जाएगा और प्रमाण पत्र डाउनलोड करें।

(F) Amnesty Scheme के लाभ

  1. व्यापारियों को राहत:
  • पुराने बकाया टैक्स और लेट फीस से मुक्ति।
  1. सरकार को राजस्व:
  • बंद पड़े टैक्स विवादों से सरकार को हजारों करोड़ की वसूली।
  1. जीएसटी सिस्टम पर भरोसा बढ़ना:
  • व्यापारी नियमित रिटर्न फाइल करने के लिए प्रेरित होते हैं।

(G) सीमाएँ

  • Amnesty Scheme का लाभ केवल निर्धारित अवधि तक ही।
  • जानबूझकर फर्जी ITC क्लेम करने वालों को राहत नहीं।
  • समय सीमा चूकने पर फिर से सामान्य पेनल्टी लागू।

15. GST में दंड और ब्याज (Penalty & Interest)

जीएसटी प्रणाली में अनुशासन और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए दंड और ब्याज का प्रावधान है। यह किसी भी व्यापारी पर गलत कार्य या अनुपालन करने पर लागू होता है।

(A) दंड (Penalty)

दंड मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं:

(a) सामान्य दंड (General Penalty)

(b) विशेष दंड (Specific Penalty)

(a) सामान्य दंड

यदि जीएसटी कानून का उल्लंघन किया गया है लेकिन कोई विशेष प्रावधान नहीं है, तो ₹25,000 तक का दंड लगाया जा सकता है।

(b) विशेष दंड

उल्लंघन

दंड (Penalty)

गलत जीएसटी पंजीकरण

₹10,000 या कर की राशि का 10% (जो भी अधिक हो)।

टैक्स का भुगतान करना

कर की राशि का 10% या ₹10,000 (जो भी अधिक हो)।

जानबूझकर टैक्स चोरी

कर की राशि का 100%।

ई-वे बिल होना

₹10,000 या टैक्स + माल का मूल्य (जो भी अधिक हो)।

फर्जी ITC क्लेम

कर की राशि का 100%।

(B) ब्याज (Interest)

ब्याज टैक्स के लेट पेमेंट या गलत ITC क्लेम पर लगता है।

दरें:

स्थिति

ब्याज दर

टैक्स का लेट भुगतान

18% प्रतिवर्ष

गलत ITC क्लेम

24% प्रतिवर्ष

ब्याज की गणना का उदाहरण:

  • बकाया टैक्स = ₹1,00,000
  • देरी = 30 दिन
  • ब्याज दर = 18%

(C) दंड प्रक्रिया (Penalty Procedure)

चरण

विवरण

Step 1

जीएसटी अधिकारी व्यापारी को नोटिस जारी करेगा।

Step 2

व्यापारी को 15 दिन का समय उत्तर देने के लिए दिया जाएगा।

Step 3

यदि व्यापारी उचित उत्तर नहीं देता, तो दंड लगाया जाएगा।

Step 4

व्यापारी को जीएसटी पोर्टल पर दंड राशि का भुगतान करना होगा।

(D) दंड से बचने के उपाय

  1. समय पर रिटर्न फाइल करें।
  2. केवल वैध ITC क्लेम करें।
  3. ई-वे बिल हमेशा वाहन के साथ रखें।
  4. सभी इनवॉइस और बिल का सही रिकॉर्ड रखें।
  5. किसी भी नोटिस का समय पर उत्तर दें।

(E) सरकार की नई पॉलिसी (2025)

नीति

विवरण

AI आधारित मॉनिटरिंग

फर्जी ITC क्लेम और गलत इनवॉइस तुरंत पकड़े जाएंगे।

ऑटो-पेनल्टी सिस्टम

GST पोर्टल खुद ही पेनल्टी कैलकुलेट करेगा।

अमनेस्टी स्कीम से राहत

पुराने विवादों में ब्याज और दंड में छूट।

16. निष्कर्ष

जीएसटी ने भारत के टैक्स सिस्टम को एकीकृत, पारदर्शी और डिजिटल बनाया है।

  • Amnesty Scheme व्यापारियों को पुरानी गलतियों को सुधारने का अवसर देती है।
  • वहीं, दंड और ब्याज प्रणाली जीएसटी के अनुपालन को मजबूत करती है।

2025 तक जीएसटी को और सरल और प्रभावी बनाने के लिए सरकार लगातार तकनीकी सुधार और AI आधारित निगरानी पर काम कर रही है। इससे टैक्स चोरी में कमी और राजस्व संग्रह में वृद्धि होगी।

17. वर्तमान में हुए GST में बदलाव

(A) 0% (शून्य प्रतिशत)

ताज़ा और कुछ आवश्यक वस्तुएँ जैसे: भारतीय ब्रेड (रोटी, परांठा), पनीर, UHT दूध, ड्राई राशन (जैसे आटा इत्यादि) आदि इस स्लैब में आते हैं, जिससे ये वस्तुएँ कर मुक्त हो गई हैं।

(B) 5% (पांच प्रतिशत)

रोजमर्रा की घरेलू और दैनिक उपयोग की वस्तुएँ जैसे: साबुन, शैम्पू, टूथपेस्ट, टूथब्रश, टॉयलेटरीज़, टेबलवेयर, किचनवेयर, स्टेशनरी (पेंसिल, नोटबुक आदि), कृषि उपकरण, और स्वास्थ्य सम्बन्धी आवश्यक वस्तुएँ आदि अब 5% की दर पर कर शामिल हैं।

(C) 18% (अठारह प्रतिशत)

अधिकांश उपभोक्ता वस्तुएँ और सेवाएँ जैसे: मोबाइल फोन, टीवी, एयर कंडीशनर, छोटे वाहन (12०० सीसी तक की कारें आदि), कंस्ट्रक्शन सामग्री (सीमेंट), छोटे इलेक्ट्रॉनिक्स, आदि इस स्लैब में आते हैं।

(D) 40% (चालीस प्रतिशत)

यह स्लैब विशेष रूप से “सिन” (sin) या विलासिता (luxury) वस्तुओं के लिए है—जैसे: तम्बाकू उत्पाद, पान मसाला, प्रीमियम वाहन, कोल्ड ड्रिंक्स, कैफीनयुक्त पेय, आदि। इन वस्तुओं पर 40% जीएसटी  लागू होगा। 

(E) सारांश तालिका (GST नई संरचना)

स्लैब (%)

किस पर लागू होता है

0%

आवश्यक वस्तुएँ जैसे ब्रेड, पनीर, दूध आदि

5%

घरेलू सामान, स्टेशनरी, कृषि उपकरण, स्वास्थ्य उत्पाद

18%

अधिकांश उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, वाहन, निर्माण सामग्री

40%

विलासिता / “सिन” वस्तुएँ जैसे लक्सरी कार, तम्बाकू, पेय इत्यादि

(F) अतिरिक्त प्वाइंट्स

  • पहले मौजूद स्लैब्स (5%, 12%, 18%, 28%) में से अब 12% और 28% को हटाकर केवल दो प्रमुख स्लैब (5% और 18%) रखे गए हैं, जिससे प्रक्रिया और संरचना सरल हो गई है।
  • नए स्लैब्स 22 सितंबर 2025 से लागू हैं, और अब प्रगति की दिशा में सरकार ने इस बदलाव को “GST 2.0” नाम दिया है।
  • कुछ आवश्यक वस्तुओं जैसे कि जीवन और स्वास्थ्य बीमा (individual policies), कुछ शिक्षण व अस्पताल सेवाएँ भी GST मुक्त (0%) कर दी गई हैं। 

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